अम्ल, क्षारक एवं लवण
ये क्यों ज़रूरी है
एक समोसा ज़्यादा खा लीजिए और पेट शिकायत करने लगता है — वही जलन वाली “एसिडिटी।” पानी में थोड़ा-सा खाने का सोडा घोलकर पी लीजिए, राहत मिल जाती है। नींबू चखिए तो खटास से चेहरा सिकुड़ जाता है। साबुन छूने पर वह अजीब-सा चिकना और कड़वा लगता है। सफ़ेद कमीज़ पर पड़ी करी की बूँद साबुन छूते ही लाल-भूरी हो जाती है, और पानी से धोते ही फिर पीली।
ये सब असल में एक ही छोटा-सा नाटक है: दो विपरीत तरह के पदार्थों की रस्साकशी — अम्ल (acids) और क्षारक (bases)। खटास और जलन के पीछे अम्ल हैं; कड़वाहट और चिकनाहट के पीछे क्षारक। और खाने का सोडा एसिडिटी इसीलिए शांत करता है क्योंकि एक क्षारक अम्ल को काट सकता है।
यह अध्याय आपको इसी रस्साकशी का नियम-पुस्तक थमा देता है: अम्ल और क्षारक को कैसे पहचानें, ये धातुओं के साथ और आपस में कैसे अभिक्रिया करते हैं, वह एक विचार जो किसी अम्ल को अम्ल बनाता है, वह pH संख्या जो इसे नापती है, और रोज़मर्रा के वे लवण — नमक, खाने का सोडा, धोने का सोडा, प्लास्टर ऑफ़ पेरिस — जो इन्हीं अभिक्रियाओं से बनते हैं। यह आपकी रसोई, आपके पेट और आपके टूथपेस्ट की केमिस्ट्री है।
असली बात
सारी बारीकियाँ हटा दें, तो पूरा अध्याय इन दो बातों पर टिका है:
अम्ल पानी में घुलने पर हाइड्रोजन आयन, H⁺(aq) (असल में H₃O⁺) छोड़ता है। क्षारक हाइड्रॉक्साइड आयन, OH⁻(aq) छोड़ता है। जब ये मिलते हैं, तो H⁺ और OH⁻ जुड़कर पानी बना लेते हैं — यानी अम्ल और क्षारक एक-दूसरे को उदासीन कर देते हैं।
बस इतना ही। खटास, लिटमस का रंग बदलना, धातुओं के साथ बुलबुले, एंटासिड से राहत — सब H⁺ और OH⁻ आयनों तक जाकर रुकता है। इससे दो नतीजे निकलते हैं और आगे का सारा खेल इन्हीं पर चलता है:
- चूँकि अम्ल = H⁺ और क्षारक = OH⁻, इन्हें मिलाने पर हमेशा वही मूल अभिक्रिया होती है: H⁺ + OH⁻ → H₂O। बचे हुए आयन जुड़कर एक लवण (salt) बनाते हैं। यानी अम्ल + क्षारक → लवण + पानी (एक उदासीनीकरण)।
- चूँकि सारा खेल इस बात का है कि कितने H⁺ (या OH⁻) घूम रहे हैं, हम इस पर एक संख्या डाल सकते हैं — pH स्केल, 0 से 14 तक।
“अम्ल = H⁺, क्षारक = OH⁻” जेब में रखिए, बाकी सब बस ब्योरा है।
आओ इसे आसान करके समझें
अम्ल और क्षारक पहचानना: सूचक (indicators)
लैब के रसायनों को पहचानने के लिए उन्हें कभी चखना या छूना नहीं चाहिए — इसलिए हम सूचक (indicators) इस्तेमाल करते हैं: ऐसे पदार्थ जो अम्ल और क्षारक में रंग (या गंध) बदल देते हैं।
- लिटमस (लाइकेन से मिला बैंगनी प्राकृतिक रंजक): अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देते हैं; क्षारक लाल लिटमस को नीला।
- फिनॉल़्थेलीन: अम्ल में रंगहीन, क्षारक में गुलाबी।
- मेथिल ऑरेंज: अम्ल में लाल, क्षारक में पीला।
