सत्रिया और बिहू नृत्य

Chapter 8 · Hindi · Class 6 18 min read

इस पाठ का महत्व

क्या आपने कभी खुशी में झूमकर नाचा है? शादी में, त्योहार में, या किसी की जीत पर?

जब हम बहुत खुश होते हैं, तो शब्द कम पड़ जाते हैं। तब हमारे पैर खुद-ब-खुद थिरकने लगते हैं। यही तो नृत्य है। नृत्य का मतलब है — शरीर से, हाव-भाव से अपने मन की बात कहना।

हमारा भारत बहुत बड़ा देश है। यहाँ हर राज्य का अपना नृत्य है, अपना त्योहार है, अपनी भाषा है। यह पाठ हमें भारत के एक ख़ास राज्य — असम — के दो नृत्यों से मिलवाता है।

इस कहानी में एक लड़की है, जिसका नाम है एंजेला। वह बहुत दूर, लंदन शहर में रहती है। वह असम आती है। यहाँ के नृत्यों पर एक वृत्तचित्र (फ़िल्म जैसी जानकारी) बनाने के लिए। उसके साथ-साथ हम भी असम के सत्रिया नृत्य और बिहू नृत्य को जानेंगे।

यह पाठ हमें एक बहुत सुंदर बात सिखाता है — हमारे देश में इतने अलग-अलग नृत्य हैं, फिर भी सबका मन एक है। इसी को कहते हैं “विविधता में एकता”। यह बात जीवन भर याद रखने लायक है।

मूल भाव

इस पाठ का मूल भाव है — नृत्य और संगीत हर संस्कृति की अपनी आवाज़ हैं। पूरी दुनिया में लोग नाच-गाकर अपनी भावनाएँ बताते हैं। असम के सत्रिया और बिहू नृत्य अलग-अलग हैं — एक शांत और भक्तिभरा, दूसरा खुशी से भरा। फिर भी दोनों एक ही काम करते हैं — मन की बात कहते हैं। भारत के अनेक नृत्यों में यही “विविधता में एकता” छिपी है। हमें अपनी इस समृद्ध परंपरा पर गर्व करना चाहिए।

आगे बढ़ने से पहले एक छोटा-सा शब्द साफ़ कर लेते हैं, जो पूरे पाठ में काम आएगा।

📖 मूल पाठ कहाँ पढ़ें: इस पृष्ठ पर हमने पाठ का सरल अर्थ और व्याख्या दी है। पूरा मूल पाठ अपनी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “मल्हार” (कक्षा 6) में पढ़ें, और इस व्याख्या के साथ मिलाकर समझें।

पाठ का सार

आइए, एंजेला की यात्रा को शुरू से, क्रम से समझते हैं।

एंजेला कौन है? एंजेला एक लड़की है। वह लंदन में रहती है। लंदन ‘यूनाइटेड किंगडम’ (यू.के.) देश की राजधानी है, जो भारत से बहुत दूर है। एंजेला की माँ का नाम है एलेसेंड्रा। एलेसेंड्रा को असम बहुत पसंद है। उन्हें वहाँ के बिहू और सत्रिया नृत्य से बहुत प्रेम है। वे असम के बारे में बहुत कुछ जानती हैं।

असम क्यों आना? एंजेला और उसकी माँ असम के नृत्यों पर एक वृत्तचित्र बनाना चाहती हैं। वृत्तचित्र को अंग्रेज़ी में “डॉक्यूमेंट्री” कहते हैं। यह एक सच्ची जानकारी देने वाली फ़िल्म होती है। इसी काम के लिए वे असम जाने का तय करती हैं।

लंबी हवाई यात्रा। एंजेला लंदन से चलती है। उसका हवाई जहाज़ पहले नई दिल्ली रुकता है। फिर वहाँ से वह गुवाहाटी की उड़ान पर बैठती है। गुवाहाटी असम का सबसे बड़ा और बहुत पुराना शहर है। इतनी लंबी यात्रा में वह सोचती ही रहती है कि असम कैसा होगा।

नई दोस्त अनु। असम पहुँचकर एंजेला की मुलाकात अनु से होती है। अनु एंजेला की हमउम्र है, यानी दोनों की उम्र लगभग एक जैसी है। इसीलिए दोनों जल्दी ही अच्छी सहेलियाँ बन जाती हैं। एंजेला अनु से असमिया भाषा सीखना चाहती है, और अनु उसकी मदद करती है।

