हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान
इस पाठ का महत्व
ज़रा सोचिए। आपका कोई दोस्त बहुत दूर किसी दूसरे देश में जाकर बस जाए। कई साल बीत जाएँ। क्या वह अपनी भाषा, अपने त्योहार और अपने खाने को भूल जाएगा? या उन्हें अपने साथ ले जाएगा?
यह पाठ ठीक ऐसी ही एक हैरान कर देने वाली बात बताता है। भारत से बहुत-बहुत दूर, हिंद महासागर के बीच एक छोटा-सा द्वीप है। द्वीप का मतलब है — चारों ओर पानी से घिरी ज़मीन, जैसे समुद्र में तैरता एक टुकड़ा। इस द्वीप का नाम है मॉरिशस।
मॉरिशस भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर है। फिर भी वहाँ जाकर ऐसा लगता है जैसे आप भारत के ही किसी गाँव में आ गए हों। वहाँ लोग हिंदी और भोजपुरी बोलते हैं। वहाँ शिव के मंदिर हैं। वहाँ शिवरात्रि का बड़ा मेला लगता है। वहाँ की जगहों के नाम तक काशी, बनारस और गोकुल जैसे हैं।
इसीलिए इस पाठ का नाम है — “हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान”। यह पाठ हमें एक सुंदर बात सिखाता है — इंसान कितनी भी दूर चला जाए, अगर वह चाहे तो अपनी जड़ों से, अपनी संस्कृति से जुड़ा रह सकता है।
मूल भाव
इस पाठ का मूल भाव है — अपनी जड़ों से प्यार। भारत से जो लोग बहुत पहले मॉरिशस गए, वे गरीब मज़दूर थे। उन्होंने वहाँ बहुत कष्ट सहे। पर उन्होंने अपनी भाषा, अपना धर्म और अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी। उन्होंने उस दूर के द्वीप को ही “छोटा-सा हिंदुस्तान” बना दिया। यह पाठ बताता है कि सच्ची संस्कृति दिल में होती है — उसे कोई दूरी मिटा नहीं सकती।
📖 मूल पाठ कहाँ पढ़ें: इस पृष्ठ पर हमने पाठ का सार और व्याख्या दी है। पूरा मूल पाठ अपनी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “मल्हार” (कक्षा 6) में पढ़ें, और इस व्याख्या के साथ मिलाकर समझें।
पाठ का सार
इस पाठ के लेखक हैं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’। राष्ट्रकवि का मतलब है — पूरे देश का कवि, जिसे देश बहुत सम्मान देता है। एक बार दिनकर जी मॉरिशस की यात्रा पर गए। वहाँ जो उन्होंने देखा, उसे ही उन्होंने इस पाठ में लिखा है। आइए पूरी बात क्रम से, सरल भाषा में समझते हैं।
दिनकर जी की यात्रा। दिनकर जी दिल्ली से चले। पहले वे बंबई (मुंबई) पहुँचे। फिर वहाँ से एक हवाई जहाज़ से वे अफ़्रीका के शहर नैरोबी पहुँचे। नैरोबी से उन्हें मॉरिशस के लिए जहाज़ पकड़ना था। पर बीच में उन्हें नैरोबी में एक दिन रुकना पड़ा।
नैरोबी का जंगल। नैरोबी में दिनकर जी एक मशहूर नेशनल पार्क देखने गए। नेशनल पार्क एक बहुत बड़ा, खुला जंगल होता है, जहाँ जानवर पिंजरे में नहीं, बल्कि आज़ाद घूमते हैं। वहाँ उन्होंने शेर, हिरन और जिराफ़ देखे। शेर इतने बेपरवाह थे कि उन्होंने मोटर में बैठे लोगों की ओर देखा तक नहीं। यह दृश्य देखकर दिनकर जी को बड़ा अचंभा हुआ। फिर वे नैरोबी से हवाई जहाज़ पकड़कर मॉरिशस की ओर चल पड़े। पाँच घंटे की उड़ान के बाद, रात के लगभग दस बजे, वे मॉरिशस पहुँचे।
