त्रिभुज
यह क्यों मायने रखता है
माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई या चाँद की दूरी आख़िर किसी ने नापी कैसे — बिना उस पर चढ़े या वहाँ टेप लेकर पहुँचे? नापी जा ही नहीं सकती। फिर भी दोनों आँकड़े हमें पता हैं। राज़ है अप्रत्यक्ष मापन — और यह एक ख़ूबसूरत विचार पर टिका है: जिन आकृतियों का आकार-स्वरूप एक जैसा हो, वे अनुमानित और समानुपाती ढंग से व्यवहार करती हैं, भले ही उनका साइज़ बहुत अलग हो।
ताजमहल की एक तस्वीर डाक-टिकट के साइज़ में और वही तस्वीर पोस्टकार्ड के साइज़ में — साफ़ है कि दोनों का स्वरूप एक ही है: हर लंबाई बस उसी गुणक से बढ़ी है, और हर कोण वैसा का वैसा है। “स्वरूप एक, साइज़ अलग” के इस रिश्ते को समरूपता कहते हैं, और त्रिभुजों में यह एक सटीक औज़ार बन जाता है।
जैसे ही आप कह पाते हैं कि “यह छोटा त्रिभुज उस बड़े त्रिभुज के समरूप है”, आप एक नापने-योग्य लंबाई (छोटा त्रिभुज) को एक न-नापी-जा-सकने वाली लंबाई (बड़ा त्रिभुज) में बदल सकते हैं — बस अनुपातों को बराबर रखकर। एक 6 मीटर के खंभे और उसकी 4 मीटर लंबी परछाईं से आप किसी मीनार की ऊँचाई उसकी परछाईं से निकाल सकते हैं। यही तर्क नक्शों के पैमाने, ब्लूप्रिंट और पाइथागोरस प्रमेय की उपपत्ति को चलाता है। यह अध्याय वही औज़ार ज़मीन से बनाता है।
मूल विचार
दो आकृतियाँ समरूप होती हैं अगर उनका स्वरूप एक जैसा हो — बहुभुजों के लिए इसका मतलब है संगत कोण बराबर और संगत भुजाएँ समान अनुपात में। त्रिभुजों में यह विचार ताक़तवर और किफ़ायती बन जाता है: छहों चीज़ें जाँचने की ज़रूरत नहीं। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय कहता है कि त्रिभुज की एक भुजा के समांतर खींची रेखा बाक़ी दो भुजाओं को समान अनुपात में काटती है — और इसी से सरल शॉर्टकट (AA, SSS, SAS) निकलते हैं जिनसे सिर्फ़ तीन बातें जाँचकर दो त्रिभुजों को समरूप घोषित किया जा सकता है। फिर समरूप त्रिभुज वे लंबाइयाँ निकालने देते हैं जिन्हें आप कभी सीधे नाप ही नहीं सकते।
आइए इसे समझें
समरूप आकृतियाँ और समरूप त्रिभुज
कक्षा IX से याद कीजिए: दो आकृतियाँ सर्वांगसम होती हैं अगर उनका स्वरूप और साइज़ दोनों एक हों। समरूपता में “स्वरूप एक” तो रहता है पर “साइज़ एक” वाली शर्त हट जाती है।
- सभी वृत्त समरूप होते हैं। सभी वर्ग समरूप होते हैं। सभी समबाहु त्रिभुज समरूप होते हैं।
- हर सर्वांगसम जोड़ी समरूप होती है, पर समरूप जोड़ी का सर्वांगसम होना ज़रूरी नहीं।
समान संख्या में भुजाओं वाले बहुभुजों के लिए “स्वरूप एक” को दो शर्तें मिलकर पकड़ती हैं:
- संगत कोण बराबर हों, और
- संगत भुजाएँ समान अनुपात (समानुपात) में हों।
इस उभयनिष्ठ अनुपात को पैमाना गुणक (scale factor) कहते हैं। ध्यान दें — बहुभुजों के लिए दोनों शर्तें ज़रूरी हैं। वर्ग और समचतुर्भुज की भुजाएँ समानुपाती हैं (सब बराबर) पर कोण बराबर नहीं — समरूप नहीं। वर्ग और आयत के कोण बराबर हैं पर भुजाएँ समानुपाती नहीं — यह भी समरूप नहीं।
त्रिभुजों के लिए हम समरूपता को ∼ चिह्न से लिखते हैं। जब हम △ABC ∼ △DEF कहते हैं, तो अक्षरों का क्रम मायने रखता है — यह संगति बताता है: A↔D, B↔E, C↔F। यानी
∠A = ∠D, ∠B = ∠E, ∠C = ∠F और AB/DE = BC/EF = CA/FD।
क्या सभी समद्विबाहु त्रिभुज आपस में समरूप होते हैं?