- गंधीय सूचक (olfactory indicators) — जिनकी गंध बदलती है, जैसे प्याज़ या वनीला (क्षारक में इनकी गंध उड़ जाती है)। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए उपयोगी।
- प्राकृतिक सूचक: हल्दी (करी के दाग़ वाली बात — क्षारीय साबुन से लाल-भूरी होती है), लाल पत्तागोभी, कुछ फूलों की रंगीन पंखुड़ियाँ।
| सूचक | अम्ल में | क्षारक में |
|---|---|---|
| नीला लिटमस | लाल हो जाता है | नीला ही रहता है |
| लाल लिटमस | लाल ही रहता है | नीला हो जाता है |
| फिनॉल़्थेलीन | रंगहीन | गुलाबी |
| मेथिल ऑरेंज | लाल | पीला |
| हल्दी | पीली ही रहती है | लाल-भूरी |
आपके पास तीन परखनलियाँ हैं — आसुत जल, एक अम्ल और एक क्षारक — और सिर्फ़ लाल लिटमस पेपर। तीनों कैसे पहचानेंगे?
हर एक में लाल लिटमस डुबोइए। जो इसे नीला कर दे वह क्षारक है। बाकी दो में लाल लिटमस लाल ही रहेगा — अब जो नीला पेपर बना (क्षारक से), उसे बचे हुए दोनों में डुबोइए: जो इसे वापस लाल कर दे वह अम्ल है, और जो कुछ न बदले वह आसुत जल (उदासीन) है।
अम्ल और क्षारक कैसे अभिक्रिया करते हैं
अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन
ज़िंक को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में डालिए, धातु से बुलबुले निकलने लगते हैं। इस गैस के पास जलती तीली ले जाइए — यह तीखी “पॉप” आवाज़ के साथ जलती है, जो हाइड्रोजन की पहचान है।
अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस Zn(s) + H₂SO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + H₂(g)
धातु अम्ल में से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है (बिलकुल अध्याय 1 की विस्थापन अभिक्रियाओं की तरह)।
क्षारक + धातु → लवण + हाइड्रोजन (सिर्फ़ कुछ धातुएँ)
कुछ धातुएँ क्षारक में से भी हाइड्रोजन छोड़ती हैं। गरम सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ ज़िंक:
2NaOH(aq) + Zn(s) → Na₂ZnO₂(s) + H₂(g) (सोडियम ज़िंकेट)
यहाँ लवण का ऋणात्मक हिस्सा (ज़िंकेट) धातु और ऑक्सीजन से बना है। यह सभी धातुओं के साथ नहीं होता — यह ज़िंक और ऐलुमिनियम जैसी धातुओं की ख़ासियत है।
अम्ल + धातु कार्बोनेट / हाइड्रोजनकार्बोनेट → लवण + CO₂ + पानी
सोडियम कार्बोनेट (या खाने के सोडे) में तनु HCl डालिए और झाग उठते हैं — वह गैस कार्बन डाइऑक्साइड है। इसे चूने के पानी (lime water) में से गुज़ारिए, चूने का पानी दूधिया हो जाता है (कैल्शियम कार्बोनेट का सफ़ेद अवक्षेप)। यह दूधियापन CO₂ की पहचान है।
Na₂CO₃(s) + 2HCl(aq) → 2NaCl(aq) + H₂O(l) + CO₂(g) NaHCO₃(s) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l) + CO₂(g) Ca(OH)₂(aq) + CO₂(g) → CaCO₃(s)↓ + H₂O(l) (चूने का पानी दूधिया)
धातु कार्बोनेट / हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + पानी
अम्ल + क्षारक → लवण + पानी (उदासीनीकरण)