मॉरिशस — छोटा-सा हिंदुस्तान। अब दिनकर जी असली मॉरिशस का हाल बताते हैं। मॉरिशस एक छोटा-सा द्वीप है। यह इतना छोटा है कि इसका कोई भी हिस्सा समुद्र से पंद्रह मील से ज़्यादा दूर नहीं है। पर यहाँ की सबसे खास बात है यहाँ के लोग। मॉरिशस की कुल आबादी में से लगभग 67 प्रतिशत लोग भारतीय खानदान के हैं। यानी उनके पुरखे (पूर्वज) भारत से आए थे। और इनमें से 53 प्रतिशत लोग हिंदू हैं।
भारतीय वहाँ कैसे पहुँचे। बहुत साल पहले, भारत के बहुत-से गरीब लोग मज़दूरी करने मॉरिशस गए। ये ज़्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश से थे। वहाँ उन्हें बहुत कष्ट सहने पड़े — कड़ी मेहनत और अत्याचार के दिन देखने पड़े। कुछ लोगों ने उन्हें लालच भी दिया कि वे अपना धर्म बदल लें। पर भारतीयों ने वह लालच ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे। उन्होंने अपनी भाषा, अपने रीति-रिवाज़ और अपनी संस्कृति को कसकर पकड़े रखा। इसी मेहनत और लगन से उन्होंने उस द्वीप को “छोटा-सा हिंदुस्तान” बना दिया।
मॉरिशस में भारत की झलक। मॉरिशस की राजधानी (मुख्य शहर) है पोर्ट लुई। वहाँ की गलियों के नाम तक भारत के शहरों जैसे हैं — कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बंबई। एक पूरे मोहल्ले का नाम तो काशी है। वहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है। ज़्यादातर लोग भोजपुरी और हिंदी बोलते हैं। वहाँ की राजभाषा अंग्रेज़ी है, पर लोग आपस में क्रेओल भी बोलते हैं (यह एक भाषा है जो फ्रेंच से बनी है)। मॉरिशस की असली ताकत यहाँ के भारतीय लोग ही हैं, क्योंकि ऊख (गन्ने) की खेती — जो वहाँ का सबसे बड़ा काम है — उसे भारतीयों ने ही सफल बनाया।
शिवरात्रि का मेला। मॉरिशस के लगभग हर बड़े गाँव में एक शिव मंदिर है। ये मंदिर बहुत साफ़-सुथरे और सुंदर हैं। लोग वहाँ रामचरितमानस (तुलसीदास की रामायण) का पाठ करते हैं और ढोलक-झाँझ बजाकर भजन गाते हैं। वहाँ का सबसे बड़ा त्योहार है शिवरात्रि। यह एक पवित्र झील परी-तालाब के पास मनाया जाता है। शिवरात्रि के दिन लोग उजली धोती, कुरता और गांधी टोपी पहनते हैं, और काँवड़ लेकर परी-तालाब जाते हैं — ठीक वैसे ही जैसे भारत में लोग गंगाजल लेने जाते हैं।
आइए गहराई से समझें
अब “क्या हुआ” से आगे बढ़कर “ऐसा क्यों है” समझते हैं। यही इस पाठ की असली गहराई है।
मॉरिशस कहाँ है और भारत से उसका नाता
सबसे पहले यह समझ लें कि मॉरिशस है कहाँ। यह भारत से बहुत दूर, हिंद महासागर के बीच एक नन्हा-सा द्वीप है। नीचे चित्र 12.1 में देखिए कि यह भारत से कितनी दूर पड़ता है।
अब एक ज़रूरी सवाल। मॉरिशस भारत से इतनी दूर है, फिर भी वहाँ इतने भारतीय कैसे पहुँचे? इसका जवाब पाठ में छिपा है। चित्र 12.2 में यह पूरी कहानी क्रम से देखिए।
भारतीय लोग जब मॉरिशस में कष्ट सह रहे थे, तब किसी ने उन्हें धर्म बदलने का लालच दिया। उन्होंने क्या किया, और इससे उनके बारे में क्या पता चलता है?
