फूल और काँटा

Chapter 3 · Hindi · Class 7 19 min read

इस पाठ का महत्व

ज़रा एक गुलाब के पौधे को याद कीजिए। उसी पौधे पर सुंदर फूल भी होते हैं और तीखे काँटे भी।

दोनों एक ही जगह उगे हैं। दोनों को एक ही जड़ से पानी मिलता है, एक ही धूप मिलती है। फिर भी एक हमें खुशबू और खुशी देता है, और दूसरा हमें चुभ जाता है।

ऐसा क्यों होता है? जब सब कुछ एक जैसा मिला, तो स्वभाव अलग कैसे हो गया?

यही सवाल इस कविता का दिल है। और इसका जवाब हमारे अपने जीवन से जुड़ा है। हमारे आस-पास भी ऐसे लोग होते हैं जो एक ही घर, एक ही स्कूल, एक ही परिवार में पलते हैं — फिर भी कोई सबकी मदद करता है और कोई सबको दुख देता है।

यह कविता हमें यही सिखाती है कि किसी की बड़ाई उसके ऊँचे कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके अच्छे गुणों और व्यवहार से तय होती है। पढ़ने के बाद आप समझ जाएँगे कि असली बड़प्पन क्या है।

मूल भाव

इस कविता का मूल भाव है — फूल और काँटा एक ही पौधे पर पलते हैं, एक ही हवा-पानी पाते हैं, फिर भी दोनों का स्वभाव अलग है। काँटा राह चलते को चुभता और घायल करता है। फूल सबको सुगंध और सुंदरता देता है। इसी से कवि एक बड़ी बात कहते हैं — किसी का बड़प्पन उसके गुणों और अच्छे व्यवहार से आता है, न कि उसके ऊँचे कुल या जन्म से।

📖 मूल पाठ कहाँ पढ़ें: इस पृष्ठ पर हमने कविता का सरल अर्थ और व्याख्या दी है। पूरी मूल कविता अपनी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “मल्हार” (कक्षा 7) में पढ़ें, और इस व्याख्या के साथ मिलाकर समझें।

कविता का भावार्थ

आइए अब कविता का भाव धीरे-धीरे, एक-एक विचार करके समझते हैं। हम मूल पंक्तियाँ नहीं दोहराएँगे, बस उनका सरल अर्थ अपने शब्दों में बताएँगे।

कवि सबसे पहले एक समानता दिखाते हैं। वे कहते हैं — फूल और काँटा, दोनों एक ही जगह जन्म लेते हैं। एक ही पौधा दोनों को पालता है। रात में जो चाँद चमकता है, वह दोनों पर एक जैसी चाँदनी डालता है।

फिर वे और समानताएँ गिनाते हैं। बारिश दोनों पर एक जैसी बरसती है। हवा भी दोनों पर एक जैसी बहती है। यानी जो कुछ भी पौधे को मिलता है, वह फूल और काँटे — दोनों को बराबर मिलता है।

पर इसके बाद कवि एक ज़रूरी बात कहते हैं। वे कहते हैं — इतना सब एक जैसा मिलने पर भी, दोनों के ढंग (स्वभाव और व्यवहार) एक जैसे नहीं होते।

अब कवि काँटे का व्यवहार बताते हैं। काँटा राह चलते किसी की उँगली में चुभ जाता है। किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है। प्यार से उड़ती तितलियों के पंख काट देता है, और काले भौंरे के शरीर को भी छेद देता है। यानी काँटा सबको पीड़ा पहुँचाता है।

इसके उलट, अब कवि फूल का व्यवहार बताते हैं। फूल तितलियों को अपनी गोद में बैठाता है। भौंरे को अपना मीठा, अनूठा रस पिलाता है। अपनी सुगंध और अनोखे रंगों से वह सबका मन खिला देता है, सबको खुश कर देता है।

इन दोनों के अलग व्यवहार से नतीजा भी अलग होता है। कवि कहते हैं — काँटा सबकी आँखों में खटकता है, यानी किसी को अच्छा नहीं लगता। और फूल देवता के सिर (माथे) पर सजता है, यानी सबको प्यारा लगता है।