NaOH में फिनॉल़्थेलीन की एक बूँद डालिए (गुलाबी)। बूँद-बूँद HCl डालिए — जब क्षारक उदासीन हो जाता है तो गुलाबी रंग ग़ायब हो जाता है। फिर NaOH डालिए तो गुलाबी लौट आता है। अम्ल और क्षारक एक-दूसरे को काट देते हैं:
NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l) क्षारक + अम्ल → लवण + पानी (उदासीनीकरण अभिक्रिया)
धातु ऑक्साइड + अम्ल, और अधातु ऑक्साइड + क्षारक
कॉपर ऑक्साइड (काला) तनु HCl में घुलकर नीला-हरा कॉपर क्लोराइड का घोल बनाता है:
CuO(s) + 2HCl(aq) → CuCl₂(aq) + H₂O(l)
चूँकि धातु ऑक्साइड अम्ल के साथ ठीक क्षारक की तरह अभिक्रिया करता है (लवण + पानी देकर), इसलिए धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं। उल्टा रूप: CO₂ जैसा अधातु ऑक्साइड क्षारक (चूने के पानी) के साथ लवण + पानी देता है — यानी अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
एक धातु यौगिक A तनु HCl से अभिक्रिया करके झाग देता है; गैस जलती मोमबत्ती बुझा देती है, और एक उत्पाद कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) है। A पहचानिए और बैलेंस समीकरण लिखिए।
-
जो गैस लौ बुझा देती है और अम्ल से झाग बनाती है, वह कार्बन डाइऑक्साइड है — तो A एक कार्बोनेट (या हाइड्रोजनकार्बोनेट) है।
-
एक उत्पाद CaCl₂ है, तो धातु कैल्शियम है। कैल्शियम का कार्बोनेट है कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO₃। तो A = CaCO₃।
-
लिखिए: CaCO₃ + HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂।
-
क्लोरीन बैलेंस कीजिए (CaCl₂ में 2): HCl के आगे 2 लगाइए → CaCO₃(s) + 2HCl(aq) → CaCl₂(aq) + H₂O(l) + CO₂(g)। ✓
अम्ल को अम्ल क्या बनाता है? (वह है H⁺ आयन)
सारे अम्ल एक जैसा बर्ताव करते हैं — सब धातुओं के साथ हाइड्रोजन के बुलबुले देते हैं — जो किसी साझी चीज़ की ओर इशारा करता है। वह साझी चीज़ है हाइड्रोजन आयन, H⁺।
तनु HCl में से बिजली गुज़ारिए और परिपथ का बल्ब जल उठता है — घोल बिजली का चालन करता है। पर ग्लूकोज़ और ऐल्कोहॉल के घोल (जिनमें हाइड्रोजन भी होता है) चालन नहीं करते और अम्लीय नहीं हैं। तो बात सिर्फ़ हाइड्रोजन होने की नहीं — अम्ल हाइड्रोजन को H⁺ आयन के रूप में छोड़ते हैं जो धारा ढोते हैं।
ख़ास बात: H⁺ आयन सिर्फ़ पानी में बनते हैं। सूखी HCl गैस सूखे लिटमस को लाल नहीं करती; सिर्फ़ HCl का घोल करता है। पानी H⁺ को खींच लेता है:
HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻
हाइड्रोजन आयन अकेले नहीं रह सकते — वे पानी से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) बन जाते हैं। इसलिए हम H⁺(aq) या H₃O⁺ लिखते हैं। पानी में घुलने वाले क्षारक OH⁻ छोड़ते हैं:
NaOH(s) →[पानी] Na⁺(aq) + OH⁻(aq)
पानी में घुलने वाले क्षारक को क्षार (alkali) कहते हैं (जैसे NaOH, KOH)। सारे क्षारक क्षार नहीं होते — कई घुलते ही नहीं।
सूखी HCl गैस सूखे नीले लिटमस को लाल क्यों नहीं करती, पर HCl का घोल कर देता है?
