मातृभूमि
इस पाठ का महत्व
ज़रा सोचिए। आपका घर कैसा है? जहाँ आप रहते हैं, वह जगह आपको कैसी लगती है?
हम सबको अपना घर बहुत प्यारा लगता है। वहाँ हम सुरक्षित महसूस करते हैं। वहाँ हमारा मन खुश रहता है।
अब इसी बात को थोड़ा बड़ा करके सोचिए। हमारा घर एक गाँव या शहर में है। वह गाँव या शहर एक राज्य में है। और वह राज्य हमारे देश — भारत — में है।
यह पूरा देश, यह पूरी धरती, हमारी मातृभूमि है। “मातृभूमि” का अर्थ है — माँ जैसी भूमि। जैसे माँ हमें पालती है, वैसे ही यह भूमि हमें अन्न देती है, पानी देती है, रहने की जगह देती है।
यह कविता हमें यही सिखाती है। यह हमारी मातृभूमि की सुंदरता दिखाती है। और यह बताती है कि हमें अपने देश से इतना प्यार क्यों होता है। पढ़ने के बाद आपको अपना देश और भी अपना लगेगा।
मूल भाव
इस कविता का मूल भाव है — हमारी मातृभूमि बहुत सुंदर है, और वह माँ की तरह हमें बहुत कुछ देती है। कवि हमें इस भूमि के ऊँचे पर्वत, बहती नदियाँ, हरे-भरे खेत और प्यारे दृश्य दिखाते हैं। यह सब देखकर हमारे मन में अपने देश के लिए प्रेम और गर्व जागता है। यही प्रेम देशप्रेम कहलाता है।
📖 मूल पाठ कहाँ पढ़ें: इस पृष्ठ पर हमने कविता का सरल अर्थ और व्याख्या दी है। पूरी मूल कविता अपनी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “मल्हार” (कक्षा 6) में पढ़ें, और इस व्याख्या के साथ मिलाकर समझें।
कविता का भावार्थ
आइए अब कविता का भाव धीरे-धीरे, एक-एक विचार करके समझते हैं। हम मूल पंक्तियाँ नहीं दोहराएँगे, बस उनका सरल अर्थ बताएँगे।
कवि सबसे पहले कहते हैं — यह भूमि मेरी जन्मभूमि है, यह मेरी मातृभूमि है। “जन्मभूमि” यानी वह भूमि जहाँ हमने जन्म लिया। कवि इसे माँ के समान मानते हैं। इसलिए उन्हें यह भूमि बहुत प्यारी लगती है।
फिर कवि इस भूमि की सुंदरता का वर्णन करते हैं।
वे कहते हैं — यहाँ ऊँचे-ऊँचे पर्वत हैं। ये पर्वत इतने ऊँचे हैं कि लगता है मानो वे आकाश को छू रहे हों। पहाड़ों की यह ऊँचाई देखकर मन गर्व से भर जाता है।
इसके बाद कवि नदियों की बात करते हैं। हमारे देश में गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ पहाड़ों से निकलकर खेतों तक पानी पहुँचाती हैं। इन्हीं नदियों से खेत हरे-भरे रहते हैं।
कवि खेतों का भी सुंदर चित्र खींचते हैं। दूर तक फैले हरे-भरे खेत बहुत मनभावन लगते हैं। इन्हीं खेतों में अन्न उगता है, जिससे हमारा पेट भरता है।
नीचे दिया गया चित्र इसी पूरे दृश्य को एक साथ दिखाता है।
कवि बताते हैं कि यहाँ आम के घने बाग (अमराइयाँ) हैं। इन बागों में कोयल बैठकर मीठी आवाज़ में गाती है। उसकी “कुहू-कुहू” सुनकर मन खुश हो जाता है।
फिर कवि हवा (पवन) की बात करते हैं। यहाँ ठंडी, सुगंधित हवा बहती है। यह हवा हमारे तन और मन — दोनों को ताज़ा कर देती है। थकान मिटा देती है।