उन्होंने वह लालच ठुकरा दिया — यानी मना कर दिया। उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला। इससे पता चलता है कि वे अपनी संस्कृति और अपनी पहचान से बहुत प्यार करते थे। कष्ट सहना मंज़ूर था, पर अपनी जड़ें छोड़ना मंज़ूर नहीं था। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
भाषा, त्योहार, खान-पान और संस्कृति
अब देखते हैं कि भारत की कौन-कौन सी चीज़ें मॉरिशस तक पहुँचीं। चित्र 12.3 में चारों बातें एक साथ देखिए।
मॉरिशस का सबसे बड़ा त्योहार शिवरात्रि है। इसे समझने के लिए चित्र 12.4 का दृश्य देखिए।
मुख्य भाव — दूर रहकर भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना
अब आते हैं पाठ की सबसे गहरी बात पर। यह पाठ सिर्फ़ एक यात्रा का वर्णन नहीं है। यह एक बड़ी सीख देता है। चित्र 12.5 में इस मुख्य भाव को एक नज़र में देखिए।
मॉरिशस गए भारतीयों के पास बहुत कुछ नहीं था। वे गरीब थे। वे एक अनजान देश में थे। फिर भी उन्होंने एक चीज़ नहीं खोई — अपनी संस्कृति। यही इस पाठ का दिल है।
क्यों यह इतनी बड़ी बात है? सोचिए — जब इंसान मुश्किल में होता है, तो सबसे आसान होता है हार मान लेना। धर्म बदलने का लालच मिले, तो उसे मान लेना आसान था। अपनी भाषा छोड़कर वहाँ की भाषा अपना लेना आसान था। पर उन्होंने मुश्किल रास्ता चुना। उन्होंने अपनी पहचान बचाई। यही उन्हें खास बनाता है। और इसी वजह से दिनकर जी कहते हैं कि यह ऐसी सफलता है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
अब भारत और मॉरिशस की समानताओं को एक साथ देखते हैं। नीचे दी गई तालिका यह साफ़ दिखाती है।
| बात | भारत में | मॉरिशस में |
|---|---|---|
| भाषा | हिंदी और भोजपुरी | हिंदी और भोजपुरी (और क्रेओल) |
| बड़ा त्योहार | शिवरात्रि, मंदिरों में पूजा | शिवरात्रि, परी-तालाब का मेला |
| पवित्र जल | गंगाजल लेने जाते हैं | परी-तालाब का जल लाते हैं |
| धर्म-ग्रंथ | रामचरितमानस का पाठ | रामचरितमानस का पाठ |
| जगहों के नाम | काशी, बनारस, गोकुल | काशी, बनारस, गोकुल जैसे नाम |
इस तालिका को देखकर साफ़ है — मॉरिशस में लगभग वही सब है जो भारत में है। बस यह भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर समुद्र के बीच बसा है। इसीलिए इसे “छोटा-सा हिंदुस्तान” कहना बिल्कुल सही है।
आम भूलें
इस पाठ को पढ़ते समय कुछ बातें आसानी से उलझा देती हैं। नीचे दी गई भूलों पर ध्यान दीजिए, ताकि आप इन्हें न दोहराएँ।
मॉरिशस भारत का ही एक हिस्सा या एक राज्य है।
चूँकि वहाँ ज़्यादातर लोग भारतीय हैं, हिंदी-भोजपुरी बोलते हैं और भारत जैसे त्योहार मनाते हैं, इसलिए लगता है कि यह भारत का ही कोई कोना होगा।
मॉरिशस भारत का हिस्सा नहीं है। यह एक अलग, आज़ाद देश है, जो हिंद महासागर में बहुत दूर एक द्वीप पर बसा है। वहाँ भारतीय संस्कृति इसलिए दिखती है क्योंकि बहुत पहले भारत से लोग जाकर वहाँ बसे थे।
भारतीय लोग मॉरिशस घूमने या छुट्टी मनाने गए थे।
आज मॉरिशस एक सुंदर घूमने की जगह है, इसलिए लगता है कि शुरू में भी लोग शौक से वहाँ गए होंगे।
जो भारतीय बहुत पहले मॉरिशस गए, वे घूमने नहीं, बल्कि मज़दूरी (काम) करने गए थे। वे गरीब थे और वहाँ उन्होंने बहुत कष्ट और अत्याचार सहे।
मॉरिशस को छोटा-सा हिंदुस्तान सिर्फ़ इसलिए कहते हैं क्योंकि वह आकार में छोटा है।
'छोटा-सा' शब्द सुनकर लगता है कि बात सिर्फ़ द्वीप के छोटे आकार की हो रही है।
'छोटा-सा हिंदुस्तान' कहने का असली कारण आकार नहीं है। कारण यह है कि वहाँ की भाषा, त्योहार, धर्म और संस्कृति भारत जैसी ही है — मानो भारत का एक छोटा रूप वहाँ बस गया हो।
जाँचिए अपनी समझ
अब तक जो पढ़ा, उसे एक बार परख लेते हैं। हर प्रश्न के नीचे उत्तर का कारण भी दिया गया है।
इस पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं। उन्होंने मॉरिशस की यात्रा की और वहाँ जो देखा, उसे इस पाठ में लिखा।
मॉरिशस को 'छोटा-सा हिंदुस्तान' क्यों कहा जाता है?