क्योंकि अम्लीयता H⁺ आयनों से आती है, और HCl केवल पानी की मौजूदगी में H⁺ छोड़ता है (HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻)। सूखी गैस और सूखे पेपर में पानी नहीं है, तो H⁺ आयन नहीं बनते, इसलिए रंग नहीं बदलता।
⚠️ हमेशा अम्ल को पानी में डालिए, पानी को अम्ल में कभी नहीं। सांद्र अम्ल (या क्षारक) को पानी में घोलना तेज़ी से ऊष्माक्षेपी होता है — बहुत ऊष्मा निकलती है। अम्ल को धीरे-धीरे पानी में डालने से ऊष्मा सुरक्षित रूप से फैल जाती है। पानी को अम्ल में डालने से मिश्रण उछल सकता है और ऊष्मा से काँच चटक सकता है।
ताक़त नापना: pH स्केल
हम “कितना अम्लीय” पर एक संख्या डाल सकते हैं। एक सार्वत्रिक सूचक (universal indicator) (कई रंजकों का मिश्रण) हर हाइड्रोजन-आयन सांद्रता पर अलग रंग दिखाता है, जिसे pH स्केल, 0 से 14, पर दर्शाया जाता है:
- pH 7 = उदासीन (शुद्ध पानी)।
- pH 7 से कम = अम्लीय (pH जितना कम ⇒ H⁺ उतने ज़्यादा ⇒ अम्ल उतना तेज़)।
- pH 7 से ज़्यादा = क्षारीय (pH जितना ज़्यादा ⇒ OH⁻ उतने ज़्यादा)।
एक ज़रूरी बारीकी — तेज़ बनाम मंद (strong vs weak): एक ही सांद्रता पर एक तेज़ अम्ल (HCl) मंद अम्ल (ऐसीटिक अम्ल, CH₃COOH) से कहीं ज़्यादा H⁺ छोड़ता है। ज़्यादा H⁺ → कम pH → “तेज़।” क्षारकों के लिए भी यही बात OH⁻ के साथ।
| गुण | अम्ल | क्षारक |
|---|---|---|
| स्वाद (चखकर कभी जाँच न करें!) | खट्टा | कड़वा |
| लिटमस | नीला → लाल | लाल → नीला |
| पानी में आयन | H⁺ (H₃O⁺) | OH⁻ |
| pH | 7 से कम | 7 से ज़्यादा |
| धातुओं के साथ | H₂ गैस देते हैं | कुछ H₂ गैस देते हैं |
रोज़मर्रा में pH क्यों मायने रखता है
- आपका शरीर एक सँकरी pH पट्टी (~7.0–7.8) में काम करता है। अम्ल वर्षा (pH 5.6 से कम वाली बारिश) नदी का pH गिराकर जलीय जीवन को नुक़सान पहुँचाती है।
- पाचन: आपका पेट खाना पचाने के लिए HCl बनाता है। बहुत ज़्यादा → एसिडिटी; एक एंटासिड (मंद क्षारक जैसे मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया, Mg(OH)₂) इस अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर देता है।
- दाँतों का सड़ना: मुँह के बैक्टीरिया बचे हुए शक्कर को अम्ल में बदल देते हैं; pH 5.5 से नीचे जाते ही इनैमल घिसने लगता है। (क्षारीय) टूथपेस्ट से ब्रश करने पर वह उदासीन हो जाता है।
- डंक: मधुमक्खी का डंक एक अम्ल छोड़ता है (खाने के सोडे से राहत); बिच्छू-बूटी के रोम मेथेनॉइक अम्ल छोड़ते हैं।
- मिट्टी: पौधों को एक ख़ास pH दायरा चाहिए; किसान अम्लीय मिट्टी ठीक करने के लिए बिना बुझा चूना (CaO), बुझा चूना (Ca(OH)₂) या खड़िया (CaCO₃) जैसे क्षारक डालते हैं।
घोल A का pH 6 है और घोल B का pH 8। कौन-सा सही है?