अंत में कवि कहते हैं कि यह भूमि बहुत पवित्र है। यहीं श्रीकृष्ण ने बाँसुरी बजाई और गीता का पवित्र संदेश दिया। ऐसी महान और सुंदर भूमि पर जन्म लेकर कवि को बहुत गर्व है।
तो पूरी कविता का सार यह है — मातृभूमि सुंदर भी है और पवित्र भी। वह हमें बहुत कुछ देती है। इसलिए हमें उससे सच्चा प्यार करना चाहिए।
आइए गहराई से समझें
अब कविता के पीछे छिपी बातों को थोड़ा गहराई से देखते हैं। हम समझेंगे कि कवि क्या कहना चाहते हैं, और क्यों कहना चाहते हैं।
मुख्य भाव — देशप्रेम
इस कविता का सबसे बड़ा भाव है — देशप्रेम। देशप्रेम यानी अपने देश से प्यार। यह केवल एक शब्द नहीं है। यह कई छोटे-छोटे भावों से मिलकर बनता है।
जब हम अपने देश की सुंदरता देखते हैं, तो हमारे मन में चार तरह के भाव जागते हैं। नीचे का भाव-जाल इन्हें एक साथ दिखाता है।
चित्र 1.2 से साफ़ है कि देशप्रेम सिर्फ़ “मुझे मेरा देश अच्छा लगता है” कहना नहीं है। उसमें गर्व भी है, आभार भी, अपनापन भी, और देश के लिए कुछ करने का भाव भी।
काव्य-सौंदर्य और भाषा
अब देखते हैं कि कवि ने इन भावों को इतना सुंदर कैसे बना दिया।
सबसे पहले एक छोटा शब्द समझ लें, जो आगे काम आएगा।
इस कविता का काव्य-सौंदर्य तीन बातों से बनता है:
1. सुंदर शब्द-चित्र। कवि शब्दों से चित्र बनाते हैं। “पर्वत आकाश छू रहे हैं”, “खेत हरे-भरे हैं” — ये पढ़ते ही हमारी आँखों के सामने दृश्य दिखने लगता है। इसे शब्द-चित्र कहते हैं।
2. तुक (rhyme)। कविता की पंक्तियों के अंत में मिलते-जुलते शब्द आते हैं, जैसे “मेरी… मेरी”। इससे कविता गाने जैसी लगती है। पढ़ने में मज़ा आता है।
3. मानवीकरण। कवि कोयल को गाते हुए, हवा को तन-मन सँवारते हुए दिखाते हैं। यानी निर्जीव या पशु-पक्षी को इंसान जैसा दिखाना। इसे मानवीकरण कहते हैं। उदाहरण — “हवा तन-मन सँवारती है”, मानो हवा कोई सेवा करने वाली हो।
“नथिंग इज़ ए गिवन” — क्यों जागता है यह प्रेम?
यहाँ एक बहुत ज़रूरी सवाल है। कविता कहती है कि कवि को अपनी भूमि से बहुत प्रेम है। पर क्यों? सिर्फ़ इसलिए कि वह सुंदर है?
नहीं, सिर्फ़ इतना नहीं। असली कारण यह है — यह भूमि माँ की तरह हमें बहुत कुछ देती है, बदले में कुछ माँगती नहीं।
ज़रा सोचिए। आपकी रोटी कहाँ से आई? खेत से। पानी कहाँ से आया? नदी से। आप जिस घर में रहते हैं, उसकी मिट्टी, ईंट, लकड़ी — सब इसी भूमि से। नीचे का चित्र यही दिखाता है।
चित्र 1.3 हमारे सवाल का जवाब दे देता है। जब कोई हमें इतना सब कुछ बिना माँगे देता है, तो हमारे मन में अपने आप उसके लिए प्रेम और आभार जागता है। माँ के लिए भी हमारा प्रेम इसी वजह से होता है — वह हमें बिना शर्त बहुत कुछ देती है। इसीलिए भूमि को “मातृभूमि” यानी “माँ जैसी भूमि” कहा गया है।
एक छोटी जाँच करते हैं, ताकि यह बात पक्की हो जाए।
कवि अपनी भूमि को 'माँ' (मातृभूमि) क्यों कहते हैं?