सत्रिया नृत्य देखना। अनु और बाकी लोग एंजेला को एक सत्र ले जाते हैं। सत्र असम के मठ होते हैं — पूजा-पाठ वाली जगह। वहाँ एंजेला शांत और भक्तिभरा सत्रिया नृत्य देखती है। यह नृत्य देखकर वह मंत्रमुग्ध हो जाती है।

बिहू नृत्य देखना। फिर आता है बिहू का त्योहार। एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया जाता है। वहाँ लोग हँसते-गाते, ढोल बजाते बिहू नृत्य करते हैं। एंजेला और उसका पूरा परिवार यह नृत्य देखकर अचंभित रह जाते हैं। साथ ही वे वहाँ के लजीज़ (स्वादिष्ट) पकवानों का भी आनंद लेते हैं।

नई समझ। इस पूरी यात्रा में एंजेला को एक बड़ी बात समझ आती है — पूरी दुनिया में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाएँ बताते हैं। भारत के नृत्य अलग-अलग हैं, पर हर एक में एक अपनापन है।

पूरी कहानी को एक नज़र में देखने के लिए, नीचे चित्र 8.1 देखिए।

एंजेला की यात्रा का घटना-क्रम
Figure 8.1 — यह चित्र एंजेला की पूरी यात्रा को क्रम से दिखाता है। (1) लंदन में — एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा असम के नृत्यों पर वृत्तचित्र बनाना चाहती हैं। (2) हवाई यात्रा — लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी, और एंजेला असम पहुँच जाती है। (3) नई दोस्त अनु — अनु एंजेला की हमउम्र सहेली बनती है और एंजेला असमिया भाषा सीखना चाहती है। (4) सत्रिया नृत्य — वह सत्र यानी मठ में शांत और भक्तिभरा शास्त्रीय सत्रिया नृत्य देखती है। (5) बिहू नृत्य — बिहू त्योहार में बरगद के पेड़ के नीचे वह हँसता-गाता बिहू नृत्य देखती है। (6) नई समझ — एंजेला अचंभित रह जाती है, उसे भारत के नृत्यों की समृद्ध परंपरा समझ आती है। नीचे नीली पट्टी में पाठ का संदेश है — पूरी दुनिया में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाएँ बताते हैं, और भारत के नृत्यों में विविधता होकर भी एक अपनापन है।

आइए गहराई से समझें

अब केवल “क्या हुआ” से आगे बढ़ते हैं। आइए दोनों नृत्यों को ठीक से समझें — वे कहाँ से आए, कब किए जाते हैं, और कैसे दिखते हैं।

पहले असम को थोड़ा जान लें, क्योंकि ये दोनों नृत्य वहीं के हैं। चित्र 8.2 असम का छोटा-सा परिचय देता है।

असम का परिचय
Figure 8.2 — यह चित्र असम का परिचय देता है। बीच में पीले सूरज जैसे घेरे में असम लिखा है — यह पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है। उसके चारों ओर पाँच बक्से असम की पहचान बताते हैं। ऊपर का हरा बक्सा — गुवाहाटी असम का सबसे बड़ा और प्राचीन नगर है। बाईं ओर का नीला बक्सा — असम की नृत्य परंपरा में सत्रिया और बिहू आते हैं। दाईं ओर का पीला बक्सा — यहाँ का बड़ा त्योहार बिहू है, जो साल में तीन बार आता है। नीचे बाईं ओर का बैंगनी बक्सा — यहाँ की भाषा असमिया है। नीचे दाईं ओर का नीला बक्सा — असम अपने वन्य-जीव, रेशम और चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। सबसे नीचे लिखा है कि असम अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है।

सत्रिया नृत्य

सत्रिया एक शास्त्रीय नृत्य है। याद रखिए, शास्त्रीय नृत्य का मतलब है — पुराना, नियमों वाला, गंभीर नृत्य। सत्रिया भारत के मुख्य शास्त्रीय नृत्यों में से एक है।

यह कहाँ से आया? “सत्रिया” नाम “सत्र” शब्द से बना है। सत्र असम के मठ होते हैं — पूजा-पाठ और धर्म से जुड़ी जगह। असम में ऐसे सत्रों की संख्या पाँच सौ से भी ज़्यादा है। इन्हीं सत्रों में यह नृत्य जन्मा, इसलिए इसका नाम सत्रिया पड़ा।

किसने शुरू किया? इस नृत्य को असम के महान संत शंकरदेव ने शुरू किया था। शंकरदेव बहुत पहले हुए एक संत थे, जिन्होंने धर्म और कला को लोगों तक पहुँचाया।

यह कब और क्यों किया जाता है? सत्रिया नृत्य मुख्य रूप से पूजा के समय किया जाता है। इसके ज़रिए भगवान की कथाएँ — जैसे कृष्ण की कहानियाँ — दिखाई जाती हैं। यानी यह सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, भक्ति का तरीका है।

यह कैसा दिखता है? सत्रिया नृत्य बहुत शांत और संयमित होता है। नर्तक के कदम नपे-तुले और सधे हुए होते हैं। हर हाव-भाव में एक गंभीरता और भक्ति झलकती है। यह देखने में मन को शांति देता है।

ज़रा सोचिए — सत्रिया का नाम “सत्र” से क्यों पड़ा? नीचे जाँचिए।

Concept check

सत्रिया नृत्य का नाम 'सत्रिया' क्यों पड़ा?

बिहू नृत्य

बिहू एक लोक नृत्य है। यानी आम लोगों का, गाँव-घर का नृत्य। इसे सीखने के लिए सालों की कड़ी पढ़ाई नहीं चाहिए — बस मन में उमंग चाहिए।

यह कब किया जाता है? बिहू नृत्य बिहू त्योहार के समय किया जाता है। ख़ास तौर पर बोहाग बिहू पर, जब असम में नया साल और बसंत आता है। यह फ़सल और खुशी का त्योहार है। तब लोग नाच-गाकर अपनी खुशी मनाते हैं।

यह कैसा दिखता है? बिहू नृत्य बहुत तेज़, उमंग भरा और उछलता-कूदता नृत्य है। इसमें ढोल, पेपा (एक वाद्य) और गीतों के साथ युवक-युवतियाँ मिलकर नाचते हैं। यह अक्सर खुले मैदान में, बड़े बरगद के पेड़ के नीचे किया जाता है, ताकि सबको छाया मिले और सब साथ नाच सकें।

एक मज़ेदार बात — बिहू साल में तीन बार आता है। हाँ, एक ही नाम के तीन त्योहार! आइए चित्र 8.3 में तीनों को साथ देखें।

असम के तीन बिहू त्योहार
Figure 8.3 — यह चित्र असम के तीन बिहू त्योहारों की तुलना दिखाता है, क्योंकि बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है। बायाँ हरा कार्ड — बोहाग बिहू (रोंगाली बिहू), बैसाख महीने में यानी लगभग अप्रैल में; यह नए साल और बसंत की खुशी का सबसे बड़ा बिहू है, और बिहू नृत्य इसी पर होता है। बीच का पीला कार्ड — माघ बिहू (भोगाली बिहू), माघ महीने में यानी लगभग जनवरी में; यह फ़सल कटने की खुशी और दावत का त्योहार है, इसीलिए इसे 'भोगाली' यानी खाने-पीने वाला कहते हैं। दायाँ बैंगनी कार्ड — काटी बिहू (कोंगाली बिहू), कार्तिक महीने में यानी लगभग नवंबर में; यह एक शांत बिहू है जिसमें अच्छी फ़सल की दुआ की जाती है, क्योंकि तब खेत अभी हरे होते हैं और धूमधाम कम रहती है।

मुख्य भाव — विविधता में एकता

अब सबसे ज़रूरी बात। सत्रिया और बिहू कितने अलग हैं! एक शांत-भक्तिभरा, दूसरा तेज़-खुशी भरा। फिर भी दोनों एक ही काम करते हैं — मन की बात कहना।

पाठ की एक पंक्ति यही कहती है — “पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं।” यानी रूप अलग हो सकते हैं, पर उद्देश्य एक है।

यह “विविधता में एकता” क्यों है? भारत में सत्रिया, बिहू, मणिपुरी, भरतनाट्यम — और न जाने कितने नृत्य हैं। हर एक अलग दिखता है। यही “विविधता” है। पर सबमें एक ही बात समान है — सब अपने मन की खुशी, भक्ति या दुख को नाच से कहते हैं। यही “एकता” है। चित्र 8.4 इसी संदेश को दिखाता है।

विविधता में एकता का संदेश
Figure 8.4 — यह चित्र 'विविधता में एकता' का संदेश समझाता है। ऊपर चार अलग-अलग रंग के बक्से भारत के अलग-अलग नृत्य दिखाते हैं — सत्रिया (शास्त्रीय, शांत), बिहू (लोक, उमंग भरा), मणिपुरी (कोमल, मधुर) और 'और भी कई' (हर क्षेत्र का अपना नृत्य)। चारों बक्सों से रेखाएँ नीचे एक गहरे नीले बक्से की ओर जाती हैं, जिसमें लिखा है कि इन सबका एक ही उद्देश्य है — भावनाओं को व्यक्त करना, क्योंकि पूरी दुनिया में लोग नृत्य और संगीत से अपने मन की बात कहते हैं। सबसे नीचे हरे बक्से में संदेश है — रूप अलग-अलग हैं पर दिल एक है, और यही 'विविधता में एकता' हमारे भारत की सबसे बड़ी सुंदरता है।