pH 6, 7 से कम है → अम्लीय (हल्का, क्योंकि 7 के पास है); pH 8, 7 से ज़्यादा है → हल्का क्षारीय। कम pH यानी ज़्यादा H⁺, तो A में हाइड्रोजन-आयन सांद्रता ज़्यादा है।
लवण के बारे में और
लवण (salt) वह है जो किसी अम्ल के H⁺ की जगह कोई धातु (या अमोनियम) आयन ले लेने पर बचता है — उदासीनीकरण का उत्पाद। लवण एक साझे आयन वाले परिवारों में आते हैं: NaCl, Na₂SO₄, NaNO₃ सोडियम परिवार के; NaCl, KCl, CaCl₂ क्लोराइड परिवार के।
लवण का pH इस पर निर्भर करता है कि वह किस अम्ल और क्षारक से बना:
| किससे बना | लवण की प्रकृति | pH | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| तेज़ अम्ल + तेज़ क्षारक | उदासीन | 7 | NaCl |
| तेज़ अम्ल + मंद क्षारक | अम्लीय | 7 से कम | NH₄Cl |
| मंद अम्ल + तेज़ क्षारक | क्षारीय | 7 से ज़्यादा | Na₂CO₃ |
साधारण नमक — कई रसायनों का जनक
सोडियम क्लोराइड (NaCl), जो समुद्री पानी और सेंधा-नमक के भंडारों से मिलता है, कई उपयोगी रसायनों का कच्चा माल है।
क्लोर-क्षार प्रक्रिया (chlor-alkali) — ब्राइन (NaCl के घोल) में से बिजली गुज़ारना:
2NaCl(aq) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + Cl₂(g) + H₂(g)
तीनों उत्पाद उपयोगी हैं: Cl₂ (पानी का उपचार, PVC, विरंजक चूर्ण), H₂ (ईंधन, अमोनिया), NaOH (साबुन, काग़ज़)।
विरंजक चूर्ण (bleaching powder), Ca(OCl)₂ — सूखे बुझे चूने पर क्लोरीन की क्रिया; कपड़े/काग़ज़ विरंजित करने, ऑक्सीकारक के रूप में, और पीने के पानी को रोगाणुमुक्त करने में:
Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
खाने का सोडा, NaHCO₃ (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) — एक मंद, संक्षारण-रहित क्षारकीय लवण। गरम करने पर यह वही CO₂ देता है जो केक को फुलाती है:
2NaHCO₃ →[ऊष्मा] Na₂CO₃ + H₂O + CO₂
यह बेकिंग पाउडर (एक मंद खाद्य अम्ल के साथ), एंटासिड, और सोडा-अम्ल अग्निशामक में इस्तेमाल होता है।
धोने का सोडा, Na₂CO₃·10H₂O — सोडियम कार्बोनेट (खाने के सोडे को गरम करके बना) को पानी के साथ फिर से क्रिस्टलित करके। काँच/साबुन/काग़ज़ उद्योगों में और पानी की स्थायी कठोरता हटाने में इस्तेमाल।
क्या “सूखे” लवण क्रिस्टल सचमुच सूखे हैं? — क्रिस्टलन जल
नीले कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल गरम कीजिए, वे सफ़ेद हो जाते हैं और नली पर पानी की बूँदें आ जाती हैं — फिर पानी डालिए तो नीला रंग लौट आता है। उन क्रिस्टलों में क्रिस्टलन जल (water of crystallisation) था: हर सूत्र-इकाई में पानी के अणुओं की एक तय संख्या। कॉपर सल्फेट है CuSO₄·5H₂O (5 पानी); इसीलिए धोने का सोडा Na₂CO₃·10H₂O लिखा जाता है।
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस (PoP), CaSO₄·½H₂O — जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 373 K पर हल्का गरम करके बनता है। पानी के साथ मिलाने पर यह फिर से सख़्त जिप्सम बन जाता है — इसीलिए डॉक्टर इससे टूटी हड्डियाँ बैठाते हैं, और इसे सूखा रखना पड़ता है:
CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O (PoP + पानी → जिप्सम, सख़्त हो जाता है)
(“½” अजीब लगता है — इसका बस मतलब है कि CaSO₄ की दो सूत्र-इकाइयाँ एक पानी का अणु साझा करती हैं।)
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को नमी-रोधी डिब्बे में क्यों रखना चाहिए?