नीचे दिया गया चित्र इसी पूरे फ़र्क को एक साथ दिखाता है।

फूल और काँटे की तुलना — एक ही डाली पर दोनों, पर फूल देता है और काँटा चुभता है
Figure 3.1 — चित्र 3.1 — एक ही डाली, पर दो अलग स्वभाव। ऊपर हरी डाली एक ही है, और दोनों को एक जैसी हवा, पानी, धूप और चाँदनी मिलती है। बाईं ओर फूल है — वह सबको सुगंध और सुंदरता देता है, तितली-भौंरे को गोद में लेता है, देवता के माथे पर सजता है और सबकी आँखों को भाता है। दाईं ओर काँटा है — वह राह चलते की उँगली चुभता है, वस्त्र फाड़ देता है, तितली-भौंरे को घायल करता है और सबकी आँखों में खटकता है।

अंत में कवि सबसे बड़ी बात कहते हैं। वे पूछते हैं — किसी का ऊँचा कुल (खानदान, वंश) किस काम का, अगर उसमें बड़प्पन की कमी हो? यानी सिर्फ़ ऊँचे घर में जन्म लेना काफ़ी नहीं है। असली बड़ाई तो अच्छे गुणों और व्यवहार से आती है।

तो पूरी कविता का सार यह है — एक जैसी सुविधाएँ मिलने पर भी हर किसी का स्वभाव अलग होता है, और किसी का सम्मान उसके गुणों से होता है, उसके कुल से नहीं।

आइए गहराई से समझें

अब कविता के पीछे छिपी बातों को थोड़ा गहराई से देखते हैं। पहले एक छोटा शब्द साफ़ कर लें, जो पूरी कविता का केंद्र है।

समानता एक, पर स्वभाव अलग

कविता का सबसे पहला कमाल यह है कि वह दो हिस्सों में बँटी है। पहले आधे में कवि समानताएँ गिनाते हैं, और दूसरे आधे में भिन्नताएँ (अंतर)।

यह तरीका जान-बूझकर अपनाया गया है। पहले कवि हमें यकीन दिला देते हैं कि फूल और काँटे को सब कुछ एक जैसा मिला है। तभी जब अंतर सामने आता है, तो वह और भी चौंकाने वाला लगता है। नीचे का चित्र इसी दो-हिस्से वाले ढाँचे को दिखाता है।

फूल और काँटे की समानता और भिन्नता — ऊपर एक जैसा वातावरण, नीचे अलग स्वभाव
Figure 3.2 — चित्र 3.2 — समानता एक, पर स्वभाव अलग। सबसे ऊपर बैंगनी बक्से में समानता है — दोनों को एक ही पौधा, एक ही धूप, एक ही चाँदनी, एक जैसी बारिश और एक जैसी हवा मिलती है। नीचे यह दो रास्तों में बँट जाता है। बाईं हरी ओर फूल का स्वभाव है — वह देता है, सुख पहुँचाता है, सबका मन जीत लेता है, यानी अच्छा गुण। दाईं लाल ओर काँटे का स्वभाव है — वह चुभता है, पीड़ा पहुँचाता है, सबकी आँखों में खटकता है, यानी बुरा व्यवहार।

चित्र 3.2 से साफ़ है — परिस्थिति एक जैसी होने पर भी, स्वभाव अलग-अलग हो सकता है।

फूल बनाम काँटा — सीधी तुलना

अब फूल और काँटे को एक साथ रखकर देखते हैं। इससे दोनों का फ़र्क बिलकुल साफ़ हो जाएगा।

बातफूलकाँटा
जन्म कहाँएक ही पौधे परउसी एक पौधे पर
क्या मिलता हैएक जैसी धूप, हवा, पानी, चाँदनीएक जैसी धूप, हवा, पानी, चाँदनी
व्यवहारसुगंध और सुंदरता देता हैचुभता और घायल करता है
तितली-भौंरे सेगोद में लेता है, रस पिलाता हैपंख काटता, शरीर छेदता है
लोगों कोभाता है, सबका मन जीतता हैखटकता है, बुरा लगता है
प्रतीक हैअच्छाई, परोपकार, प्रेमबुराई, कठोरता, स्वार्थ

ध्यान दीजिए — ऊपर की दो पंक्तियाँ (जन्म और सुविधाएँ) दोनों के लिए एक जैसी हैं। पर नीचे की पंक्तियाँ (व्यवहार) बिलकुल अलग हैं। यही कविता का पूरा सार है।

काव्य-सौंदर्य और भाषा

अब देखते हैं कि कवि ने इन भावों को इतना सुंदर कैसे बना दिया। इस कविता का काव्य-सौंदर्य कुछ खास बातों से बनता है।

1. प्रतीक का प्रयोग। कवि सीधे “अच्छे लोग” और “बुरे लोग” नहीं कहते। वे फूल और काँटे के ज़रिए यह बात कहते हैं। जब किसी बड़ी बात को किसी चीज़ के रूप में दिखाया जाए, तो उसे प्रतीक कहते हैं। फूल अच्छे स्वभाव का प्रतीक है, काँटा बुरे स्वभाव का।

2. मानवीकरण। कवि फूल और काँटे को इंसान की तरह काम करते दिखाते हैं — फूल “गोद में लेता है” और “रस पिलाता है”, काँटा “घायल करता है”। निर्जीव या पेड़-पौधे को इंसान जैसा दिखाना मानवीकरण कहलाता है।

3. तुक (rhyme)। कविता की हर दूसरी पंक्ति के अंत में मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द आते हैं। इससे कविता गाने जैसी, लयदार लगती है। पढ़ने में मज़ा आता है।

4. विरोधी शब्दों का जोड़ा। कवि एक-दूसरे के उलटे भाव साथ-साथ रखते हैं — एक “खटकता” है तो दूसरा “सोहता” (सजता) है। इस उलट से अंतर और तेज़ चमकता है।

“नथिंग इज़ ए गिवन” — स्वभाव अलग क्यों, जब सब कुछ एक जैसा मिला?

यहाँ एक बहुत ज़रूरी सवाल है, जिसे कविता पूछती तो है पर सीधे जवाब नहीं देती। फूल और काँटे को एक ही पौधा, एक ही पानी, एक ही धूप मिली। फिर उनका व्यवहार अलग क्यों हो गया?

इसका जवाब यह है — परिस्थिति (जो बाहर से मिलता है) और स्वभाव (जो अंदर से आता है) दो अलग चीज़ें हैं। धूप-पानी बाहर से मिलने वाली चीज़ें हैं। पर कोई दूसरों को सुख देगा या दुख — यह उसके अपने अंदर के स्वभाव से तय होता है।

इसी बात को इंसानों पर लगाकर देखिए। एक ही परिवार के दो भाई एक जैसे घर में, एक जैसी सुविधाओं में पलते हैं। फिर भी एक दयालु और मददगार बनता है, दूसरा स्वार्थी और कठोर। क्यों? क्योंकि अच्छाई कोई बाहर से मिलने वाली चीज़ नहीं है — वह हर किसी को अपने अंदर खुद चुननी और बनानी पड़ती है।

इसीलिए कवि कहते हैं कि ऊँचा कुल काफ़ी नहीं है। ऊँचा कुल तो वही “एक जैसी धूप-पानी” है, जो जन्म के साथ मिल जाता है। पर असली बड़प्पन — दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार — वह तो हर किसी को अपने गुणों से खुद कमाना पड़ता है।

एक छोटी जाँच करते हैं, ताकि यह बात पक्की हो जाए।

Concept check

फूल और काँटे को एक जैसा वातावरण मिलने पर भी उनका व्यवहार अलग क्यों है?

मुख्य संदेश के पीछे का क्यों

अब पूरी कविता का मुख्य संदेश एक क्रम में समझ लेते हैं। नीचे का चित्र इसे सीढ़ी की तरह दिखाता है।

कविता का मुख्य संदेश — बड़प्पन कुल से नहीं, गुणों से आता है
Figure 3.3 — चित्र 3.3 — बड़प्पन किससे आता है, क्रम से। पहला नीला बक्सा: फूल और काँटा एक ही ऊँचे कुल (पौधे) में जन्मे हैं, यानी जन्म और कुल एक ही है। दूसरा पीला बक्सा: फिर भी एक भाता है और दूसरा खटकता है, यानी अंतर कुल का नहीं बल्कि स्वभाव और व्यवहार का है। तीसरा हरा बक्सा: ऊँचा कुल तब काम नहीं आता जब गुण की कमी हो। सबसे नीचे बैंगनी पट्टी में संदेश: बड़प्पन गुण और अच्छे व्यवहार से आता है, जन्म या कुल से नहीं।

चित्र 3.3 हमारे सवाल का जवाब दे देता है। कवि कहना चाहते हैं कि समाज में अक्सर लोग किसी को सिर्फ़ उसके बड़े खानदान की वजह से सम्मान देते हैं। पर यह गलत है। सच्चा सम्मान तो उसी को मिलना चाहिए जिसका व्यवहार अच्छा हो, जो दूसरों को सुख पहुँचाए — चाहे वह किसी भी कुल में जन्मा हो।

आम भूलें

कुछ बातें ऐसी हैं जिनमें बच्चे अक्सर उलझ जाते हैं। आइए इन्हें साफ़ कर लें।

⚠️ Common mistake
What students think

कविता बता रही है कि फूल अच्छा होता है और काँटा बुरा — बस इतनी ही बात है।

Why it seems right

ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि कविता में सचमुच फूल की तारीफ़ और काँटे की बुराई की गई है, तो लगता है पूरी बात फूल बनाम काँटे की ही है।

What actually happens

फूल और काँटा तो सिर्फ़ प्रतीक हैं। कविता असल में लोगों के बारे में है — कि किसी की पहचान उसके अच्छे या बुरे व्यवहार से होती है, उसके कुल या जन्म से नहीं।

⚠️ Common mistake
What students think

चूँकि फूल और काँटे को एक जैसा वातावरण मिलता है, इसलिए दोनों का स्वभाव भी एक जैसा होना चाहिए।

Why it seems right

ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि आम तौर पर हम सोचते हैं कि जिसे एक जैसी चीज़ें मिलें, वह एक जैसा ही बनेगा।

What actually happens

वातावरण एक जैसा होने पर भी स्वभाव अलग हो सकता है। बाहर से मिलने वाली चीज़ें और अंदर का स्वभाव दो अलग बातें हैं — यही तो कविता की सबसे बड़ी सीख है।

⚠️ Common mistake
What students think

'बड़प्पन' का मतलब है बड़ा या अमीर खानदान होना।

Why it seems right

ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि शब्द में 'बड़ा' आता है, तो लगता है बात बड़े घर या ऊँचे कुल की हो रही है।

What actually happens

बड़प्पन का मतलब है अच्छे गुणों और व्यवहार से बड़ा होना — जैसे दया, परोपकार, विनम्रता। यह पैसे या खानदान से नहीं, बल्कि अच्छे स्वभाव से आता है।

जाँचिए अपनी समझ

अब अपनी समझ परखते हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़िए और सही विकल्प चुनिए।

कविता के अनुसार फूल और काँटे को क्या-क्या एक जैसा मिलता है?

कविता में काँटे के बारे में कौन-सी बात सही है?

कविता का मुख्य संदेश क्या है?

'फूल लेकर तितलियों को गोद में' — इस पंक्ति में फूल को इंसान की तरह दिखाया गया है। यह कौन-सा काव्य-गुण है?

अभ्यास (श्रेणीबद्ध)

अब थोड़ा अभ्यास करते हैं। पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।

सरल

सरल

कविता में फूल और काँटे को कौन-कौन सी चीज़ें एक जैसी मिलती हैं? कोई चार लिखिए।

सरल

शब्दार्थ लिखिए: (क) कुल (ख) बड़प्पन (ग) सोहता (घ) खटकता।

मध्यम

मध्यम

फूल और काँटे के व्यवहार में मुख्य अंतर क्या है? अपने शब्दों में समझाइए।

मध्यम

कविता में फूल और काँटा किस-किसके प्रतीक हैं? समझाइए।

चुनौती

चुनौती

'किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।' — इस पंक्ति का भाव उदाहरण देकर समझाइए।

चुनौती

कविता कहती है कि एक जैसा वातावरण मिलने पर भी स्वभाव अलग हो सकता है। इस सीख को आप अपने जीवन में कैसे अपना सकते हैं?

सारांश

  • फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और दोनों को एक जैसी धूप, चाँदनी, बारिश और हवा मिलती है।
  • फिर भी दोनों का स्वभाव अलग है — यही कविता की पहली बड़ी बात है।
  • काँटा राह चलते को चुभता है, वस्त्र फाड़ता है, और तितली-भौंरे को घायल करता है। वह सबकी आँखों में खटकता है।
  • फूल तितली को गोद में लेता है, भौंरे को रस पिलाता है, और अपनी सुगंध-रंग से सबका मन खुश करता है। वह देवता के माथे पर सजता है।
  • फूल अच्छे स्वभाव (परोपकार, प्रेम) का प्रतीक है, और काँटा बुरे स्वभाव (कठोरता, स्वार्थ) का।
  • कविता का काव्य-सौंदर्य बनता है — प्रतीक, मानवीकरण, तुक और विरोधी शब्दों के जोड़े से।
  • मुख्य संदेश — बड़प्पन ऊँचे कुल या जन्म से नहीं, बल्कि अच्छे गुणों और व्यवहार से आता है।
  • वातावरण एक जैसा होने पर भी स्वभाव अलग हो सकता है — अच्छाई हर किसी को अपने अंदर खुद चुननी पड़ती है।

आगे क्या?

फूल और काँटे से हमने जाना कि असली बड़प्पन गुणों से आता है। अब अगला पाठ हमें प्रकृति की एक बहुत ज़रूरी चीज़ की ओर ले जाता है। अगला पाठ है पाठ 4 — “पानी रे पानी। जैसे फूल और काँटे की कविता में हवा-पानी सबको जीवन देते दिखे, वैसे ही यह पाठ बताएगा कि पानी हमारे जीवन के लिए कितना अनमोल है और हमें उसे क्यों सँभालकर रखना चाहिए।

Frequently Asked Questions

फूल और काँटा कविता का सारांश क्या है?

इस कविता में बताया गया है कि फूल और काँटा एक ही पौधे पर उगते हैं और दोनों को एक जैसी धूप, हवा, पानी और चाँदनी मिलती है। फिर भी दोनों का स्वभाव अलग है — काँटा राह चलते को चुभता और घायल करता है, जबकि फूल सबको सुगंध और सुंदरता देता है। संदेश यह है कि किसी का बड़प्पन उसके गुणों से तय होता है, ऊँचे कुल से नहीं।

फूल और काँटा कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता का मुख्य संदेश है कि किसी का बड़प्पन उसके जन्म या ऊँचे कुल से नहीं, बल्कि उसके अच्छे गुणों और व्यवहार से तय होता है। एक ही कुल में जन्मे फूल और काँटे की तरह, अगर व्यक्ति में गुण की कमी हो तो ऊँचे कुल की बड़ाई किसी काम नहीं आती।

फूल और काँटा में फूल और काँटा किसके प्रतीक हैं?

फूल अच्छाई, कोमलता, परोपकार, प्रेम और दूसरों को सुख देने वाले स्वभाव का प्रतीक है। काँटा बुराई, कठोरता, स्वार्थ और दूसरों को पीड़ा पहुँचाने वाले स्वभाव का प्रतीक है। दोनों एक ही जगह जन्म लेकर भी अलग व्यवहार करते हैं।

फूल और काँटा एक जैसे क्यों नहीं हैं जबकि उन्हें एक जैसा वातावरण मिलता है?

क्योंकि वातावरण एक जैसा होने पर भी दोनों का अपना स्वभाव अलग है। यही कविता की सीख है — सुविधाएँ एक जैसी मिलने पर भी हर किसी का व्यवहार उसके अपने गुणों से बनता है, न कि सिर्फ़ उसे मिली परिस्थिति से।

फूल और काँटा कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं। उनका जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध रचना 'प्रियप्रवास' को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है, और उन्होंने बच्चों के लिए भी कई रोचक कविताएँ लिखी हैं।