दोनों नृत्यों का फ़र्क एक नज़र में याद रखने के लिए, नीचे की तुलना देखिए।

बातसत्रिया नृत्यबिहू नृत्य
प्रकारशास्त्रीय (नियमों वाला)लोक (आम लोगों का)
उत्पत्तिअसम के सत्रों में; शंकरदेव ने शुरू कियाअसम के गाँवों-खेतों से
अवसरपूजा-पाठ; कृष्ण की कथाएँबिहू त्योहार; नया साल, फ़सल
भावशांत, संयमित, भक्तिभरातेज़, उमंग भरा, खुशी भरा
स्थानसत्र/मंदिर के भीतर, मंच परखुले मैदान, बरगद के पेड़ के नीचे

इस तुलना को चित्र 8.5 में और साफ़ तरीके से देखिए।

सत्रिया बनाम बिहू नृत्य की तुलना
Figure 8.5 — यह चित्र सत्रिया और बिहू नृत्य की आमने-सामने तुलना करता है। बायाँ बैंगनी कार्ड सत्रिया नृत्य का है — यह एक शास्त्रीय यानी नियमों वाला पुराना नृत्य है; इसकी उत्पत्ति असम के सत्रों (मठों) में हुई और संत शंकरदेव ने इसे शुरू किया; इसका अवसर पूजा-पाठ है, जिसमें भगवान कृष्ण की कथाएँ सुनाई जाती हैं; इसकी शैली शांत, संयमित और भक्तिभरी है, कदम सधे और नपे-तुले होते हैं; और यह सत्र या मंदिर के भीतर मंच पर किया जाता है। दायाँ लाल कार्ड बिहू नृत्य का है — यह एक लोक यानी आम लोगों का खुला नृत्य है; इसकी उत्पत्ति असम के गाँवों-खेतों से हुई; इसका अवसर बिहू त्योहार है, जो नए साल, बसंत और फ़सल की खुशी का त्योहार है; इसकी शैली तेज़, उमंग भरी और उछलती है, जिसमें हँसी-गीत-ढोल साथ होते हैं; और यह खुले मैदान में बरगद के पेड़ के नीचे किया जाता है।

आम भूलें

इस पाठ को पढ़ते समय बच्चे कुछ बातें अक्सर उलझा देते हैं। आइए उन्हें साफ़ करें।

⚠️ Common mistake
What students think

सत्रिया और बिहू एक ही नृत्य के दो नाम हैं।

Why it seems right

दोनों ही असम के नृत्य हैं और दोनों के नाम सुनने में नए लगते हैं, इसलिए लगता है कि शायद एक ही चीज़ होगी।

What actually happens

ये दो बिल्कुल अलग नृत्य हैं। सत्रिया शास्त्रीय और शांत-भक्तिभरा नृत्य है, जो सत्रों में होता है। बिहू लोक नृत्य है, जो बिहू त्योहार पर खुशी में किया जाता है।

⚠️ Common mistake
What students think

एंजेला असम की रहने वाली है।

Why it seems right

वह असम घूमती है, अनु से असमिया सीखती है और वहाँ के नृत्य देखती है, इसलिए लगता है कि वह वहीं की होगी।

What actually happens

एंजेला लंदन की रहने वाली है। वह असम के नृत्यों पर वृत्तचित्र बनाने के लिए असम आई है — वह वहाँ की मेहमान है, निवासी नहीं।

⚠️ Common mistake
What students think

बिहू त्योहार साल में सिर्फ़ एक बार आता है।

Why it seems right

हम ज़्यादातर त्योहार साल में एक ही बार मनाते हैं, इसलिए मन मान लेता है कि बिहू भी एक ही बार आता होगा।

What actually happens

बिहू साल में तीन बार आता है — बोहाग (अप्रैल), माघ (जनवरी) और काटी (नवंबर) बिहू। तीनों का अलग समय और अलग कारण है।

जाँचिए अपनी समझ

अब छोटे-छोटे सवालों से अपनी समझ परखिए।

एंजेला असम क्यों आती है?

सत्रिया नृत्य की उत्पत्ति कहाँ हुई?

बिहू नृत्य किस तरह का नृत्य है?

इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

अभ्यास (श्रेणीबद्ध)

अब अपनी समझ को लिखकर पक्का कीजिए। पहले खुद सोचिए, फिर उत्तर खोलिए।

सरल

सरल

सत्र किसे कहते हैं? असम में इनकी संख्या कितनी है?