PoP (CaSO₄·½H₂O) पानी से अभिक्रिया करके ठोस जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) बना लेता है। हवा की नमी भी इसे धीरे-धीरे सख़्त, बेकार ढेले में बदल देगी — इसलिए इसे बंद और सूखा रखा जाता है।
आम गलतियाँ
pH संख्या जितनी बड़ी, उतना ज़्यादा अम्लीय / उतना तेज़ अम्ल।
बड़ी संख्या 'ज़्यादा' जैसी लगती है, तो लोग pH 10 को pH 4 से 'ज़्यादा अम्लीय' पढ़ लेते हैं।
उल्टा है। pH 7 से कम अम्लीय है और pH जितना कम = H⁺ उतने ज़्यादा = अम्ल उतना तेज़। pH 7 से ज़्यादा क्षारीय है। pH 4 अम्लीय है; pH 10 क्षारीय।
हाइड्रोजन वाला हर यौगिक अम्ल होता है।
अम्लों में हाइड्रोजन होता है, और ग्लूकोज़ (C₆H₁₂O₆) व ऐल्कोहॉल में भी — तो लगता है ये भी अम्ल होने चाहिए।
अम्ल को वह हाइड्रोजन पानी में H⁺ आयन के रूप में छोड़ना ज़रूरी है। ग्लूकोज़ और ऐल्कोहॉल में हाइड्रोजन है पर वे H⁺ नहीं छोड़ते — उनके घोल बिजली नहीं चलाते और अम्लीय नहीं हैं।
तनु करते समय सांद्र अम्ल में पानी डाला जा सकता है।
तनु करना यानी बस 'पानी के साथ मिलाना', तो क्रम से क्या फ़र्क़?
हमेशा अम्ल को पानी में, धीरे-धीरे, हिलाते हुए डालिए। यह तेज़ी से ऊष्माक्षेपी है; पानी को अम्ल में डालने से वह ख़तरनाक ढंग से उछल सकता है और बर्तन चटक सकता है।
तेज़ अम्ल और मंद अम्ल का मतलब सांद्र और तनु है।
'तेज़' सुनकर 'बहुत सारा' लगता है।
तेज़/मंद इस बात का है कि अम्ल H⁺ कितनी पूरी तरह छोड़ता है, न कि कितना अम्ल है। एक ही सांद्रता पर HCl (तेज़) ऐसीटिक अम्ल (मंद) से कहीं ज़्यादा H⁺ देता है। सांद्र/तनु अलग बात है (पानी में अम्ल की मात्रा)।
सारे क्षारक, क्षार (alkali) होते हैं।
दोनों शब्द एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल हो जाते हैं।
क्षार वह क्षारक है जो पानी में घुलता है (जैसे NaOH, KOH)। कई क्षारक घुलते ही नहीं, तो वे क्षारक तो हैं पर क्षार नहीं।
झटपट जाँच
एक अम्ल किसी धातु से अभिक्रिया करता है। कौन-सी गैस निकलती है, और उसे कैसे जाँचेंगे?
अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन। गैस के पास जलती तीली ले जाने पर यह ख़ास पॉप आवाज़ के साथ जलती है। (कार्बन डाइऑक्साइड कार्बोनेट से मिलती है और चूने के पानी को दूधिया करती है।)
एक घोल लाल लिटमस को नीला कर देता है। इसका pH सबसे संभावित है:
लाल लिटमस को नीला करना यानी घोल क्षारीय है, तो इसका pH 7 से ऊपर होगा। दिए विकल्पों में सिर्फ़ 10 क्षारीय है।
मैग्नीशियम रिबन के बराबर टुकड़े HCl (नली A) और ऐसीटिक अम्ल (नली B) में डाले गए, सांद्रता समान। कहाँ ज़्यादा ज़ोर से झाग उठेंगे?
HCl एक तेज़ अम्ल है और एक ही सांद्रता पर मंद ऐसीटिक अम्ल से ज़्यादा H⁺ छोड़ता है। ज़्यादा H⁺ → तेज़ अभिक्रिया → नली A में ज़्यादा ज़ोरदार झाग।
अभ्यास के सवाल
“हल देखें” दबाने से पहले हर सवाल ख़ुद कोशिश कीजिए। ये सवाल Curriv के अपने हैं और पूरी तरह मुफ़्त हैं।
आसान
तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मैग्नीशियम रिबन से अभिक्रिया का बैलेंस समीकरण लिखिए।
अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन:
Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂ ✓ (Mg: 1=1, H: 2=2, Cl: 2=2)
बुलबुले हाइड्रोजन गैस के हैं।
अपच (indigestion) के लिए कौन-सी दवा इस्तेमाल होती है: एंटीबायोटिक, दर्दनिवारक, एंटासिड या प्रतिरोधी? क्यों?
एंटासिड। अपच पेट में अतिरिक्त अम्ल (HCl) से होता है। एंटासिड एक मंद क्षारक (जैसे मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया) है जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर देता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है।
मध्यम
पाँच घोल A, B, C, D, E के pH हैं 4, 1, 11, 7, 9। कौन उदासीन, तेज़ अम्लीय, तेज़ क्षारीय, हल्का अम्लीय, हल्का क्षारीय है? H⁺ सांद्रता के बढ़ते क्रम में लगाइए।
- उदासीन: D (pH 7)
- तेज़ अम्लीय: B (pH 1)
- तेज़ क्षारीय: C (pH 11)
- हल्का अम्लीय: A (pH 4)
- हल्का क्षारीय: E (pH 9)
H⁺ सांद्रता कम pH पर सबसे ज़्यादा होती है। बढ़ता H⁺ यानी घटता pH, तो बढ़ती H⁺ सांद्रता का क्रम = घटते pH का क्रम:
C (11) < E (9) < D (7) < A (4) < B (1)
ताज़े दूध का pH 6 है। (a) दही बनते समय pH कैसे बदलेगा? (b) एक दूधवाला ताज़े दूध में थोड़ा खाने का सोडा मिला देता है — क्यों, और तब दूध जमने में ज़्यादा समय क्यों लेता है?
(a) दही बनने में लैक्टिक अम्ल बनता है, जो H⁺ आयन जोड़ता है, इसलिए pH 6 से नीचे गिर जाता है (ज़्यादा अम्लीय)।
(b) खाने का सोडा एक मंद क्षारक है; यह दूध को pH 6 से थोड़ा क्षारीय (7 से ऊपर) कर देता है। चूँकि जमने के लिए दूध को अम्लीय होना पड़ता है, क्षारीय pH से शुरू होने पर इतना अम्ल बनने में ज़्यादा समय लगता है — तो दही धीरे जमता है। (इससे दूध ज़्यादा देर ताज़ा भी रहता है।)
चुनौती
आसुत जल बिजली का चालन क्यों नहीं करता, जबकि वर्षा जल करता है?