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (थेल्स प्रमेय)
यह पूरे अध्याय का इंजन है।
प्रमेय 6.1 (BPT)। यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा खींची जाए जो अन्य दो भुजाओं को भिन्न बिंदुओं पर काटे, तो वे अन्य दो भुजाएँ समान अनुपात में विभाजित हो जाती हैं।
दिया है: त्रिभुज ABC, जिसमें BC के समांतर रेखा AB को D पर और AC को E पर मिलती है। सिद्ध करना है: AD/DB = AE/EC।
रचना: BE और CD मिलाइए। E से EN ⊥ AB और D से DM ⊥ AC खींचिए।
उपपत्ति। त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई।
AD को आधार और EN को संगत ऊँचाई लेने पर: ar(ADE) = ½ × AD × EN। DB को आधार और वही ऊँचाई EN लेने पर: ar(BDE) = ½ × DB × EN।
तो ar(ADE) / ar(BDE) = (½ × AD × EN) / (½ × DB × EN) = AD/DB … (1)
अब दूसरी जोड़ी ऊँचाइयाँ लीजिए। AE को आधार और DM को ऊँचाई लेने पर: ar(ADE) = ½ × AE × DM, और EC को आधार व वही ऊँचाई DM लेने पर: ar(DEC) = ½ × EC × DM। तो
ar(ADE) / ar(DEC) = AE/EC … (2)
अब मुख्य बात: △BDE और △DEC एक ही आधार DE पर खड़े हैं और एक ही समांतर रेखाओं DE और BC के बीच हैं। एक ही आधार पर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच के त्रिभुजों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं, इसलिए
ar(BDE) = ar(DEC) … (3)
(1), (2) और (3) से, बाएँ पक्ष ar(ADE)/ar(BDE) और ar(ADE)/ar(DEC) बराबर हैं (अंश एक ही, हर बराबर), अतः
AD/DB = AE/EC। ∎
△ABC में D भुजा AB पर और E भुजा AC पर है तथा DE ∥ BC। यदि AD = 1.5 सेमी, DB = 3 सेमी और AE = 1 सेमी, तो EC निकालिए।
- DE ∥ BC, इसलिए आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय से AD/DB = AE/EC।
- ज्ञात लंबाइयाँ रखिए: 1.5/3 = 1/EC।
- तो 1.5 × EC = 3 × 1 → EC = 3/1.5।
- अतः EC = 2 सेमी।
BPT का विलोम
उल्टा कथन भी सही है — और उतना ही काम का, क्योंकि यह सिर्फ़ एक अनुपात से रेखा के समांतर होने को सिद्ध करने देता है।
प्रमेय 6.2 (BPT का विलोम)। यदि कोई रेखा किसी त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं को समान अनुपात में विभाजित करे, तो वह रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती है।
यह क्यों ठीक है। मान लीजिए △ABC में एक रेखा AB को D पर और AC को E पर इस तरह मिलती है कि AD/DB = AE/EC, पर DE, BC के समांतर नहीं है। तब D से होकर एक और रेखा DE′ खींचिए जो BC के समांतर हो, जहाँ E′, AC पर है। BPT (प्रमेय 6.1) से AD/DB = AE′/E′C। दिए हुए AD/DB = AE/EC से तुलना करने पर AE/EC = AE′/E′C। दोनों ओर 1 जोड़िए:
AE/EC + 1 = AE′/E′C + 1 → (AE + EC)/EC = (AE′ + E′C)/E′C → AC/EC = AC/E′C।
तो EC = E′C, जो E और E′ को संपाती (एक ही) होने पर मजबूर करता है। पर इसका मतलब है कि DE वही रेखा है जो DE′, जो BC के समांतर थी। अतः DE ∥ BC। ∎
