समांतर श्रेढ़ी
यह क्यों ज़रूरी है
ऐसे पैटर्न जो हर बार एक तय क़दम से बढ़ते हैं, हर जगह मिलते हैं। रीना ₹8000 महीने की नौकरी से शुरू करती है और हर साल ₹500 की बढ़ोतरी पाती है — 8000, 8500, 9000, … । सीढ़ी के डंडे ऊपर जाते-जाते हर बार 2 cm छोटे होते हैं — 45, 43, 41, 39, … । शकीला अपनी बेटी के पहले जन्मदिन पर गुल्लक में ₹100 डालती है और हर साल ₹50 ज़्यादा — 100, 150, 200, 250, … ।
इनमें से हर एक में तुम बेशक तय रक़म बार-बार जोड़ते जा सकते हो। पर अगर कोई पूछे: 25वें साल की तनख़्वाह कितनी होगी? या 21वें जन्मदिन तक गुल्लक में कितने पैसे होंगे? तो हाथ से 24 या 21 बार जोड़ना धीमा भी है और ग़लती की पूरी गुंजाइश भी।
यह अध्याय तुम्हें दो शॉर्टकट देता है जो इस मेहनत को एक ही हिसाब में बदल देते हैं: n-वें पद का सूत्र (पहले के पद लिखे बिना सीधे किसी भी पद पर पहुँचो) और पहले n पदों के योग का सूत्र (पूरी सूची एक ही पंक्ति में जोड़ो)। और तुम इन्हें सिर्फ़ रटोगे नहीं — तुम ठीक-ठीक देखोगे कि हर एक क्यों सही है, उस ख़ूबसूरत तरकीब समेत जो 10 साल के गाउस ने 1 + 2 + ⋯ + 100 को पलों में जोड़ने के लिए इस्तेमाल की।
मूल विचार
समांतर श्रेढ़ी (AP) संख्याओं की एक सूची है जिसमें हर पद पिछले पद जमा एक तय संख्या d होता है, जिसे सार्व अंतर कहते हैं। बस दो चीज़ें जानना — पहला पद a और वह क़दम d — पूरी सूची लिख देने के लिए काफ़ी है: a, a + d, a + 2d, a + 3d, … । इससे तुम किसी भी पद को सीधे aₙ = a + (n − 1)d से निकाल सकते हो, और पहले n पदों को एक झटके में Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] से जोड़ सकते हो, जो अंतिम पद l पता होने पर वही n/2 (a + l) है।
आओ इसे समझें
AP क्या है, और इसे पहचानें कैसे
संख्याओं की कोई सूची समांतर श्रेढ़ी है अगर हर पद तुम्हें पिछले पद में वही तय संख्या जोड़कर मिले (पहले पद के पहले कुछ होता नहीं, तो वह बस सूची शुरू करता है)। वह तय संख्या सार्व अंतर है, जिसे d लिखते हैं। यह धनात्मक हो सकता है (सूची बढ़ती है), ऋणात्मक (सूची घटती है), या शून्य (हर पद एक जैसा)।
हम पदों को a₁, a₂, a₃, …, aₙ नाम देते हैं, तो AP होती है a₁, a₂, a₃, …, aₙ। चूँकि हर पद पिछले पद जमा d है:
a₂ − a₁ = a₃ − a₂ = ⋯ = aₙ − aₙ₋₁ = d
तो किसी सूची को जाँचने के लिए, हर पद को उसके बाद वाले पद में से घटाओ। अगर हर बार वही संख्या मिले, तो यह AP है — और वही संख्या d है। एक बात याद रखो: हमेशा पहले वाले पद को बाद वाले में से घटाओ (aₖ₊₁ − aₖ), तब भी जब बाद वाला पद छोटा हो (तब d बस ऋणात्मक आ जाता है)।
अगर तुम्हें a और d पता हो, तो AP तय हो जाती है — तुम उसे लिख सकते हो। रूप a, a + d, a + 2d, a + 3d, … को AP का सामान्य रूप कहते हैं। जिस AP का अंतिम पद हो (जैसे 45, 43, …, 31) वह परिमित है; जो चलती ही रहे (जैसे 1, 2, 3, …) वह अपरिमित है।
हर सूची के लिए बताओ कि यह AP है या नहीं। अगर है, तो a, d और अगले दो पद दो: (i) 4, 10, 16, 22, … (ii) 1, −1, −3, −5, … (iii) −2, 2, −2, 2, …
- (i) अंतर: 10 − 4 = 6, 16 − 10 = 6, 22 − 16 = 6। सब बराबर, तो यह AP है, a = 4, d = 6। अगले दो: 22 + 6 = 28, फिर 28 + 6 = 34।
- (ii) अंतर: −1 − 1 = −2, −3 − (−1) = −2, −5 − (−3) = −2। सब बराबर, तो यह AP है, a = 1, d = −2। अगले दो: −5 + (−2) = −7, फिर −9।
- (iii) अंतर: 2 − (−2) = 4, पर −2 − 2 = −4। अंतर एक जैसे नहीं हैं, तो यह AP नहीं है। अंतिम जवाब: (i) AP, a = 4, d = 6, अगले 28 और 34; (ii) AP, a = 1, d = −2, अगले −7 और −9; (iii) AP नहीं।
क्या 1, 1, 2, 3, 5, 8, … (फ़िबोनाची सूची) समांतर श्रेढ़ी है?
n-वें पद का व्युत्पादन: aₙ = a + (n − 1)d
मान लो हम रीना की 25वें साल की तनख़्वाह सब 25 लिखे बिना चाहते हैं। पहले पद a से पैटर्न को बनते देखो, हर क़दम पर d जोड़ते हुए:
- a₁ = a (पहला पद — हमने d शून्य बार जोड़ा)
- a₂ = a + d = a + (2 − 1)d (d एक बार जोड़ा)
- a₃ = a₂ + d = a + 2d = a + (3 − 1)d (d दो बार जोड़ा)
- a₄ = a₃ + d = a + 3d = a + (4 − 1)d (d तीन बार जोड़ा)
पैटर्न साफ़ है: n-वें पद तक पहुँचने के लिए तुम a से शुरू करते हो और d को कुल (n − 1) बार जोड़ते हो — n से एक कम, क्योंकि पहले पद को कुछ जोड़ने की ज़रूरत ही नहीं थी। तो:
aₙ = a + (n − 1)d
यह AP का n-वाँ पद (या व्यापक पद) है। अगर AP का अंतिम पद हो, उसे अक्सर l कहते हैं, तो अंतिम पद के लिए l = a + (n − 1)d।
AP 2, 7, 12, … का 10वाँ पद ढूँढो।
- a और d पहचानो: a = 2, और d = 7 − 2 = 5। हमें n = 10 चाहिए।
- aₙ = a + (n − 1)d लगाओ: a₁₀ = 2 + (10 − 1) × 5 = 2 + 9 × 5 = 2 + 45।
- तो 10वाँ पद 47 है।
AP 21, 18, 15, … का कौन-सा पद −81 है? क्या कोई पद 0 के बराबर है?
- यहाँ a = 21, d = 18 − 21 = −3। हमें वह n चाहिए जिसके लिए aₙ = −81।
- aₙ = a + (n − 1)d बनाओ: −81 = 21 + (n − 1)(−3) → −81 = 21 − 3(n − 1) → −81 = 24 − 3n।
- तो −105 = −3n → n = 35। 35वाँ पद −81 है।
- aₙ = 0 के लिए: 21 + (n − 1)(−3) = 0 → 3(n − 1) = 21 → n − 1 = 7 → n = 8। हाँ — 8वाँ पद 0 है।
जब a और d की जगह तुम्हें दो पद दिए हों, तो दो समीकरण बनते हैं — उन्हें युग्म की तरह हल करो (बिल्कुल अध्याय 3 की तरह)।
किसी AP का तीसरा पद 5 और सातवाँ पद 9 है। AP ढूँढो।
- हर पद को सूत्र से लिखो: a₃ = a + 2d = 5 … (1) और a₇ = a + 6d = 9 … (2)।
- a को मिटाने के लिए (1) को (2) में से घटाओ: (a + 6d) − (a + 2d) = 9 − 5 → 4d = 4 → d = 1।
- d = 1 को (1) में रखो: a + 2(1) = 5 → a = 3।
- a = 3, d = 1 के साथ AP है 3, 4, 5, 6, 7, …
तुम यह भी जाँच सकते हो कि कोई ख़ास संख्या किसी AP में है भी या नहीं: n के लिए हल करो, और अगर n कोई धनात्मक पूर्ण संख्या न निकले, तो वह संख्या उस AP का पद नहीं है।
जाँचो कि 301, सूची 5, 11, 17, 23, … का पद है या नहीं।
- यह AP है, a = 5, d = 6। मान लो 301 n-वाँ पद है: 301 = 5 + (n − 1) × 6।
- तब 301 = 6n − 1 → 6n = 302 → n = 302/6 = 151/3।
- n को धनात्मक पूर्ण संख्या होना चाहिए, पर 151/3 नहीं है। तो 301 इस AP का पद नहीं है।
योग का व्युत्पादन: Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] = n/2 (a + l)
अब असली फ़ायदा: पहले n पदों को एक-एक करके खींचे बिना जोड़ना। मान लो Sₙ (या बस S) वह योग है:
S = a + (a + d) + (a + 2d) + ⋯ + [a + (n − 1)d] … (1)
यह रही वह तरकीब जो छोटे गाउस ने 1 + 2 + ⋯ + 100 जोड़ने के लिए इस्तेमाल की। वही योग फिर से लिखो, पर उल्टे क्रम में (अंतिम पद पहले, a पर ख़त्म):
S = [a + (n − 1)d] + [a + (n − 2)d] + ⋯ + (a + d) + a … (2)
अब (1) और (2) को खंभा-दर-खंभा (column-wise) जोड़ो। किसी एक खंभे को देखो: (1) वाला पद दाएँ जाते-जाते d से ऊपर चढ़ रहा है, जबकि (2) वाला पद d से नीचे उतर रहा है — तो हर खंभे में दोनों टुकड़े वही कुल बनाते हैं, 2a + (n − 1)d। (पहला खंभा जाँचो: a + [a + (n − 1)d] = 2a + (n − 1)d। दूसरा: (a + d) + [a + (n − 2)d] = 2a + (n − 1)d। हर बार वही — एक ओर की अतिरिक्त d दूसरी ओर की कमी d से कट जाती है।)
खंभे n हैं, तो:
2S = n × [2a + (n − 1)d]
दोनों ओर 2 से भाग दो:
S = n/2 [2a + (n − 1)d]
यह पहले n पदों का योग है। अब ग़ौर करो कि 2a + (n − 1)d = a + [a + (n − 1)d] = a + (n-वाँ पद)। तो हम यह भी लिख सकते हैं S = n/2 [a + aₙ]। जब AP का अंतिम पद l हो (यानी aₙ = l), तो यह बनता है सुथरा रूप:
S = n/2 (a + l)
जब तुम्हें पहला और अंतिम पद पता हों (और d न हो) तब n/2 (a + l) इस्तेमाल करो; जब a, d और n पता हों तब n/2 [2a + (n − 1)d]।
AP 8, 3, −2, … के पहले 22 पदों का योग ढूँढो।
- यहाँ a = 8, d = 3 − 8 = −5, n = 22।
- Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] लगाओ: S₂₂ = 22/2 × [2(8) + (22 − 1)(−5)] = 11 × [16 + 21(−5)]।
- अंदर: 16 + (−105) = −89। तो S₂₂ = 11 × (−89) = −979।
पहली n धन पूर्णांकों का योग 1 + 2 + 3 + ⋯ + n ढूँढो।
- यह AP है, a = 1, सार्व अंतर d = 1, और अंतिम पद l = n।
- पहला-और-अंतिम रूप सबसे सुथरा है: Sₙ = n/2 (a + l) = n/2 (1 + n)।
- तो 1 + 2 + ⋯ + n = n(n + 1)/2। (n = 100 के लिए: 100 × 101 / 2 = 5050 — बिल्कुल गाउस का जवाब।)
AP 24, 21, 18, … के कितने पद लें ताकि उनका योग 78 हो?
- यहाँ a = 24, d = 21 − 24 = −3, Sₙ = 78। Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] लगाओ: 78 = n/2 [48 + (n − 1)(−3)]।
- कोष्ठक सरल करो: 48 − 3(n − 1) = 48 − 3n + 3 = 51 − 3n। तो 78 = n/2 (51 − 3n) → 156 = n(51 − 3n) = 51n − 3n²।
- पुनर्व्यवस्थित करो: 3n² − 51n + 156 = 0 → 3 से भाग → n² − 17n + 52 = 0 → (n − 4)(n − 13) = 0।
- तो n = 4 या n = 13 — दोनों मान्य। 5वें से 13वें तक के पद जुड़कर 0 बनते हैं (कुछ धनात्मक, कुछ ऋणात्मक कट जाते हैं), इसलिए पहले 4 और पहले 13 दोनों का योग 78 है। जवाब: 4 या 13 पद।
योग और पदों के बीच एक काम का रिश्ता भी है: n-वाँ पद लगातार योगों के अंतर के बराबर होता है, aₙ = Sₙ − Sₙ₋₁। (पहले n पदों में से पहले (n − 1) पद घटाने पर सिर्फ़ n-वाँ पद बचता है।) इससे तुम तब पद वापस निकाल सकते हो जब सिर्फ़ योग का सूत्र दिया हो।
सब जोड़कर: शब्द-समस्याएँ
ज़्यादातर “रोज़मर्रा” की AP समस्याएँ इसी पर उतर आती हैं: AP पहचानो, a और d (या a और l) लिखो, फिर सही सूत्र उठाओ।
एक TV बनाने वाली कंपनी ने तीसरे साल 600 सेट और सातवें साल 700 सेट बनाए, उत्पादन हर साल एक तय संख्या से बढ़ता है। ढूँढो (i) पहले साल का उत्पादन, (ii) 10वें साल का उत्पादन, (iii) पहले 7 सालों का कुल उत्पादन।
- उत्पादन एक AP बनाता है। दिया है a₃ = a + 2d = 600 … (1) और a₇ = a + 6d = 700 … (2)।
- (1) को (2) में से घटाओ: 4d = 100 → d = 25। फिर (1) से: a + 50 = 600 → a = 550। तो (i) पहले साल 550 सेट।
- (ii) 10वाँ साल: a₁₀ = a + 9d = 550 + 9(25) = 550 + 225 = 775 सेट।
- (iii) पहले 7 साल: S₇ = 7/2 [2(550) + (7 − 1)(25)] = 7/2 [1100 + 150] = 7/2 × 1250 = 4375 सेट।
आम ग़लतियाँ
n-वाँ पद a + nd है — हर पद के लिए d एक बार जोड़ो।
यह स्वाभाविक लगता है कि 'n पद' का मतलब 'क़दम n बार जोड़ो', और a + nd पढ़ने में a + (n − 1)d से ज़्यादा सरल लगता है।
यह a + (n − 1)d है। **पहले** पद को कुछ जोड़ने की ज़रूरत नहीं (वह बस a है), तो n-वें पद तक पहुँचने के लिए d सिर्फ़ (n − 1) बार जोड़ते हो। जाँचो: a = 2, d = 5 पर पहला पद 2 ही होना चाहिए — और a + (1 − 1)d = 2 ✓, जबकि a + 1·d = 7 ✗।
सार्व अंतर = (पहला पद) − (दूसरा पद), तो 6, 3, 0, … के लिए d = 6 − 3 = 3 लो।
d को धनात्मक रखने के लिए बड़ी संख्या में से छोटी घटाना ज़्यादा सुथरा लगता है।
हमेशा d = (बाद वाला पद) − (पहले वाला पद) = aₖ₊₁ − aₖ करो। 6, 3, 0, … के लिए वह है d = 3 − 6 = −3, यानी **ऋणात्मक** सार्व अंतर। घटाव उल्टा करने से एक अलग, बढ़ती हुई सूची बन जाएगी।
अगर aₙ = (कोई मान) हल करने पर n = 151/3 या n = 7.5 आए, तो बस नज़दीकी पूर्ण संख्या में गोल कर दो।
जो संख्या किसी पूर्ण संख्या के क़रीब हो वह 'लगभग' फ़िट होती दिखती है, तो गोल करना हानिरहित लगता है।
n सूची में स्थान गिनता है, तो वह **धनात्मक पूर्णांक** होना ही चाहिए। भिन्न वाला n का मतलब है कि वह मान उस AP का पद **नहीं** है — गोल करने को कुछ है ही नहीं। बताओ कि वह पद नहीं है।
पहले n पदों को जोड़ने के लिए तुम Sₙ = n/2 (a + l) तब भी इस्तेमाल कर सकते हो जब अंतिम पद l पता न हो।
(a + l) वाला रूप छोटा और तेज़ दिखता है, तो उसे हर जगह इस्तेमाल करने का मन करता है।
n/2 (a + l) सिर्फ़ तब इस्तेमाल करो जब l (n-वाँ/अंतिम पद) पता हो। अगर सिर्फ़ a, d और n हों, तो Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] इस्तेमाल करो — या पहले l = a + (n − 1)d निकालो, फिर (a + l) वाला रूप लगाओ।
झटपट जाँच
AP 21, 18, 15, … के लिए सार्व अंतर d क्या है?
किसी AP का पहला पद a = 7 और सार्व अंतर d = 3 है। इसका 8वाँ पद क्या है?
जब a, d और n पता हों, तब AP के पहले n पदों का योग कौन-सा सूत्र देता है?
उलटो-और-जोड़ो तरकीब में, (S सीधा लिखा) + (S उल्टा लिखा) के n में से हर खंभा जुड़कर बनता है:
अभ्यास प्रश्न
आसान
AP −1.2, −3.2, −5.2, −7.2, … का सार्व अंतर और अगले दो पद ढूँढो।
d = −3.2 − (−1.2) = −2 (और सचमुच −5.2 − (−3.2) = −2)। यह AP है, d = −2।
अगला पद: −7.2 + (−2) = −9.2। उसके बाद: −9.2 + (−2) = −11.2।
तो अगले दो पद हैं −9.2 और −11.2।
AP 3, 8, 13, 18, … का कौन-सा पद 78 है?
यहाँ a = 3, d = 8 − 3 = 5। मान लो n-वाँ पद 78 है।
aₙ = a + (n − 1)d → 78 = 3 + (n − 1)×5 → 75 = 5(n − 1) → n − 1 = 15 → n = 16।
तो 78, 16वाँ पद है।
मध्यम
दो अंकों की कितनी संख्याएँ 3 से विभाज्य हैं?
दो अंकों के 3 के गुणज हैं 12, 15, 18, …, 99 — एक AP, a = 12, d = 3, अंतिम पद l = 99।
l = a + (n − 1)d लगाओ: 99 = 12 + (n − 1)×3 → 87 = 3(n − 1) → n − 1 = 29 → n = 30।
तो दो अंकों की 30 संख्याएँ 3 से विभाज्य हैं।
किसी AP का 17वाँ पद उसके 10वें पद से 7 ज़्यादा है। सार्व अंतर ढूँढो।
a₁₇ = a + 16d और a₁₀ = a + 9d। “7 ज़्यादा” का मतलब a₁₇ − a₁₀ = 7।
(a + 16d) − (a + 9d) = 7 → 7d = 7 → d = 1।
(ग़ौर करो कि a कट जाता है — दो पदों के बीच का फ़र्क़ सिर्फ़ d और उनके बीच कितने क़दम हैं इस पर निर्भर है: 16 − 9 = 7 क़दम d के।)
₹1000 की रक़म 8% साधारण ब्याज प्रति वर्ष पर लगाई जाती है। क्या हर साल का ब्याज एक AP बनाता है? 30 साल के अंत में ब्याज ढूँढो।
T साल का साधारण ब्याज = P × R × T / 100। P = 1000, R = 8 के साथ:
- साल 1: 1000 × 8 × 1 / 100 = 80
- साल 2: 1000 × 8 × 2 / 100 = 160
- साल 3: 240, और ऐसे ही आगे।
रक़में 80, 160, 240, … हर साल 80 बढ़ती हैं, तो वे एक AP बनाती हैं, a = 80, d = 80।
30 साल के अंत में ब्याज = a₃₀ = a + 29d = 80 + 29 × 80 = 80 × 30 = ₹2400।
चुनौती
एक फूलों की क्यारी में पहली पंक्ति में 23 गुलाब के पौधे हैं, दूसरी में 21, तीसरी में 19, और ऐसे ही घटते-घटते आख़िरी पंक्ति में 5। कितनी पंक्तियाँ हैं?
गिनतियाँ 23, 21, 19, …, 5 एक AP बनाती हैं, a = 23, d = 21 − 23 = −2, और अंतिम पद l = 5।
मान लो n पंक्तियाँ हैं, तो aₙ = 5: 5 = 23 + (n − 1)(−2)।
→ 5 − 23 = −2(n − 1) → −18 = −2(n − 1) → n − 1 = 9 → n = 10।
तो क्यारी में 10 पंक्तियाँ हैं।
अगर किसी AP के पहले 14 पदों का योग 1050 है और उसका पहला पद 10 है, तो 20वाँ पद ढूँढो।
दिया है S₁₄ = 1050, n = 14, a = 10। Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] लगाओ:
1050 = 14/2 [2(10) + (14 − 1)d] = 7 [20 + 13d] = 140 + 91d।
तो 91d = 1050 − 140 = 910 → d = 10।
फिर 20वाँ पद a₂₀ = a + 19d = 10 + 19 × 10 = 10 + 190 = 200।
किसी AP के पहले n पदों का योग Sₙ = 4n − n² है। पहला पद, दूसरा पद और n-वाँ पद ढूँढो।
पहला पद: S₁ = 4(1) − 1² = 3, और S₁ तो बस पहला पद है, तो a = 3।
पहले दो पदों का योग: S₂ = 4(2) − 2² = 8 − 4 = 4। दूसरा पद S₂ − S₁ = 4 − 3 = 1।
तो d = a₂ − a₁ = 1 − 3 = −2।
n-वें पद के लिए aₙ = Sₙ − Sₙ₋₁ लगाओ: Sₙ₋₁ = 4(n − 1) − (n − 1)² = 4n − 4 − (n² − 2n + 1) = −n² + 6n − 5। aₙ = Sₙ − Sₙ₋₁ = (4n − n²) − (−n² + 6n − 5) = 4n − n² + n² − 6n + 5 = 5 − 2n।
(जाँच: a₁ = 5 − 2 = 3 ✓, a₂ = 5 − 4 = 1 ✓।)
सारांश
अब तुम यह समझा पाने चाहिए:
- AP वह सूची है जिसमें हर पद पिछले पद जमा एक तय सार्व अंतर d होता है; d धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। सामान्य रूप: a, a + d, a + 2d, …।
- किसी सूची को जाँचने के लिए, देखो कि aₖ₊₁ − aₖ हर k के लिए एक जैसा हो — हमेशा पहले वाले पद को बाद वाले में से घटाते हुए।
- n-वाँ पद है aₙ = a + (n − 1)d, क्योंकि n-वें पद तक पहुँचना यानी d को कुल (n − 1) बार जोड़ना (पहले पद को जोड़ने की ज़रूरत नहीं)।
- पहले n पदों का योग है Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] = n/2 (a + l), जो योग लिखकर, उसे उल्टा करके, और जोड़कर सिद्ध होता है — हर खंभा (a + l) बनाता है, और खंभे n हैं, तो 2S = n(a + l)।
- जब अंतिम पद l पता हो तो n/2 (a + l) इस्तेमाल करो; जब a, d और n पता हों तो n/2 [2a + (n − 1)d]।
- n धनात्मक पूर्णांक होना चाहिए — भिन्न वाला n का मतलब है कि मान कोई पद नहीं / स्थिति असंभव है।
- काम के रिश्ते: अंतिम पद के लिए l = a + (n − 1)d, और aₙ = Sₙ − Sₙ₋₁।
आगे क्या
अब तक तुम एक रेखा में संख्याओं के साथ काम कर रहे थे। आगे, त्रिभुज में, ध्यान आकार और अनुपात पर जाता है: दो त्रिभुज कब एक ही आकार के (समरूप) होते हैं, इससे भुजाओं के कौन-से बराबर अनुपात मजबूर होते हैं, और जो दमदार परिणाम इससे निकलते हैं — जैसे आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय और समरूपता की शर्तें। जो सावधान “नियम पहचानो, फिर सिद्ध करो” सोच तुमने यहाँ इस्तेमाल की, वह सीधे ज्यामिति में काम आती है।