क्योंकि भूमि भी माँ की तरह हमें बिना माँगे बहुत कुछ देती है — अन्न, पानी, फल और रहने की जगह। माँ की तरह वह हमारा पालन-पोषण करती है। इसलिए हम उससे प्रेम करते हैं और उसे “मातृभूमि” कहते हैं।
आम भूलें
कुछ बातें ऐसी हैं जिनमें बच्चे अक्सर उलझ जाते हैं। आइए इन्हें साफ़ कर लें, ताकि आप ये भूलें न करें।
मातृभूमि का मतलब सिर्फ़ वह घर या गाँव है जहाँ मैं रहता हूँ।
ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि हम सबसे ज़्यादा प्यार अपने घर और गाँव से करते हैं, और वही हमें सबसे अपना लगता है।
मातृभूमि का अर्थ है हमारा पूरा देश — उसके सारे पर्वत, नदियाँ, खेत और लोग। घर और गाँव इसी बड़ी मातृभूमि का एक छोटा हिस्सा हैं।
यह कविता सिर्फ़ पहाड़ों और नदियों के बारे में बता रही है, इसमें कोई भाव नहीं है।
ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि कविता में बार-बार पर्वत, नदी, खेत जैसी चीज़ों के नाम आते हैं, तो लगता है यह बस वर्णन है।
कविता इन चीज़ों के बहाने एक भाव दिखा रही है — देशप्रेम। सुंदरता तो बस ज़रिया है, असली बात है देश के लिए प्रेम और गर्व जगाना।
'मानवीकरण' का मतलब है किसी इंसान के बारे में लिखना।
ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि शब्द में 'मानव' (इंसान) आता है, तो लगता है बात इंसान की हो रही है।
मानवीकरण का अर्थ है — किसी निर्जीव चीज़ या पशु-पक्षी को इंसान जैसा दिखाना। जैसे हवा को 'सँवारते' हुए दिखाना, मानो वह इंसान हो।
जाँचिए अपनी समझ
अब अपनी समझ परखते हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़िए और सही विकल्प चुनिए।
'मातृभूमि' शब्द का सही अर्थ क्या है?
“मातृ” यानी माँ और “भूमि” यानी ज़मीन। मातृभूमि यानी माँ जैसी भूमि — हमारा अपना देश, जो माँ की तरह हमें पालता है।
कविता में 'अमराइयाँ' किसे कहा गया है?
“अमराई” का अर्थ है आम के पेड़ों का घना बाग। इन्हीं बागों में कोयल बैठकर मीठा गाती है।
कवि के मन में अपनी भूमि के लिए प्रेम क्यों जागता है?
भूमि माँ की तरह हमें अन्न, पानी और आश्रय देती है, और बहुत सुंदर भी है। यही देखकर मन में आभार और प्रेम जागता है।
'हवा तन-मन सँवारती है' — इस पंक्ति में कौन-सा काव्य-गुण है?
यहाँ हवा को इंसान की तरह ‘सँवारते’ हुए दिखाया गया है, मानो वह कोई सेवा करने वाली हो। निर्जीव को इंसान जैसा दिखाना ही मानवीकरण है।
अभ्यास (श्रेणीबद्ध)
अब थोड़ा अभ्यास करते हैं। पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।
सरल
कविता में मातृभूमि की सुंदरता दिखाने के लिए किन-किन चीज़ों का नाम लिया गया है? कोई चार लिखिए।
कविता में मातृभूमि की सुंदरता इन चीज़ों से दिखाई गई है:
- ऊँचे पर्वत — जो आकाश को छूते दिखते हैं।
- बहती नदियाँ — जो खेतों तक पानी पहुँचाती हैं।
- हरे-भरे खेत — जहाँ अन्न उगता है।
- आम के बाग (अमराइयाँ) — जहाँ कोयल मीठा गाती है।
(इनके अलावा सुगंधित हवा और सूरज का भी ज़िक्र है।)
शब्दार्थ लिखिए: (क) मातृभूमि (ख) अमराई (ग) पवन (घ) जन्मभूमि।
- मातृभूमि — माँ के समान भूमि; अपना देश।
- अमराई — आम के पेड़ों का घना बाग।
- पवन — हवा।
- जन्मभूमि — वह भूमि जहाँ हमने जन्म लिया।
मध्यम
कवि अपने देश की भूमि को 'माँ' क्यों कहते हैं? अपने शब्दों में समझाइए।
कवि भूमि को ‘माँ’ इसलिए कहते हैं, क्योंकि भूमि भी ठीक माँ की तरह व्यवहार करती है।
- माँ हमें भोजन देती है — भूमि हमें खेतों से अन्न देती है।
- माँ हमारी देखभाल करती है — भूमि हमें पानी, फल और रहने की जगह देती है।
- माँ बदले में कुछ नहीं माँगती — भूमि भी बिना शर्त हमें सब कुछ देती है।
इसलिए कवि को भूमि माँ जैसी लगती है, और वे उसे प्यार से “मातृभूमि” कहते हैं।
'मानवीकरण' किसे कहते हैं? इस कविता से एक उदाहरण देकर समझाइए।
मानवीकरण का अर्थ है — किसी निर्जीव चीज़ या पशु-पक्षी को इंसान जैसा दिखाना, यानी उसे इंसान जैसे काम करते दिखाना।
इस कविता में उदाहरण है — “हवा तन-मन सँवारती है।” यहाँ हवा को इंसान की तरह दिखाया गया है, जो हमारे तन और मन को सँवारती (ठीक करती) है। हवा तो निर्जीव है, फिर भी वह ‘सँवारने’ का काम करती दिखती है। यही मानवीकरण है।
चुनौती
यह कविता हमें अपने देश के बारे में क्या सिखाती है? और इस सीख को हम अपने जीवन में कैसे अपना सकते हैं?