मॉरिशस को छोटा-सा हिंदुस्तान इसलिए कहते हैं क्योंकि वहाँ ज़्यादातर लोग भारतीय हैं, हिंदी-भोजपुरी बोलते हैं, शिवरात्रि मनाते हैं और जगहों के नाम तक भारत जैसे हैं। यानी वहाँ भारत की पूरी झलक मिलती है।
मॉरिशस का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार कौन-सा है?
मॉरिशस का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार शिवरात्रि है। इस दिन लोग उजली धोती और गांधी टोपी पहनकर, काँवड़ लेकर पवित्र परी-तालाब जाते हैं।
जब भारतीयों को धर्म बदलने का लालच दिया गया, तो उन्होंने क्या किया?
भारतीयों ने वह लालच ठुकरा दिया। उन्होंने अपना धर्म, अपनी भाषा और अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी, और इसी पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
अभ्यास (श्रेणीबद्ध)
अब कुछ सवाल खुद हल करने की कोशिश कीजिए। पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” दबाकर मिलाइए।
सरल
मॉरिशस किस महासागर में स्थित है, और इस पाठ के लेखक कौन हैं?
मॉरिशस हिंद महासागर में स्थित एक छोटा-सा द्वीप है। इस पाठ के लेखक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं।
मॉरिशस के लोग कौन-कौन सी भाषाएँ बोलते हैं?
मॉरिशस के ज़्यादातर लोग हिंदी और भोजपुरी बोलते हैं। वहाँ की राजभाषा (सरकारी भाषा) अंग्रेज़ी है। इसके अलावा लोग आपस में क्रेओल भी बोलते हैं, जो फ्रेंच से बनी एक भाषा है।
मध्यम
भारतीय लोग मॉरिशस कैसे और किसलिए पहुँचे थे? वे भारत के किन हिस्सों से गए थे?
बहुत साल पहले, भारत के बहुत-से गरीब लोग मज़दूरी (काम) करने के लिए मॉरिशस गए थे। वे घूमने नहीं, बल्कि रोज़ी-रोटी कमाने गए थे। ये लोग ज़्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश से थे। वहाँ पहुँचकर उन्होंने बहुत कड़ी मेहनत की और कई अत्याचार भी सहे। फिर भी उन्होंने अपनी संस्कृति को बचाए रखा।
मॉरिशस में शिवरात्रि का त्योहार कैसे मनाया जाता है? इसकी भारत से क्या समानता है?
मॉरिशस में शिवरात्रि सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन लोग उजली धोती, कुरता और गांधी टोपी पहनते हैं। वे काँवड़ लेकर एक पवित्र झील परी-तालाब जाते हैं और वहाँ से जल लाते हैं।
इसकी भारत से समानता यह है कि जैसे भारत में लोग गंगाजल लेने जाते हैं, वैसे ही मॉरिशस के लोग परी-तालाब का जल लाते हैं। दोनों जगह श्रद्धा और भक्ति का यही रूप है।
चुनौती
दिनकर जी कहते हैं कि मॉरिशस के भारतीयों ने जो किया, उस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। वे ऐसा क्यों कहते हैं? अपने शब्दों में समझाइए।
दिनकर जी ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि मॉरिशस गए भारतीयों ने बहुत कठिन हालात में भी अपनी संस्कृति को बचाए रखा।
- वे गरीब थे और एक अनजान देश में मज़दूरी करने गए थे।
- वहाँ उन्होंने बहुत अत्याचार और कष्ट सहे।
- उन्हें धर्म बदलने का लालच दिया गया, पर उन्होंने वह ठुकरा दिया।
- वे अपनी भाषा, अपने धर्म और अपने रीति-रिवाज़ पर डटे रहे।
- और तो और, उन्होंने उस दूर के द्वीप को ही “छोटा-सा हिंदुस्तान” बना दिया।
इतनी मुश्किलों में अपनी पहचान न खोना बहुत बड़ी बात है। यही कारण है कि दिनकर जी इसे ऐसी सफलता मानते हैं, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
शब्दार्थ लिखिए — (क) द्वीप (ख) राजधानी (ग) प्रलोभन (घ) श्रद्धालु (ङ) राजभाषा