△PQR में S भुजा PQ पर और T भुजा PR पर इस तरह है कि PS/SQ = PT/TR, और ∠PST = ∠PRQ। सिद्ध कीजिए कि △PQR समद्विबाहु है।
- चूँकि PS/SQ = PT/TR, रेखा ST, PQ और PR को समान अनुपात में बाँटती है। BPT के विलोम से ST ∥ QR।
- ST ∥ QR से ∠PST = ∠PQR (संगत कोण)। … (i)
- दिया भी है कि ∠PST = ∠PRQ। … (ii)। (i) और (ii) से ∠PQR = ∠PRQ।
- बराबर कोणों के सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए PR = PQ। अतः △PQR समद्विबाहु है।
त्रिभुजों की समरूपता की कसौटियाँ
छहों शर्तें (तीन कोण + तीन भुजा-अनुपात) जाँचना थका देने वाला है। त्रिभुजों के लिए सिर्फ़ तीन बातें काफ़ी हैं। तीन कसौटियाँ हैं, और हर एक एक प्रमेय है जिसे यह अध्याय स्थापित करता है।
प्रमेय 6.3 — AAA (और इसी से AA)। यदि दो त्रिभुजों में संगत कोण बराबर हों, तो उनकी संगत भुजाएँ समान अनुपात में होती हैं और त्रिभुज समरूप होते हैं।
उपपत्ति का सार। मान लीजिए △ABC और △DEF में ∠A = ∠D, ∠B = ∠E, ∠C = ∠F। DE और DF पर DP = AB और DQ = AC काटिए, और PQ मिलाइए। तब △ABC ≅ △DPQ (SAS: DP = AB, DQ = AC, अंतर्गत ∠D = ∠A)। तो ∠DPQ = ∠B = ∠E, जिससे PQ ∥ EF (संगत कोण बराबर)। △DEF में BPT लगाने पर DP/PE = DQ/QF, और हर ओर 1 जोड़ने पर DE/DP = DF/DQ, यानी AB/DE = AC/DF। दूसरी भुजा-जोड़ी के साथ दोहराने पर AB/DE = BC/EF = AC/DF। अतः त्रिभुज समरूप हैं। ∎
चूँकि त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है, अगर दो कोण मिल जाएँ तो तीसरा भी ज़रूर मिलेगा। इसलिए AAA को आम तौर पर AA के रूप में इस्तेमाल किया जाता है: दो जोड़ी बराबर कोण काफ़ी हैं।
प्रमेय 6.4 — SSS। यदि एक त्रिभुज की भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की भुजाओं के समानुपाती हों, तो उनके संगत कोण बराबर होते हैं और त्रिभुज समरूप होते हैं।
उपपत्ति का सार। मान लीजिए AB/DE = BC/EF = CA/FD। DE, DF पर DP = AB और DQ = AC काटिए और PQ मिलाइए। दिए अनुपातों से दिखाया जा सकता है कि DP/PE = DQ/QF, इसलिए PQ ∥ EF और DP/DE = DQ/DF = PQ/EF। दिए अनुपातों के साथ मिलाने पर PQ = BC। अब △ABC ≅ △DPQ (SSS), इसलिए ∠A = ∠D, ∠B = ∠E, ∠C = ∠F, और त्रिभुज समरूप हैं। ∎
प्रमेय 6.5 — SAS। यदि एक त्रिभुज का एक कोण दूसरे के एक कोण के बराबर हो और इन कोणों को अंतर्गत करने वाली भुजाएँ समानुपाती हों, तो त्रिभुज समरूप होते हैं।
उपपत्ति का सार। मान लीजिए ∠A = ∠D और AB/DE = AC/DF। DE, DF पर DP = AB, DQ = AC काटिए और PQ मिलाइए। भुजा-अनुपातों से PQ ∥ EF, इसलिए △ABC ≅ △DPQ (SAS) और ∠B = ∠E, ∠C = ∠F। अतः △ABC ∼ △DEF। ∎
| कसौटी | क्या दिखाना है | संक्षेप में |
|---|---|---|
| AA (AAA से) | संगत कोणों के दो जोड़े बराबर | दो बराबर कोण ⇒ समरूप |