कविता की सीख: यह कविता सिखाती है कि हमारी मातृभूमि बहुत सुंदर है और वह माँ की तरह हमें बहुत कुछ देती है। इसलिए हमें अपने देश से सच्चा प्रेम और गर्व करना चाहिए।
नीचे का चित्र इसी मुख्य संदेश को क्रम से दिखाता है।
हम जीवन में इसे कैसे अपनाएँ:
- अपने आस-पास सफ़ाई रखें — कूड़ा सड़क पर न फेंकें।
- पानी और बिजली बर्बाद न करें, क्योंकि ये देश के संसाधन हैं।
- पेड़-पौधे लगाएँ और उनकी देखभाल करें।
- मन लगाकर पढ़ें, ताकि बड़े होकर देश के काम आ सकें।
इस तरह हम सिर्फ़ कहकर नहीं, बल्कि करके अपनी मातृभूमि से प्रेम दिखा सकते हैं।
सारांश
- “मातृभूमि” का अर्थ है माँ के समान भूमि, यानी हमारा अपना देश।
- कविता हमारी मातृभूमि की सुंदरता दिखाती है — ऊँचे पर्वत, बहती नदियाँ, हरे-भरे खेत और आम के बाग।
- आम के बागों (अमराइयों) में कोयल मीठा गाती है, और सुगंधित हवा तन-मन को ताज़ा करती है।
- यह भूमि पवित्र भी है — यहीं श्रीकृष्ण ने बाँसुरी बजाई और गीता का संदेश दिया।
- कवि भूमि को ‘माँ’ इसलिए कहते हैं, क्योंकि वह बिना माँगे हमें अन्न, पानी और आश्रय देती है।
- कविता का मुख्य भाव है देशप्रेम — जिसमें गर्व, आभार, अपनापन और सेवा का भाव शामिल है।
- कविता का काव्य-सौंदर्य बनता है — सुंदर शब्द-चित्र, तुक और मानवीकरण से।
- सच्चा देशप्रेम सिर्फ़ कहने से नहीं, बल्कि देश के लिए अच्छे काम करने से दिखता है।
आगे क्या?
मातृभूमि से प्रेम जगाने के बाद, अगला पाठ हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। अगला पाठ है पाठ 2 — “गोल”। यह एक प्रेरणादायक कहानी है, जो हमें सिखाती है कि मेहनत और लगन से कैसे एक लक्ष्य (गोल) पाया जाता है। जैसे हम अपने देश से प्रेम करते हैं, वैसे ही हमें अपने जीवन में भी एक लक्ष्य तय करके उसे पाने के लिए जुट जाना चाहिए।
Frequently Asked Questions
मातृभूमि कविता का सारांश क्या है?
इस कविता में कवि अपनी मातृभूमि की सुंदरता का वर्णन करता है — ऊँचे पर्वत, बहती नदियाँ, हरे-भरे खेत, आम के बाग और कोयल की मीठी आवाज़। कवि को अपनी इस धरती पर बहुत गर्व है और वह इसे माँ के समान प्यारी मानता है।
मातृभूमि कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश है कि हमें अपनी मातृभूमि से प्यार करना चाहिए। जैसे माँ हमारा पालन-पोषण करती है, वैसे ही यह धरती हमें अन्न, जल और जीवन देती है। इसलिए इसका सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
मातृभूमि कविता में किन-किन चीज़ों का वर्णन है?
कविता में हिमालय के पर्वतों, पवित्र नदियों, हरे-भरे खेतों, आम के बागों और कोयल की आवाज़ का वर्णन है। साथ ही श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों की इस भूमि पर जन्म लेने का भी ज़िक्र है।
मातृभूमि को 'माँ' क्यों कहा जाता है?
जैसे माँ अपने बच्चे को जन्म देकर उसका पालन-पोषण करती है, उसी तरह यह धरती हमें अन्न, पानी और जीवन देती है। इसलिए हमारी संस्कृति में धरती को 'धरती माँ' या 'मातृभूमि' कहा जाता है।
मातृभूमि कविता के कवि कौन हैं?
यह कविता कक्षा 6 हिंदी 'मल्हार' पाठ्यपुस्तक का पहला पाठ है। इसमें भारत की प्राकृतिक सुंदरता और देशप्रेम का भाव व्यक्त किया गया है।