चालन के लिए आयन चाहिए। आसुत जल शुद्ध होता है — इसमें लगभग कोई आयन नहीं, तो यह चालन नहीं करता।
वर्षा जल हवा से गैसें घोल लेता है, ख़ासकर CO₂ (और SO₂, NO₂ जैसे प्रदूषक), जिससे थोड़ी मात्रा में अम्ल (जैसे कार्बोनिक अम्ल) बनते हैं। ये अम्ल पानी में H⁺ और अन्य आयन छोड़ते हैं, इसलिए वर्षा जल बिजली का चालन करता है।
उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए, और समझाइए कि खाने के सोडे को गरम करने से वह खाना पकाने में उपयोगी क्यों हो जाता है।
उदासीनीकरण अभिक्रिया एक अम्ल और क्षारक के बीच होती है जो लवण और पानी देती है (H⁺ और OH⁻ जुड़कर पानी बनाते हैं):
- NaOH + HCl → NaCl + H₂O
- Ca(OH)₂ + 2HCl → CaCl₂ + 2H₂O
खाना पकाने में खाने का सोडा: गरम करने पर खाने का सोडा विघटित होकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है:
2NaHCO₃ →[ऊष्मा] Na₂CO₃ + H₂O + CO₂
फँसी हुई CO₂ के बुलबुले घोल (ब्रेड, केक, पकौड़े) को फुला देते हैं और नरम-स्पंजी बना देते हैं।
सारांश
इस अध्याय के बाद आपको ये सब अपने शब्दों में समझा पाना चाहिए:
- सूचक (लिटमस, फिनॉल़्थेलीन, मेथिल ऑरेंज, हल्दी, गंधीय) रंग या गंध बदलकर अम्ल और क्षारक में फ़र्क़ बताते हैं।
- अम्लीयता H⁺(aq) आयनों से आती है; क्षारकीयता OH⁻(aq) से — और ये सिर्फ़ पानी में बनते हैं (सूखी HCl गैस अम्लीय नहीं)।
- अभिक्रिया के पैटर्न: अम्ल + धातु → लवण + H₂; कार्बोनेट/हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल → लवण + CO₂ + पानी; धातु ऑक्साइड + अम्ल और अधातु ऑक्साइड + क्षारक → लवण + पानी; अम्ल + क्षारक → लवण + पानी (उदासीनीकरण)।
- धातु ऑक्साइड क्षारकीय, अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। अम्लीय/क्षारीय घोल बिजली का चालन करते हैं (वे आयन ढोते हैं)।
- pH स्केल (0–14) H⁺ नापता है: 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय, 7 से ज़्यादा क्षारीय; कम pH = ज़्यादा H⁺ = तेज़ अम्ल। तेज़/मंद ≠ सांद्र/तनु।
- रोज़मर्रा में pH: पाचन व एंटासिड, दाँतों का सड़ना (5.5 से नीचे), अम्ल वर्षा, मिट्टी का उपचार, डंक।
- लवण उदासीनीकरण से बनते हैं; उनका pH जनक अम्ल/क्षारक पर निर्भर। साधारण नमक से मिलते हैं NaOH, Cl₂, H₂ (क्लोर-क्षार), विरंजक चूर्ण, खाने का सोडा और धोने का सोडा।
- क्रिस्टलन जल (जैसे CuSO₄·5H₂O); प्लास्टर ऑफ़ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) जिप्सम बन जाता है और सूखा रखना पड़ता है।
- सांद्र अम्ल/क्षारक को पानी में मिलाना तेज़ी से ऊष्माक्षेपी है — अम्ल को पानी में डालिए, उल्टा कभी नहीं।
आगे क्या?
अब आपने देखा कि धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं जबकि अधातुएँ अम्लीय — एक इशारा कि धातु और अधातु मूल रूप से अलग स्वभाव के हैं। अध्याय 3: धातु एवं अधातु में आप इन दोनों परिवारों से आमने-सामने मिलेंगे: धातुएँ क्यों चमकती, चालन करती और मुड़ती हैं जबकि अधातुएँ नहीं, धातुओं की क्रियाशीलता का क्रम कैसा है, हम धातुओं को उनके अयस्कों से कैसे निकालते हैं, और लोहे में जंग क्यों लगती है पर सोने में नहीं।