| SSS | संगत भुजाओं के तीनों जोड़े समान अनुपात में | AB/DE = BC/EF = CA/FD |
| SAS | एक जोड़ी बराबर कोण और उसे अंतर्गत करने वाली दो भुजाएँ समानुपाती | ∠A = ∠D और AB/DE = AC/DF |
दो रेखाखंड PQ और RS, O पर एक-दूसरे को काटते हैं तथा PQ ∥ RS। सिद्ध कीजिए कि △POQ ∼ △SOR।
- PQ ∥ RS, और PS तिर्यक रेखा है, इसलिए ∠P = ∠S (एकांतर कोण)। इसी तरह QR तिर्यक रेखा से ∠Q = ∠R।
- O पर ∠POQ = ∠SOR (शीर्षाभिमुख कोण)।
- तो तीनों कोण-जोड़े बराबर हैं — या सिर्फ़ दो भी, जो काफ़ी हैं।
- AA (AAA) समरूपता कसौटी से △POQ ∼ △SOR।
△ABC में AB = 3.8, BC = 6, CA = 3√3, और ∠A = 80°, ∠B = 60°। △PQR में QP = 12, RQ = 7.6, PR = 6√3। ∠P निकालिए।
- संगति A↔R, B↔Q, C↔P में भुजा-अनुपात की तुलना कीजिए: AB/RQ = 3.8/7.6 = 1/2, BC/QP = 6/12 = 1/2, CA/PR = 3√3/6√3 = 1/2।
- तीनों अनुपात 1/2 हैं, इसलिए SSS समरूपता से △ABC ∼ △RQP।
- संगत कोण बराबर होते हैं, इसलिए ∠C = ∠P। △ABC में ∠C = 180° − ∠A − ∠B = 180° − 80° − 60° = 40°।
- अतः ∠P = 40°।
90 सेमी ऊँची एक लड़की 3.6 मीटर ऊँचे लैंप-पोस्ट से 1.2 मीटर/सेकंड की चाल से दूर चल रही है। 4 सेकंड बाद उसकी परछाईं की लंबाई निकालिए।
- मान लीजिए AB लैंप-पोस्ट (3.6 मी) और CD लड़की (0.9 मी) है, दोनों ज़मीन पर सीधे खड़े। DE उसकी परछाईं है जिसकी लंबाई x है। 4 सेकंड बाद वह BD = 1.2 × 4 = 4.8 मी चल चुकी है।
- △ABE और △CDE में: ∠B = ∠D = 90° (दोनों ज़मीन के लंबवत) और ∠E उभयनिष्ठ। तो AA से △ABE ∼ △CDE।
- संगत भुजाएँ समानुपाती हैं: BE/DE = AB/CD, यानी (4.8 + x)/x = 3.6/0.9 = 4।
- तो 4.8 + x = 4x → 3x = 4.8 → x = 1.6। परछाईं 1.6 मीटर लंबी है।
आम गलतियाँ
दो त्रिभुजों में संगत भुजा-अनुपात बराबर हों तो समरूपता को किसी भी शीर्ष-क्रम में लिख सकते हैं, जैसे △ABC ∼ △EDF।
जब तीनों बातें जाँच ली गईं तो त्रिभुज समरूप हैं ही, इसलिए लगता है कि नाम बस लेबल हैं जिन्हें कैसे भी लिख दो।
क्रम संगति को बताता है। △ABC ∼ △DEF का मतलब A↔D, B↔E, C↔F। △ABC ∼ △EDF लिखना A↔E, B↔D का दावा है — एक अलग (अक्सर ग़लत) मिलान। शीर्ष हमेशा इस तरह लिखें कि बराबर कोण आमने-सामने आएँ।
बहुभुजों के लिए अकेले बराबर संगत कोण उन्हें समरूप बना देते हैं (या अकेली समानुपाती भुजाएँ)।
त्रिभुजों के लिए एक शर्त दूसरी को सच मान लेती है (यही तो AA और SSS की बात है), इसलिए विद्यार्थी यह शॉर्टकट हर बहुभुज पर लगा देते हैं।
यह शॉर्टकट सिर्फ़ त्रिभुजों के लिए ख़ास है। आम बहुभुजों के लिए दोनों चाहिए: बराबर कोण और समानुपाती भुजाएँ। वर्ग व समचतुर्भुज (समानुपाती भुजाएँ, असमान कोण) और वर्ग व आयत (बराबर कोण, असमानुपाती भुजाएँ) — दोनों ही समरूप नहीं हैं।
BPT से AD/AB = AE/EC मिलता है।
AD, AB, AE और EC सब चित्र में हैं, इसलिए इनका कोई भी अनुपात ठीक लगता है — और AD/DB तो AD/AB के लगभग जैसा ही दिखता है।
BPT हर भुजा को उन्हीं दो टुकड़ों में बाँटकर टुकड़े-से-टुकड़े मिलाता है: AD/DB = AE/EC (हर भुजा पर ऊपरी टुकड़ा बटा निचला टुकड़ा)। एक सही रूप AD/AB = AE/AC भी है, पर एक भुजा का टुकड़ा दूसरी भुजा की पूरी लंबाई के साथ कभी मत मिलाइए।
AAA समरूपता वही शॉर्टकट है जो कक्षा IX की ASA/SSS सर्वांगसमता है — तीन बराबर कोण त्रिभुजों को सर्वांगसम बना देते हैं।
ये कसौटियाँ कक्षा IX के सर्वांगसमता नियमों जैसी दिखती हैं, इसलिए 'तीन कोण बराबर' 'तीन भुजा बराबर' जितना मज़बूत लगता है।
बराबर कोण एक ही स्वरूप देते हैं, एक ही साइज़ नहीं — यह समरूपता है, सर्वांगसमता नहीं। एक नन्हा और एक विशाल समबाहु त्रिभुज के कोण बिल्कुल एक जैसे (हर एक 60°) हैं पर वे साफ़ तौर पर सर्वांगसम नहीं। AAA ⇒ समरूप; साइज़ पक्का करने के लिए एक भुजा चाहिए ताकि सर्वांगसमता मिले।
झटपट जाँच
△ABC में एक रेखा DE, AB को D पर और AC को E पर मिलती है तथा DE ∥ BC। यदि AD = 4, DB = 6 और AE = 6, तो EC क्या है?
△PQR में PQ पर E और PR पर F से PE = 4, EQ = 4.5, PF = 8, FR = 9 मिलता है। क्या EF ∥ QR?
∠A = ∠D पहले से ज्ञात है, तो कौन-सा एक और तथ्य AA कसौटी से △ABC ∼ △DEF निष्कर्ष देता है?
△ABC ∼ △DEF जिसमें AB/DE = 2/5। यदि BC = 4 सेमी, तो EF क्या है?
अभ्यास प्रश्न
आसान
△ABC में DE ∥ BC, D भुजा AB पर और E भुजा AC पर। यदि AD = 2 सेमी, AB = 6 सेमी और AE = 3 सेमी, तो AC निकालिए।
चूँकि DE ∥ BC, BPT (टुकड़ा-से-पूरा रूप) से AD/AB = AE/AC।
तो 2/6 = 3/AC → AC = 3 × 6/2 = 9 सेमी।
△PQR में बताइए कि EF ∥ QR है या नहीं, जब PE = 3.9 सेमी, EQ = 3 सेमी, PF = 3.6 सेमी, FR = 2.4 सेमी।
दोनों अनुपात निकालिए: PE/EQ = 3.9/3 = 1.3, और PF/FR = 3.6/2.4 = 1.5।
चूँकि 1.3 ≠ 1.5, भुजाएँ समान अनुपात में विभाजित नहीं हैं, इसलिए BPT के विलोम से EF, QR के समांतर नहीं है।
मध्यम
ABCD एक समलंब है जिसमें AB ∥ DC। E भुजा AD पर और F भुजा BC पर इस तरह है कि EF ∥ AB। सिद्ध कीजिए कि AE/ED = BF/FC।
AC मिलाइए, जो EF को G पर मिलती है।
दिया है AB ∥ DC और EF ∥ AB, इसलिए EF ∥ DC (एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ आपस में समांतर)।
△ADC में EG ∥ DC, इसलिए BPT से: AE/ED = AG/GC … (1)
△CAB में GF ∥ AB, इसलिए BPT से: CG/GA = CF/FB, यानी AG/GC = BF/FC … (2)
(1) और (2) से: AE/ED = BF/FC।
△POQ और △SOR में PQ ∥ RS और रेखाखंड O पर मिलते हैं। यदि PQ = 5 सेमी, RS = 8 सेमी और OQ = 4 सेमी, तो OR निकालिए।
PQ ∥ RS से ∠P = ∠S और ∠Q = ∠R (एकांतर कोण), तथा ∠POQ = ∠SOR (शीर्षाभिमुख)। इसलिए AA से △POQ ∼ △SOR।
संगत भुजाएँ: PQ/SR = OQ/OR।
तो 5/8 = 4/OR → OR = 4 × 8/5 = 32/5 = 6.4 सेमी।
चुनौती
△ABC की भुजा BC पर D एक बिंदु है जिससे ∠ADC = ∠BAC। सिद्ध कीजिए कि CA² = CB · CD।
△ABC और △DAC की तुलना कीजिए।
∠ACB = ∠DCA (वही कोण C, दोनों त्रिभुजों में उभयनिष्ठ)।
∠BAC = ∠ADC (दिया है)।
तो AA से △ABC ∼ △DAC। संगति में सावधानी: A↔D, B↔A, C↔C, यानी △BAC ∼ △ADC।
मिलती भुजाएँ: CA/CD = CB/CA (उभयनिष्ठ कोण C के सामने की भुजा बटा संगत भुजा)।
तिर्यक गुणन: CA × CA = CB × CD, यानी CA² = CB · CD।
CM और RN क्रमशः △ABC और △PQR की माध्यिकाएँ हैं, और △ABC ∼ △PQR। सिद्ध कीजिए कि CM/RN = AB/PQ।
चूँकि △ABC ∼ △PQR: AB/PQ = BC/QR = CA/RP … (1) और ∠A = ∠P, ∠B = ∠Q, ∠C = ∠R … (2)।
CM, AB की माध्यिका है, इसलिए AM = ½AB; RN, PQ की माध्यिका है, इसलिए PN = ½PQ। (1) से AB/PQ = CA/RP, और चूँकि AM = ½AB, PN = ½PQ, हमें AM/PN = CA/RP मिलता है, यानी AM/PN = AC/PR।
△AMC और △PNR में: ∠A = ∠P ((2) से) और AM/PN = AC/PR। तो SAS समरूपता से △AMC ∼ △PNR।
इन समरूप त्रिभुजों की संगत भुजाएँ देती हैं CM/RN = AC/RP। पर (1) से AC/RP = AB/PQ।
अतः CM/RN = AB/PQ — संगत माध्यिकाएँ संगत भुजाओं के उसी अनुपात में होती हैं।
सारांश
अब आपको ये समझा पाना चाहिए:
- समरूप आकृतियों का स्वरूप एक होता है पर साइज़ ज़रूरी नहीं। हर सर्वांगसम आकृति समरूप होती है, पर उल्टा नहीं।
- दो बहुभुज (समान भुजाओं की संख्या) तभी समरूप होते हैं जब दोनों सही हों: संगत कोण बराबर और संगत भुजाएँ समानुपाती। उभयनिष्ठ अनुपात पैमाना गुणक है।
- आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (थेल्स): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाक़ी दो भुजाओं को समान अनुपात में बाँटती है — AD/DB = AE/EC। एक ही आधार पर एक ही समांतर रेखाओं के बीच के बराबर-क्षेत्रफल त्रिभुजों से सिद्ध।
- BPT का विलोम: यदि कोई रेखा त्रिभुज की दो भुजाओं को समान अनुपात में बाँटे, तो वह तीसरी भुजा के समांतर होती है — रेखाओं को समांतर सिद्ध करने का आपका औज़ार।
- त्रिभुजों की समरूपता कसौटियाँ: AAA/AA (बराबर कोण ⇒ समानुपाती भुजाएँ), SSS (समानुपाती भुजाएँ ⇒ बराबर कोण), SAS (दो समानुपाती भुजाओं के बीच एक बराबर कोण)। हर एक को सिर्फ़ तीन बातें चाहिए।
- समरूपता को सही शीर्ष-क्रम में लिखें: △ABC ∼ △DEF का मतलब A↔D, B↔E, C↔F।
- समरूप त्रिभुज अप्रत्यक्ष मापन को चलाते हैं — ऊँचाइयाँ, दूरियाँ, परछाइयाँ।
आगे क्या
अब तक आप आकृतियों पर लंबाइयों, अनुपातों और समांतरता से तर्क करते रहे — शुद्ध ज्यामिति, बिना ग्रिड। आगे, निर्देशांक ज्यामिति में, आप बिंदुओं को x–y तल पर रखकर ज्यामिति को बीजगणित में बदलेंगे: दो बिंदुओं की दूरी निकालने का दूरी सूत्र, और किसी रेखाखंड को दिए अनुपात में बाँटने वाले बिंदु को निकालने का विभाजन सूत्र — वही “अनुपात में बाँटना” वाला विचार जो आपने अभी BPT में देखा, अब सटीक निर्देशांकों के साथ।