सरल

एंजेला कहाँ की रहने वाली है और उसकी माँ का नाम क्या है?

मध्यम

मध्यम

सत्रिया और बिहू नृत्य में तीन बड़े फ़र्क बताइए।

मध्यम

नीचे दिए शब्दों के अर्थ लिखिए — वृत्तचित्र, हमउम्र, अचंभित, लजीज़, उमंग।

चुनौती

चुनौती

पाठ कहता है — 'पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं।' यह बात 'विविधता में एकता' से कैसे जुड़ती है? अपने शब्दों में समझाइए।

सारांश

  • एंजेला लंदन की लड़की है। वह और उसकी माँ एलेसेंड्रा असम के नृत्यों पर वृत्तचित्र बनाने असम आती हैं।
  • एंजेला लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी पहुँचती है, और वहाँ अपनी हमउम्र सहेली अनु से दोस्ती करती है।
  • सत्रिया एक शास्त्रीय नृत्य है। इसकी उत्पत्ति असम के सत्रों (मठों) में हुई, और इसे संत शंकरदेव ने शुरू किया। यह शांत और भक्तिभरा होता है।
  • बिहू एक लोक नृत्य है। यह बिहू त्योहार पर खुशी में, बरगद के पेड़ के नीचे, तेज़ और उमंग भरे अंदाज़ में किया जाता है।
  • बिहू साल में तीन बार आता है — बोहाग (अप्रैल), माघ (जनवरी) और काटी (नवंबर) बिहू।
  • दोनों नृत्य अलग हैं, पर दोनों का काम एक है — भावनाओं को व्यक्त करना।
  • पूरी दुनिया में लोग नृत्य और संगीत से अपने मन की बात कहते हैं।
  • भारत के अनेक नृत्यों में “विविधता में एकता” झलकती है — यही हमारी संस्कृति की सुंदरता है।

आगे क्या?

इस पाठ में हमने असम के नृत्यों के ज़रिए भक्ति और खुशी, दोनों भावनाओं को महसूस किया। सत्रिया तो भगवान कृष्ण की कथाएँ ही सुनाता है।

अगला पाठ — पाठ 9 “मैया मैं नहिं माखन खायो” — हमें सीधे बाल-कृष्ण के पास ले जाता है। यह सूरदास का एक प्यारा पद है, जिसमें नन्हा कृष्ण माखन (मक्खन) चुराकर भी मना कर देता है कि उसने नहीं खाया। वहाँ हम भक्ति और बाल-लीला के मीठे रंग में डूबेंगे।

Frequently Asked Questions

सत्रिया और बिहू नृत्य पाठ का सारांश क्या है?

इस पाठ में लंदन की एंजेला असम के नृत्यों पर वृत्तचित्र बनाने आती है। स्थानीय लड़की अनु उसे सत्रिया (शास्त्रीय नृत्य) और बिहू (लोक नृत्य) के बारे में बताती है। पाठ में भारत की सांस्कृतिक विविधता और 'विविधता में एकता' का संदेश है।

सत्रिया नृत्य क्या है?

सत्रिया असम का शास्त्रीय नृत्य है। इसे संत शंकरदेव ने असम के सत्रों (मठों) में भक्ति के रूप में शुरू किया था। यह भगवान की आराधना का एक तरीका है और इसमें हाथों और आँखों की विशेष भाव-भंगिमाएँ होती हैं।

बिहू नृत्य क्या है और इसके कितने प्रकार हैं?

बिहू असम का प्रसिद्ध लोक नृत्य है जो बिहू त्योहार पर किया जाता है। असम में साल में तीन बिहू मनाए जाते हैं — बोहाग बिहू (वसंत में), काटी बिहू (फसल कटाई पर) और माघ बिहू (सर्दियों में)।

सत्रिया और बिहू नृत्य में क्या अंतर है?

सत्रिया एक शास्त्रीय (classical) नृत्य है जो मंदिरों और मठों में भक्ति के लिए किया जाता था, जबकि बिहू एक लोक (folk) नृत्य है जो त्योहारों पर आम लोग मिलकर खुशी से करते हैं।

इस पाठ से हमें विविधता के बारे में क्या सीख मिलती है?

इस पाठ से सीख मिलती है कि भारत में अलग-अलग राज्यों की अपनी अनूठी नृत्य-संगीत परंपराएँ हैं, फिर भी हम सब एक हैं। यही 'विविधता में एकता' है जो भारत को खास बनाती है।