रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
ये क्यों ज़रूरी है
गर्मी की दोपहर में दूध का गिलास बाहर रख दीजिए — शाम तक वो खट्टा हो जाता है। लोहे के तवे को किसी नम कोने में पड़ा रहने दीजिए — हफ़्ते भर में उस पर लाल-भूरी परत चढ़ जाती है। रोटी का एक टुकड़ा खाइए — कुछ ही घंटों में आपका शरीर उसे उस ऊर्जा में बदल देता है जिससे आप अभी ये पढ़ पा रहे हैं।
ये तीनों असल में एक ही तरह की घटना हैं, बस अलग-अलग रूप में: एक चीज़ चुपचाप एक नई चीज़ में बदल गई। दूध का रसायन बदल गया। लोहे की सतह कुछ ऐसी बन गई जो अब लोहा रही ही नहीं। रोटी ग्लूकोज़ बनी, फिर कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और ऊर्जा।
इसी “नई चीज़ में बदल जाने” को रसायनशास्त्री रासायनिक अभिक्रिया (chemical reaction) कहते हैं। और एक बार आपको अभिक्रियाओं को पहचानना, उनके नाम रखना और उन्हें सही-सही लिखना आ गया, तो समझिए पूरी केमिस्ट्री की भाषा आपके हाथ में आ गई। इस अध्याय में आप यही भाषा सीखेंगे — कैसे देखें कि अभिक्रिया हुई है, कैसे उसे एक संतुलित (balanced) समीकरण में लिखें, और कैसे हर अभिक्रिया को कुछ आसान परिवारों में बाँटें। बस यह एक अध्याय पक्का कर लीजिए, फिर बाकी केमिस्ट्री जादू-टोना नहीं, बल्कि ऐसे वाक्य लगने लगेगी जिन्हें आप पढ़ सकते हैं।
असली बात
पूरा अध्याय बस इसी एक बात पर टिका है:
रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु (atoms) न बनते हैं, न नष्ट होते हैं — वे बस अपनी जगह बदलकर नए तरीक़े से जुड़ जाते हैं।
परमाणुओं को LEGO की पक्की-गिनती वाली ईंटों की तरह सोचिए। अभिक्रिया कुछ पुराने ढाँचे तोड़ती है (बंध टूटते हैं) और नए ढाँचे बनाती है (नए बंध बनते हैं), पर आख़िर में आपके पास बिलकुल वही ईंटें बचती हैं — न एक ज़्यादा, न एक कम। यही द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass) है जो आपने कक्षा 9 में पढ़ा था: रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न मिटता है।
इसी एक बात से दो नतीजे निकलते हैं, और आगे का सारा खेल इन्हीं दो पर चलता है:
- चूँकि नई चीज़ें बनती हैं, अभिक्रिया अपने होने का सबूत खुद देती है — रंग बदलता है, गैस निकलती है, तापमान बदलता है, नई गंध आती है, या कोई ठोस अचानक बन जाता है।
- चूँकि परमाणु बचे रहते हैं, हर सही समीकरण संतुलित (balanced) होना चाहिए — दोनों तरफ़ हर तत्व के परमाणुओं की गिनती बराबर।
इन दो बातों को जेब में रखिए। बाकी सब बस ब्योरा है।
आओ इसे आसान करके समझें
पता कैसे चले कि अभिक्रिया हुई भी है?
परमाणुओं को इधर-उधर होते आप देख तो सकते नहीं। तो फिर कैसे पता चले कि अभिक्रिया हुई, न कि बस पानी भाप बनकर उड़ गया? आप कुछ ख़ास संकेतों पर नज़र रखते हैं।
मैग्नीशियम की पट्टी को हवा में जलाइए — वो चमकीली सफ़ेद लौ के साथ भड़कती है और पीछे एक सफ़ेद पाउडर (मैग्नीशियम ऑक्साइड) छोड़ जाती है। ज़िंक के दानों पर तनु हाइड्रोक्लोरिक या सल्फ्यूरिक अम्ल डालिए — गैस के बुलबुले उठते हैं और परखनली गरम लगती है। लेड नाइट्रेट के घोल में पोटैशियम आयोडाइड का घोल मिलाइए — दो साफ़ तरल पदार्थों से अचानक एक चमकीला पीला ठोस बन जाता है।
तो अभिक्रिया शायद हुई है, अगर आपको इनमें से कोई संकेत दिखे:
- अवस्था (state) में बदलाव (नई चीज़ का ठोस ↔ तरल ↔ गैस होना)
- रंग में बदलाव
- गैस का निकलना (बुलबुले, फ़िज़)
- तापमान में बदलाव (बर्तन गरम या ठंडा हो जाना)
- अवक्षेप (precipitate) का बनना (अघुलनशील ठोस) या कोई नई गंध
आप बेकिंग सोडा में सिरका डालते हैं और ज़ोरदार फ़िज़ होती है और कटोरा थोड़ा ठंडा लगता है। क्या अभिक्रिया हुई? किन संकेतों से पता चलता है?
हाँ। दो संकेत अभिक्रिया की ओर इशारा करते हैं: गैस का निकलना (फ़िज़ असल में कार्बन डाइऑक्साइड है) और तापमान में बदलाव (ठंडा लगना — यानी इसमें ऊष्मा सोखी गई)। साफ़ है कि नई चीज़ें बनीं।
अभिक्रिया को लिखना: वाक्य से समीकरण तक
अभिक्रिया को शब्दों में बताना भारी-भरकम पड़ता है। “जब मैग्नीशियम की पट्टी ऑक्सीजन में जलती है तो वह मैग्नीशियम ऑक्साइड में बदल जाती है” — पूरा एक वाक्य। रसायनशास्त्री इसे दो कदमों में छोटा कर देते हैं।
कदम 1 — शब्द-समीकरण (word-equation)। नाम लिखिए — बाईं ओर अभिकारक, दाईं ओर उत्पाद, बीच में दिशा बताता तीर:
मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड
जो चीज़ें ख़र्च होती हैं (मैग्नीशियम, ऑक्सीजन) वे अभिकारक (reactants) हैं; जो नई चीज़ बनती है (मैग्नीशियम ऑक्साइड) वह उत्पाद (product) है। बाईं ओर ”+” का मतलब है “के साथ अभिक्रिया करता है” और दाईं ओर “और”। तीर ”→” का मतलब है “बनाता है”।
कदम 2 — रासायनिक समीकरण। नामों की जगह रासायनिक सूत्र लिखिए:
Mg + O₂ → MgO
यह छोटा भी है और कहीं ज़्यादा काम का भी — पर अभी इसमें एक छिपी हुई गड़बड़ है। ऑक्सीजन के परमाणु गिनिए: बाईं ओर दो (O₂), पर दाईं ओर सिर्फ़ एक (MgO)। परमाणु ग़ायब हो गए, जो द्रव्यमान संरक्षण के नियम के ख़िलाफ़ है। ऐसे समीकरण को — जिसमें सूत्र सही हों पर परमाणु बराबर न हों — कंकाली समीकरण (skeletal equation) कहते हैं। इसे बैलेंस करना ज़रूरी है।
समीकरण को बैलेंस करना, कदम-दर-कदम
बैलेंस करने का मतलब है सूत्रों के आगे गुणांक (coefficients) लगाना ताकि दोनों तरफ़ हर तत्व के परमाणु बराबर हो जाएँ। सुनहरा नियम:
आप सूत्र के आगे लगने वाली बड़ी संख्या (गुणांक) बदल सकते हैं। आप सूत्र के अंदर लगी छोटी संख्या (subscript) कभी नहीं बदल सकते — वरना वह चीज़ ही बदलकर कोई दूसरी चीज़ बन जाएगी।
सबसे आम तरीक़ा है हिट-एंड-ट्रायल — एक बार में एक तत्व को बैलेंस कीजिए, छोटी से छोटी पूर्ण संख्या इस्तेमाल कीजिए, फिर जाँच लीजिए। आइए वह क्लासिक उदाहरण करके देखें।
इस समीकरण को बैलेंस कीजिए: Fe + H₂O → Fe₃O₄ + H₂
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दोनों तरफ़ परमाणु गिनिए। बाईं ओर: Fe = 1, H = 2, O = 1. दाईं ओर: Fe = 3, H = 2, O = 4. लोहा और ऑक्सीजन बराबर नहीं हैं।
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सबसे जटिल सूत्र से शुरू कीजिए। वह है Fe₃O₄ (इसमें सबसे ज़्यादा परमाणु हैं)। इसमें का सबसे बेढब तत्व चुनिए — ऑक्सीजन: दाईं ओर 4, बाईं ओर सिर्फ़ 1.
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ऑक्सीजन बैलेंस कीजिए। H₂O के आगे 4 लगाइए ताकि बाईं ओर भी 4 ऑक्सीजन हों: Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + H₂.
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हाइड्रोजन बैलेंस कीजिए। अब बाईं ओर 4 × 2 = 8 हाइड्रोजन हैं। दाईं ओर H₂ के आगे 4 लगाइए (4 × 2 = 8): Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂.
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लोहा बैलेंस कीजिए। दाईं ओर 3 लोहे के परमाणु हैं (Fe₃O₄ में), बाईं ओर 1. Fe के आगे 3 लगाइए: 3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂.
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हर तत्व जाँचिए। Fe: 3 = 3 ✓ H: 8 = 8 ✓ O: 4 = 4 ✓. बैलेंस हो गया! आख़िरी समीकरण: 3Fe + 4H₂O → Fe₃O₄ + 4H₂.
बैलेंस हो जाने के बाद हम समीकरण को और जानकारी-भरा बना देते हैं — कोष्ठक में अवस्था (physical state) लिखकर: (s) ठोस, (l) तरल, (g) गैस, और (aq) माने जलीय (पानी में घुला हुआ)। ऊष्मा, प्रकाश, उत्प्रेरक या दाब जैसी शर्तें तीर के ऊपर या नीचे लिखी जाती हैं।
3Fe(s) + 4H₂O(g) → Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)
यहाँ पानी पर (g) बताता है कि उसे भाप के रूप में इस्तेमाल किया गया है। अब समीकरण पूरी कहानी कहता है: क्या अभिक्रिया करता है, क्या बनता है, किस अवस्था में, और कितनी मात्रा में।
Mg + O₂ → MgO को Mg + O₂ → MgO₂ लिखकर बैलेंस करना ग़लत क्यों है?
क्योंकि MgO₂ वह चीज़ ही नहीं है जो MgO है — subscript बदलने से एक नई (और यहाँ तो ऐसी जो होती ही नहीं) चीज़ बन जाती है। बैलेंस सिर्फ़ गुणांक लगाकर करना है। सही उत्तर है 2Mg + O₂ → 2MgO।
बैलेंस किए समीकरण 2H₂ + O₂ → 2H₂O में, H₂ के आगे का '2' और H₂O के अंदर का छोटा '2' क्रमशः क्या दर्शाते हैं?
आगे लगी बड़ी संख्या (2H₂) गुणांक है — यह पूरे अणु गिनती है और बैलेंस करते समय हम इसी को बदलते हैं। अंदर की छोटी संख्या (H₂O) subscript है — यह उस चीज़ की पहचान का हिस्सा है और बैलेंस करने के लिए इसे कभी नहीं बदलते।
अभिक्रियाओं के पाँच परिवार
अभिक्रिया में परमाणु दूसरे परमाणुओं में नहीं बदलते; वे बस फिर से जुड़ते हैं। जिस तरह से वे जुड़ते हैं, उसी से लगभग हर अभिक्रिया को पाँच परिवारों में बाँटा जा सकता है।
1. संयोजन अभिक्रिया (Combination) — दो मिलकर एक
जब दो या ज़्यादा चीज़ें मिलकर एक ही उत्पाद बनाती हैं, तो वह संयोजन अभिक्रिया है। जब बिना बुझा चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) पानी से मिलता है, तो वह बुझा चूना बनाता है, फुफकारते हुए और ढेर सारी ऊष्मा छोड़ते हुए:
CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा
और उदाहरण: कोयले का जलना (C + O₂ → CO₂) और पानी का बनना (2H₂ + O₂ → 2H₂O)। पैटर्न देखिए — कई अभिकारक, एक उत्पाद।
चूना बुझने जैसी अभिक्रियाएँ ऊष्मा छोड़ती हैं। जो अभिक्रियाएँ ऊष्मा छोड़ती हैं उन्हें ऊष्माक्षेपी (exothermic) अभिक्रिया कहते हैं। प्राकृतिक गैस का जलना, हमारी कोशिकाओं में श्वसन, और सब्ज़ियों का सड़कर खाद बनना — सब ऊष्माक्षेपी हैं:
CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(g) (प्राकृतिक गैस का जलना — ऊष्माक्षेपी)
C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(aq) → 6CO₂(aq) + 6H₂O(l) + ऊर्जा (श्वसन)
2. वियोजन अभिक्रिया (Decomposition) — एक टूटकर कई
वियोजन अभिक्रिया बिलकुल उल्टी है: एक अकेली चीज़ टूटकर दो या ज़्यादा सरल चीज़ें बनाती है। इसे हमेशा ऊर्जा का एक “धक्का” चाहिए, और उस धक्के का रूप इसका ख़ास नाम तय करता है:
- ऊष्मीय वियोजन — ऊष्मा से टूटना। चूना-पत्थर को गरम करने पर बिना बुझा चूना
मिलता है; फेरस सल्फेट या लेड नाइट्रेट को गरम करने पर रंगीन धुआँ निकलता है:
CaCO₃(s) →[ऊष्मा] CaO(s) + CO₂(g) 2Pb(NO₃)₂(s) →[ऊष्मा] 2PbO(s) + 4NO₂(g) + O₂(g) (NO₂ का भूरा धुआँ)
- विद्युत-अपघटनी वियोजन — बिजली से टूटना। अम्लीय पानी में करंट गुज़ारने पर
वह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बँट जाता है:
2H₂O(l) →[बिजली] 2H₂(g) + O₂(g)
- प्रकाशीय वियोजन — प्रकाश से टूटना। सफ़ेद सिल्वर क्लोराइड धूप में स्लेटी
(grey) हो जाता है (ब्लैक-एंड-व्हाइट फ़ोटोग्राफ़ी में इस्तेमाल होता था):
2AgCl(s) →[धूप] 2Ag(s) + Cl₂(g)
चूँकि वियोजन अभिक्रियाएँ ऊर्जा सोखती हैं, ये ऊष्माशोषी (endothermic) होती हैं। यह एक सुंदर आईने जैसा जोड़ा है: संयोजन अक्सर ऊष्मा छोड़ती है (ऊष्माक्षेपी), वियोजन ऊर्जा लेती है (ऊष्माशोषी)।
| बात | संयोजन | वियोजन |
|---|---|---|
| क्या होता है | दो या ज़्यादा → एक उत्पाद | एक अभिकारक → दो या ज़्यादा उत्पाद |
| ऊर्जा | आमतौर पर ऊर्जा छोड़ती है (ऊष्माक्षेपी) | ऊर्जा चाहिए: ऊष्मा, प्रकाश या बिजली (ऊष्माशोषी) |
| उदाहरण | CaO + H₂O → Ca(OH)₂ | CaCO₃ → CaO + CO₂ |
कैल्शियम कार्बोनेट को गरम करने पर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं। यह ऊष्माक्षेपी है या ऊष्माशोषी, और किस परिवार की है?
यह वियोजन अभिक्रिया है (एक चीज़ → दो), और ऊष्माशोषी है क्योंकि यह तभी तक चलती है जब तक आप लगातार ऊष्मा देते रहें।
3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement) — ज़्यादा क्रियाशील धातु कमज़ोर को बाहर धकेल देती है
जब कोई ज़्यादा क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में से कम क्रियाशील तत्व को बाहर निकाल देता है, तो वह विस्थापन अभिक्रिया है। नीले कॉपर सल्फेट के घोल में लोहे की कील डुबोइए: नीला रंग फीका होकर हल्का हरा हो जाता है और कील भूरी पड़ जाती है, क्योंकि लोहा (ज़्यादा क्रियाशील) कॉपर (कम क्रियाशील) को विस्थापित कर देता है:
Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
ज़िंक और लेड भी कॉपर के साथ यही कर सकते हैं, क्योंकि दोनों कॉपर से ज़्यादा क्रियाशील हैं:
Zn(s) + CuSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Cu(s)
4. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement) — साथी आपस में बदल जाते हैं
जब घोल में दो यौगिक अपने आयन (ions) आपस में बदल लेते हैं, तो वह द्वि-विस्थापन अभिक्रिया है। सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के घोल मिलाइए — एक सफ़ेद अघुलनशील ठोस नीचे बैठ जाता है:
Na₂SO₄(aq) + BaCl₂(aq) → BaSO₄(s) + 2NaCl(aq)
बेरियम और सोडियम ने अपने साथी बदल लिए। जो अघुलनशील ठोस (BaSO₄) बनता है उसे अवक्षेप (precipitate) कहते हैं, इसलिए जो भी अभिक्रिया अवक्षेप बनाती है उसे अवक्षेपण अभिक्रिया (precipitation reaction) भी कहते हैं।
| बात | विस्थापन | द्वि-विस्थापन |
|---|---|---|
| क्या बदलता है | एक तत्व दूसरे की जगह ले लेता है | दो यौगिक आयन बदलते हैं (साथी बदल जाते हैं) |
| अभिकारक | एक तत्व + एक यौगिक | दो यौगिक (आमतौर पर घोल में) |
| उदाहरण | Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu | Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2NaCl |
5. उपचयन और अपचयन (Oxidation & Reduction) — पाने और खोने का खेल
कॉपर के पाउडर को हवा में गरम कीजिए — उसकी सतह काली पड़ जाती है, क्योंकि कॉपर ने ऑक्सीजन पा ली और कॉपर ऑक्साइड बन गया:
2Cu + O₂ →[ऊष्मा] 2CuO
अब इस गरम काले कॉपर ऑक्साइड के ऊपर हाइड्रोजन गैस गुज़ारिए — वह फिर भूरा हो जाता है, क्योंकि कॉपर ऑक्साइड ऑक्सीजन खो देता है:
CuO + H₂ →[ऊष्मा] Cu + H₂O
ये रहीं परिभाषाएँ, और ये उससे ज़्यादा बड़ी हैं जितना पहली बार में लगता है:
- उपचयन (Oxidation) = ऑक्सीजन पाना या हाइड्रोजन खोना।
- अपचयन (Reduction) = ऑक्सीजन खोना या हाइड्रोजन पाना।
ऊपर वाली दूसरी अभिक्रिया में CuO का अपचयन होता है (ऑक्सीजन खोता है) जबकि H₂ का उपचयन होता है (ऑक्सीजन पाता है)। एक के बिना दूसरा हो ही नहीं सकता — इसीलिए इन्हें उपचयन-अपचयन या रेडॉक्स (redox) अभिक्रिया कहते हैं।
| प्रक्रिया | ऑक्सीजन | हाइड्रोजन |
|---|---|---|
| उपचयन | ऑक्सीजन पाता है | हाइड्रोजन खोता है |
| अपचयन | ऑक्सीजन खोता है | हाइड्रोजन पाता है |
अभिक्रिया ZnO + C → Zn + CO में किस चीज़ का अपचयन होता है?
ZnO ऑक्सीजन खोकर Zn बनता है, इसलिए ZnO का अपचयन होता है। कार्बन ऑक्सीजन पाकर CO बनता है, इसलिए कार्बन का उपचयन होता है। हर रेडॉक्स अभिक्रिया में दोनों में से एक-एक होता है।
रोज़मर्रा में उपचयन: संक्षारण और विकृतगंधिता
रेडॉक्स अभिक्रियाएँ सिर्फ़ लैब की बात नहीं हैं — इनकी दो धीमी अभिक्रियाएँ दुनिया का ख़ासा पैसा डुबो देती हैं।
संक्षारण (Corrosion) माने धातु का धीरे-धीरे घिसना-गलना, जब उस पर आसपास की नमी, हवा और रसायन हमला करते हैं। लोहे का जंग लगना (लाल-भूरी परत), चाँदी पर काली परत, और ताँबे पर हरी परत — ये सब संक्षारण हैं। संक्षारण चुपचाप कार की बॉडी, पुलों, रेलिंग और जहाज़ों को कमज़ोर कर देता है — इसीलिए हम लोहे पर पेंट करते, ग्रीस लगाते, या गैल्वनाइज़ करते हैं ताकि ऑक्सीजन और पानी दूर रहें।
विकृतगंधिता (Rancidity) तब होती है जब खाने में मौजूद वसा और तेल उपचयित हो जाते हैं: उनमें से बुरी गंध और स्वाद आने लगता है। इसे रोकने के लिए कंपनियाँ प्रतिऑक्सीकारक (antioxidants) मिलाती हैं, खाने को हवाबंद (airtight) पैकेट में रखती हैं, फ्रिज में रखती हैं, और पैकेट में नाइट्रोजन भर देती हैं — एक अक्रिय गैस जो ऑक्सीजन को बाहर रखती है (चिप्स का पैकेट खोलने पर जो “फुस्स” होती है, वह नाइट्रोजन ही अपना काम कर रही होती है)।
आम गलतियाँ
समीकरण बैलेंस करने के लिए सूत्र के अंदर की छोटी subscript संख्याएँ बदली जा सकती हैं।
लगता है कि यह आसान शॉर्टकट है — बस H₂O को H₂O₂ कर दो और ऑक्सीजन फटाक से बैलेंस हो गई।
subscript बदलने से चीज़ ही बदल जाती है (H₂O पानी है; H₂O₂ हाइड्रोजन पेरॉक्साइड!)। बैलेंस सिर्फ़ सूत्र के आगे बड़े गुणांक बदलकर किया जाता है।
गुणांक सिर्फ़ सूत्र के पहले परमाणु को गुणा करता है।
4H₂O लिखते वक़्त लगता है कि बस हाइड्रोजन ही गुणा हुआ है।
गुणांक उस सूत्र के हर परमाणु को गुणा करता है। 4H₂O का मतलब है 4×2 = 8 हाइड्रोजन परमाणु और 4×1 = 4 ऑक्सीजन परमाणु।
विस्थापन और द्वि-विस्थापन तो लगभग एक ही चीज़ हैं।
दोनों में 'विस्थापन' शब्द है और दोनों में अदला-बदली होती है।
विस्थापन में एक अकेला तत्व दूसरे को बाहर धकेलता है (Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu)। द्वि-विस्थापन में दो यौगिक अपने आयन बदलते हैं (Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄ + 2NaCl)। अभिकारकों में तत्व बनाम यौगिक गिन लीजिए।
उपचयन का मतलब सिर्फ़ ऑक्सीजन पाना है, और अपचयन का मतलब सिर्फ़ ऑक्सीजन खोना।
शुरू में शब्द इसी तरह सिखाए जाते हैं, तो यही दिमाग़ में बैठ जाता है।
उपचयन है ऑक्सीजन पाना या हाइड्रोजन खोना; अपचयन है ऑक्सीजन खोना या हाइड्रोजन पाना। सिर्फ़ ऑक्सीजन पर नज़र रखेंगे तो आधी रेडॉक्स अभिक्रियाएँ छूट जाएँगी।
अगर अभिक्रिया शुरू होने के लिए ऊष्मा चाहिए, तो वह ऊष्माशोषी ही होगी।
आप ऊष्मा दे रहे हैं, तो ज़ाहिर है वह ऊर्जा सोख रही होगी?
कई ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं (जैसे जलना) को शुरू होने के लिए बस एक छोटी चिंगारी चाहिए, पर फिर वे दी गई ऊष्मा से कहीं ज़्यादा ऊष्मा छोड़ती हैं। 'ऊष्माशोषी' का मतलब है पूरे समय ऊर्जा सोखते रहना — जैसे CaCO₃ का वियोजन, जो ऊष्मा देना बंद करते ही रुक जाता है।
झटपट जाँच
दो साफ़ घोल मिलाए जाते हैं और तुरंत एक पीला ठोस तले में बैठ जाता है। यह किस तरह की अभिक्रिया है?
घोल में दो यौगिकों ने आयन बदलकर एक अघुलनशील ठोस (अवक्षेप) बनाया। यह द्वि-विस्थापन अभिक्रिया है — और चूँकि अवक्षेप बना, यह अवक्षेपण अभिक्रिया भी है। (लेड नाइट्रेट + पोटैशियम आयोडाइड → पीला PbI₂ में बिलकुल यही होता है।)
कौन-सा समीकरण सही ढंग से बैलेंस है?
2H₂ + O₂ → 2H₂O में हाइड्रोजन 4 = 4 और ऑक्सीजन 2 = 2 है। तीसरा विकल्प subscript बदलकर बेईमानी करता है, और चौथे में बाईं ओर 4 ऑक्सीजन पर दाईं ओर सिर्फ़ 2 हैं।
सिल्वर क्लोराइड को धूप में रखने पर वह स्लेटी हो जाता है। यह किस तरह का वियोजन है?
ऊर्जा प्रकाश से मिलती है, इसलिए यह प्रकाशीय वियोजन है: 2AgCl →[धूप] 2Ag + Cl₂. इसी प्रकाश-संवेदनशीलता की वजह से सिल्वर के लवण पुरानी फ़ोटोग्राफ़िक फ़िल्म में काम आते थे।
अभ्यास के सवाल
“हल देखें” दबाने से पहले हर सवाल ख़ुद हल करने की कोशिश कीजिए — असली सीख उसी जद्दोजहद में है। ये सवाल Curriv के अपने हैं और पूरी तरह मुफ़्त हैं।
आसान
बैलेंस कीजिए: Na + O₂ → Na₂O
पहले ऑक्सीजन बैलेंस कीजिए। बाईं ओर 2 ऑक्सीजन हैं, तो दाईं ओर 2 Na₂O चाहिए (जिससे 2 ऑक्सीजन हो जाएँ):
Na + O₂ → 2Na₂O
अब दाईं ओर 4 सोडियम परमाणु हैं, तो बाईं ओर Na के आगे 4 लगाइए:
4Na + O₂ → 2Na₂O ✓ (Na: 4 = 4, O: 2 = 2)
अभिक्रिया का प्रकार बताइए: CaO + H₂O → Ca(OH)₂
दो अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, इसलिए यह संयोजन अभिक्रिया है। (यह ऊष्मा भी छोड़ती है, यानी ऊष्माक्षेपी भी है।)
मध्यम
इसे बैलेंस समीकरण में बदलिए: 'ऐलुमिनियम कॉपर क्लोराइड से अभिक्रिया करके ऐलुमिनियम क्लोराइड और कॉपर बनाता है।'
शब्द-समीकरण: ऐलुमिनियम + कॉपर क्लोराइड → ऐलुमिनियम क्लोराइड + कॉपर
कंकाली: Al + CuCl₂ → AlCl₃ + Cu
क्लोरीन बैलेंस कीजिए: 2 (CuCl₂ में) और 3 (AlCl₃ में) का लघुत्तम समापवर्त्य 6 है। तो 3 CuCl₂ और 2 AlCl₃ लीजिए:
Al + 3CuCl₂ → 2AlCl₃ + Cu
अब Al (दाईं ओर 2) और Cu (दाईं ओर 3) बैलेंस कीजिए:
2Al + 3CuCl₂ → 2AlCl₃ + 3Cu ✓
यह एक विस्थापन अभिक्रिया है — ऐलुमिनियम कॉपर को विस्थापित करता है।
तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को लोहे के बुरादे में डालने पर कौन-सी गैस बनती है — हाइड्रोजन या क्लोरीन? बैलेंस समीकरण लिखिए।
हाइड्रोजन गैस बनती है (क्लोरीन नहीं)। ज़्यादा क्रियाशील धातु अम्ल में से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है:
Fe + 2HCl → FeCl₂ + H₂ ✓
जो बुलबुले दिखते हैं वे हाइड्रोजन के हैं, और बना लवण आयरन(II) क्लोराइड है।
चुनौती
अभिक्रिया Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe में बताइए किसका उपचयन होता है, किसका अपचयन, और यह किस प्रकार की अभिक्रिया है।
ऑक्सीजन पर नज़र डालिए:
- Fe₂O₃ ऑक्सीजन खोकर Fe बनता है → आयरन ऑक्साइड का अपचयन होता है।
- Al ऑक्सीजन पाकर Al₂O₃ बनता है → ऐलुमिनियम का उपचयन होता है।
तो यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है। यह एक विस्थापन अभिक्रिया भी है, क्योंकि ज़्यादा क्रियाशील ऐलुमिनियम लोहे को उसके ऑक्साइड से विस्थापित कर देता है। (यह मशहूर थर्मिट अभिक्रिया है, जिससे रेल की पटरियाँ जोड़ी जाती हैं — इतनी ऊष्मा निकलती है कि लोहा पिघल जाता है।)
सारांश
इस अध्याय के बाद आपको ये सब अपने शब्दों में समझा पाना चाहिए:
- रासायनिक अभिक्रिया परमाणुओं को फिर से जोड़कर नई चीज़ें बनाती है; परमाणु बचे रहते हैं, इसलिए द्रव्यमान संरक्षित रहता है (द्रव्यमान संरक्षण का नियम)।
- अभिक्रिया हुई है, यह अवस्था, रंग, तापमान में बदलाव, गैस के निकलने, या अवक्षेप बनने जैसे संकेतों से पता चलता है।
- अभिक्रिया को पहले शब्द-समीकरण, फिर रासायनिक समीकरण के रूप में लिखा जाता है, जिसे गुणांक बदलकर बैलेंस करना ज़रूरी है (subscript कभी नहीं)।
- अवस्थाएँ (s, l, g, aq) और शर्तें (ऊष्मा, प्रकाश, उत्प्रेरक) समीकरण को और जानकारी-भरा बनाती हैं।
- पाँच परिवार: संयोजन (कई → एक), वियोजन (एक → कई, ऊष्मा/प्रकाश/बिजली से), विस्थापन (ज़्यादा क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील को धकेलता है), द्वि-विस्थापन (यौगिक आयन बदलते हैं, अक्सर अवक्षेप बनता है), और उपचयन-अपचयन (रेडॉक्स)।
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ ऊष्मा छोड़ती हैं; ऊष्माशोषी ऊष्मा सोखती हैं।
- उपचयन = ऑक्सीजन पाना / हाइड्रोजन खोना; अपचयन = ऑक्सीजन खोना / हाइड्रोजन पाना — और ये हमेशा साथ-साथ होते हैं।
- रोज़मर्रा का धीमा रेडॉक्स संक्षारण (जैसे जंग) और विकृतगंधिता (वसा-तेल का ख़राब होना) के रूप में दिखता है, जिनसे हम पेंट, प्रतिऑक्सीकारक, हवाबंद पैकिंग और नाइट्रोजन भरकर लड़ते हैं।
आगे क्या?
अब आप जानते हैं कि चीज़ें अभिक्रिया करती हैं और उन्हें कैसे लिखना है। रोज़मर्रा की बहुत सारी केमिस्ट्री — नींबू की खटास से लेकर एसिडिटी की गोली की राहत तक — दो विपरीत तरह के पदार्थों की एक ख़ास रस्साकशी पर टिकी है। अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण में आप इन्हीं विपरीत पदार्थों से मिलेंगे, समझेंगे कि कुछ चीज़ें खट्टी और कुछ कड़वी-चिकनी क्यों होती हैं, और देखेंगे कि इसी अध्याय की अभिक्रियाएँ (ख़ासकर उदासीनीकरण, जो एक द्वि-विस्थापन है) आपकी रसोई और पेट में कैसे घटती हैं।