- (क) द्वीप — चारों ओर पानी से घिरी ज़मीन का टुकड़ा। जैसे मॉरिशस समुद्र के बीच एक द्वीप है।
- (ख) राजधानी — किसी देश या राज्य का मुख्य शहर, जहाँ से सरकार चलती है। मॉरिशस की राजधानी पोर्ट लुई है।
- (ग) प्रलोभन — किसी को बहकाने या ललचाने वाली बात; लालच। भारतीयों को धर्म बदलने का प्रलोभन दिया गया।
- (घ) श्रद्धालु — श्रद्धा (भक्ति) रखने वाला व्यक्ति; भक्त। शिवरात्रि पर श्रद्धालु परी-तालाब जाते हैं।
- (ङ) राजभाषा — किसी देश की सरकारी कामकाज की भाषा। मॉरिशस की राजभाषा अंग्रेज़ी है।
सारांश
- इस पाठ के लेखक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं, जिन्होंने मॉरिशस की यात्रा की।
- मॉरिशस हिंद महासागर में भारत से बहुत दूर बसा एक छोटा-सा द्वीप है।
- वहाँ की लगभग 67 प्रतिशत आबादी भारतीय खानदान की है; ज़्यादातर लोग बिहार और उत्तर प्रदेश के पुरखों से जुड़े हैं।
- भारतीय बहुत पहले वहाँ मज़दूरी करने गए थे; उन्होंने अत्याचार सहे, पर धर्म बदलने का लालच ठुकरा दिया।
- वहाँ लोग हिंदी और भोजपुरी बोलते हैं; राजधानी पोर्ट लुई की गलियों के नाम तक भारत जैसे हैं — काशी, बनारस, गोकुल, कलकत्ता।
- वहाँ शिव मंदिर हैं, रामचरितमानस का पाठ होता है, और सबसे बड़ा त्योहार शिवरात्रि परी-तालाब के पास मनाया जाता है।
- पाठ का मुख्य भाव है — दूर रहकर भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
आगे क्या?
इस पाठ में हमने देखा कि इंसान किस तरह अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रह सकता है। अगले पाठ पाठ 13 — “पेड़ की बात” में हम प्रकृति से अपने जुड़ाव की बात करेंगे — पेड़ हमें क्या-क्या देते हैं और हमारा उनसे कैसा रिश्ता है। जैसे मॉरिशस के लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहे, वैसे ही हमें भी अपने आस-पास की प्रकृति से जुड़े रहना सीखना है।
Frequently Asked Questions
हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान पाठ का सारांश क्या है?
इस यात्रा-वृत्तांत में रामधारी सिंह दिनकर मॉरिशस जाते हैं और देखते हैं कि वहाँ की अधिकांश जनता भारतीय मूल की है। वहाँ के लोग सदियों पहले भारत से गए थे लेकिन आज भी अपनी भाषा, धर्म और संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं।
मॉरिशस को 'छोटा-सा हिंदुस्तान' क्यों कहा गया है?
मॉरिशस में लगभग 67% लोग भारतीय मूल के हैं और 53% हिंदू हैं। वहाँ हिंदी-भोजपुरी बोली जाती है, शिव मंदिर हैं, शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है और कई जगहों के नाम काशी, बनारस, गोकुल जैसे हैं। इसीलिए इसे 'छोटा-सा हिंदुस्तान' कहते हैं।
मॉरिशस में भारतीय लोग कैसे पहुँचे?
सदियों पहले बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूरों को खेती के काम के लिए मॉरिशस लाया गया था। उन्होंने वहाँ बहुत कठिनाइयाँ झेलीं लेकिन अपना धर्म, भाषा और संस्कृति नहीं छोड़ी।
परी-तालाब या गंगा-तालाब क्या है?
परी-तालाब (जिसे गंगा-तालाब भी कहते हैं) मॉरिशस की एक पवित्र झील है। शिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु यहाँ आकर इस झील का जल लेकर शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
इस पाठ का संदेश है कि चाहे हम दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से जुड़े रहना हमारी पहचान और ताकत है। मॉरिशस के भारतीय इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं।