माँ, कह एक कहानी

Chapter 1 · Hindi · Class 7 20 min read

इस पाठ का महत्व

ज़रा सोचिए। जब आप छोटे थे, तब रात को सोने से पहले किसने आपको कहानी सुनाई होगी? शायद माँ ने, या दादी-नानी ने।

कहानियाँ सिर्फ़ मन बहलाने के लिए नहीं होतीं। हर अच्छी कहानी हमें कुछ न कुछ सिखाती है। चुपके से, बिना भाषण दिए।

यह कविता ऐसी ही एक कहानी है। इसमें एक माँ अपने बेटे को एक कहानी सुनाती है। पर कहानी के अंत में वह कुछ अनोखा करती है — वह खुद फैसला नहीं देती। वह बेटे से पूछती है, “तू बता, सही कौन है?”

इसी में इस कविता की खूबसूरती है। यह हमें सिखाती है कि जब किसी को बचाने वाले और किसी को मारने वाले में झगड़ा हो, तो न्याय किसका साथ देता है। यह सवाल आज भी उतना ही ज़रूरी है जितना तब था। पढ़ने के बाद आपको करुणा, न्याय और सही-गलत में फ़र्क़ करना थोड़ा और साफ़ समझ आएगा।

मूल भाव

इस कविता का मूल भाव है — दया और न्याय हमेशा साथ चलते हैं। माँ यशोधरा अपने बेटे राहुल को एक कहानी सुनाती है, जिसमें पिता सिद्धार्थ ने एक घायल हंस को बचाया। एक शिकारी उसी हंस को अपना शिकार बताकर माँगता है। इस पर राहुल फैसला देता है — बचाने वाला (रक्षक) मारने वाले (भक्षक) से बड़ा है। यानी न्याय हमेशा करुणा का, दया का पक्ष लेता है। साथ ही कविता माँ और बेटे के प्यार-भरे रिश्ते को भी दिखाती है।

📖 मूल पाठ कहाँ पढ़ें: इस पृष्ठ पर हमने कविता का सरल अर्थ और व्याख्या दी है। पूरी मूल कविता अपनी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “मल्हार” (कक्षा 7) में पढ़ें, और इस व्याख्या के साथ मिलाकर समझें। यहाँ हम मूल पंक्तियाँ दोबारा नहीं छाप रहे — बस उनका भाव अपने शब्दों में खोल रहे हैं।

कवि से परिचय

इससे पहले कि हम कविता में उतरें, यह जान लेना अच्छा रहेगा कि इसे लिखा किसने।

इस कविता के कवि हैं मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964)। उनका जन्म झाँसी के पास चिरगाँव (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे सिर्फ़ पंद्रह-सोलह साल की उम्र में ही कविता लिखने लगे थे। पहले उन्होंने ब्रज भाषा में लिखा, फिर जीवन भर हिंदी में लिखते रहे।

स्वतंत्रता आंदोलन के समय उनकी कविताओं ने लोगों के मन में देशप्रेम जगाया। इसीलिए उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं — साकेत, भारत-भारती और यशोधरा

यह कविता “माँ, कह एक कहानी” उनकी काव्य-कृति यशोधरा का एक अंश है।

कविता का भावार्थ

आइए अब कविता का भाव धीरे-धीरे, क्रम से समझते हैं। यह पूरी कविता माँ और बेटे की बातचीत है, इसलिए हम साथ-साथ देखेंगे कि कौन क्या कह रहा है।

पहले यह जान लें कि कविता के पात्र कौन हैं, वरना बातचीत उलझ सकती है। नीचे का चित्र सभी पात्रों को एक साथ दिखाता है।

कविता के पात्र — माँ यशोधरा, बेटा राहुल, पिता सिद्धार्थ, घायल हंस और शिकारी आखेटक
Figure 1.1 — चित्र 1.1 — कविता का पात्र-मानचित्र। ऊपर कविता बोलने वाले दो पात्र हैं — माँ यशोधरा (कहानी सुनाने वाली, सिद्धार्थ की पत्नी) और बेटा राहुल (कहानी सुनने वाला, थोड़ा हठी)। इन दोनों के बीच की दोहरी तीर बताती है कि पूरी कविता इन्हीं की आपसी बातचीत है। नीचे कहानी के अंदर के तीन पात्र हैं — पिता सिद्धार्थ, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध बने और जिन्होंने हंस को बचाया (रक्षक); बीच में घायल हंस, जिस पर सारा विवाद हुआ; और शिकारी आखेटक, जिसने हंस को तीर मारा और फिर उसे माँगा (भक्षक)। सबसे नीचे राहुल का फैसला है — रक्षक भक्षक से बड़ा है।

अब कहानी शुरू करते हैं। चित्र 1.1 के पात्रों को ध्यान में रखकर पढ़िए।

बेटा माँ से कहानी माँगता है। राहुल माँ से ज़िद करता है — “माँ, एक कहानी सुनाओ।” माँ हँसकर कहती है — “क्या तूने मुझे अपनी नानी समझ लिया है?” बेटा फिर भी हठ करता है — “लेटे-लेटे ही सही, बस सुनाओ। राजा की कहानी थी या रानी की?” वह बार-बार वही बात दोहराता है। बच्चों की यही प्यारी ज़िद यहाँ दिखती है।

माँ कहानी शुरू करती है। माँ कहती है — “तू बड़ा हठी है, मेरे प्यारे। सुन। एक सुबह बहुत सवेरे, तेरे पिता एक बाग़ (उपवन) में टहल रहे थे। वहाँ चारों ओर खुशबू फैली थी।”

बाग़ का सुंदर दृश्य। माँ बाग़ का चित्र खींचती है — रंग-बिरंगे फूल खिले थे। ओस की बूँदें फूलों-पत्तों पर मोतियों जैसी चमक रही थीं। हल्की-हल्की हवा बह रही थी। पास में पानी लहरा रहा था। पक्षी मीठी आवाज़ में गा रहे थे। बेटा बीच-बीच में पूछता रहता है — “पानी लहरा रहा था?” — और माँ कहती है, “हाँ, यही कहानी।”

अचानक एक हंस गिरता है। तभी अचानक ऊपर आकाश से एक हंस गिर पड़ता है। किसी ने उसे तेज़ तीर से घायल कर दिया था। उसका पंख टूट गया था। बेटा सिहर उठता है — “अरे, यह तो करुणा-भरी कहानी है!”

यहाँ कहानी एक मोड़ लेती है। पूरी कहानी कैसे आगे बढ़ती है, यह नीचे का कथानक-चक्र क्रम से दिखाता है।

कहानी का कथानक-चक्र — माँ का सुनाना, उपवन, हंस का घायल होना, सिद्धार्थ का बचाना, शिकारी, विवाद, न्यायालय और राहुल का निर्णय
Figure 1.2 — चित्र 1.2 — कहानी का कथानक-चक्र, क्रम से। (1) माँ यशोधरा बेटे राहुल को कहानी सुनाना शुरू करती है। (2) उपवन के सवेरे पिता सिद्धार्थ टहल रहे थे। (3) तभी एक हंस तीर लगने से ऊपर से गिर पड़ा। (4) सिद्धार्थ ने उसे उठाया और बचाया — हंस को मानो नया जीवन मिला। (5) तभी शिकारी (आखेटक) आया और हंस को अपना शिकार बताकर माँगा। (6) इस पर दोनों में विवाद छिड़ गया, दोनों अपनी बात पर अड़ गए। (7) बात न्यायालय तक पहुँची। (8) अंत में राहुल फैसला देता है कि रक्षक का पक्ष सही है — बचाने वाला बड़ा है, क्योंकि न्याय दया का पक्ष लेता है। तीर हर कदम की दिशा बताते हैं।

जैसा चित्र 1.2 दिखाता है, अब कहानी का असली मोड़ आता है।

सिद्धार्थ हंस को बचाते हैं। सिद्धार्थ चौंक जाते हैं। वे घायल हंस को उठा लेते हैं और उसका इलाज करते हैं। हंस को मानो दूसरा जन्म मिल जाता है।

शिकारी आता है और हंस माँगता है। तभी वह शिकारी आ पहुँचता है जिसने तीर मारा था। वह कहता है — “यह हंस मेरा है, मैंने इसे मारा है, यह मुझे दो।” वह अपने शिकार पर अड़ जाता है। पर सिद्धार्थ हंस को देने से मना कर देते हैं।

विवाद और न्यायालय। अब दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी में बहस छिड़ जाती है। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं। आख़िर बात न्यायालय तक पहुँच जाती है। यह बात इतनी फैल जाती है कि सब लोग इसे जानने लगते हैं।

माँ बेटे से फैसला माँगती है। अब माँ कहानी रोक देती है। वह बेटे से पूछती है — “राहुल, तू ही बता। न्याय किसका पक्ष लेगा? बिना डरे बता, जीत किसकी होनी चाहिए?”

राहुल का फैसला। राहुल थोड़ा सोचकर कहता है — जो किसी निरपराध (बेक़सूर) को मारे, उसका हक़ उस पर कैसे बन सकता है? जो उसे बचाए, हंस तो उसी का है। इसलिए बचाने वाला (रक्षक) मारने वाले (भक्षक) से बड़ा है। एक प्रसिद्ध पंक्ति में राहुल कहता है — “न्याय दया का दानी” — यानी न्याय हमेशा दया देने वाले का साथ देता है।

माँ खुश होकर कहती है — “तूने कहानी को सच में समझ लिया।”

तो पूरी कविता का सार यह है — बचाने वाला सबसे ऊँचा है, और सच्चा न्याय हमेशा दया के साथ खड़ा होता है।

आइए गहराई से समझें

अब कविता के पीछे छिपी बातों को थोड़ा गहराई से देखते हैं। हम समझेंगे कि कवि ने क्या किया, और क्यों किया।

मुख्य भाव — चार भावों का जाल

इस छोटी-सी कविता में एक साथ कई भाव बुने हुए हैं। नीचे का भाव-जाल इन्हें एक साथ दिखाता है।

कविता का भाव-जाल — करुणा, न्याय, अहिंसा और माँ-बेटे का स्नेह
Figure 1.3 — चित्र 1.3 — कविता का भाव-जाल। बीच में कविता का मूल भाव है। उससे चार भाव जुड़े हैं — करुणा (घायल हंस पर दया आना), न्याय (सही और ग़लत का सच्चा फैसला), अहिंसा (किसी निरपराध को मारना ग़लत है) और माँ-बेटे का स्नेह (दोनों की प्यार-भरी बातचीत)। ये चारों भाव मिलकर कविता को गहरा और सुंदर बनाते हैं।

चित्र 1.3 से साफ़ है कि यह कविता सिर्फ़ एक हंस की कहानी नहीं है। इसमें करुणा है — हंस के दर्द पर दया। न्याय है — सही फैसले का सवाल। अहिंसा है — यह विचार कि किसी बेक़सूर को मारना ग़लत है। और इन सबके ऊपर माँ-बेटे का स्नेह है, जो पूरी बातचीत को गर्माहट देता है।

काव्य-सौंदर्य — कविता को सुंदर क्या बनाता है

अब देखते हैं कि कवि ने इस बातचीत को इतना सजीव कैसे बना दिया।

पहले एक छोटा शब्द समझ लें, जो आगे काम आएगा।

इस कविता का काव्य-सौंदर्य चार बातों से बनता है:

1. संवाद-शैली। पूरी कविता माँ और बेटे की आपसी बातचीत के रूप में है। एक बोलता है, दूसरा जवाब देता है। इसी को संवाद-शैली कहते हैं। इससे लगता है मानो हम सच में दोनों की बातें सुन रहे हों।

2. पंक्तियों का दोहराव। कुछ पंक्तियाँ कविता में दो बार आती हैं। जैसे बेटा माँ की बात को फिर से पूछता है — “राजा था या रानी?”। इस दोहराव से बातचीत और साफ़ हो जाती है, और गाने जैसी मीठी लगती है।

3. तुक (rhyme)। पंक्तियों के अंत के शब्दों की आवाज़ आपस में मिलती-जुलती है, जैसे “कहानी… रानी… नानी”। इससे कविता लय में बहती है और याद रखने में आसान हो जाती है।

4. प्रकृति का वर्णन। कवि बाग़ का सुंदर चित्र खींचते हैं — फूल, ओस, हवा, पानी, गाते पक्षी। यह सुंदर दृश्य आगे की दुखद घटना (हंस का घायल होना) को और गहरा बना देता है।

“नथिंग इज़ ए गिवन” — राहुल का फैसला सही क्यों है?

यहाँ एक बहुत ज़रूरी सवाल है। राहुल कहता है कि हंस बचाने वाले का है, मारने वाले का नहीं। पर क्यों? शिकारी तो कह सकता है, “मैंने पहले इस पर तीर मारा, तो यह तो मेरा हुआ न?” फिर राहुल का फैसला सही कैसे?

इसका जवाब समझने के लिए सोचिए कि न्याय असल में क्या तौलता है। न्याय यह नहीं देखता कि किसने हंस को पहले छुआ। न्याय यह देखता है कि किसके काम से हंस का भला हुआ, और किसके काम से बुरा। शिकारी के काम (तीर मारना) से हंस मरने को था। सिद्धार्थ के काम (इलाज करना) से हंस जी उठा।

नीचे की तुला यही तौल दिखाती है।

न्याय की तुला — एक पलड़े में रक्षक (बचाने वाला), दूसरे में भक्षक (मारने वाला); तुला रक्षक की ओर झुकी है
Figure 1.4 — चित्र 1.4 — न्याय की तुला। बीच में न्याय का काँटा है। बाएँ पलड़े में रक्षक है — पिता सिद्धार्थ, जिन्होंने हंस को जीवन दिया और दया दिखाई। दाएँ पलड़े में भक्षक है — शिकारी, जिसने हंस को तीर मारा और सिर्फ़ अपना शिकार चाहा। तुला बाईं ओर, यानी रक्षक की ओर झुकी है, क्योंकि उसका पलड़ा भारी है। नीचे का संदेश बताता है — न्याय दया का पक्ष लेता है, इसलिए रक्षक जीतता है।

चित्र 1.4 हमारे सवाल का जवाब दे देता है। मारने का इरादा हंस के लिए बुरा था; बचाने का इरादा भला था। अगर हम मारने वाले को हक़ दे दें, तो हम क्रूरता को इनाम दे रहे हैं। पर अगर हम बचाने वाले को हक़ दें, तो हम दया को इनाम देते हैं। इसीलिए राहुल का फैसला सही है — न्याय दया का दानी।

एक छोटी जाँच करते हैं, ताकि यह बात पक्की हो जाए।

Concept check

राहुल के अनुसार हंस बचाने वाले का क्यों है, मारने वाले का क्यों नहीं?

पात्रों के चुनाव और संदेश — माँ ने खुद फैसला क्यों नहीं दिया?

अब एक और सुंदर बात पर ध्यान दें। माँ कहानी जानती थी। वह आसानी से बेटे को सही जवाब बता सकती थी। पर उसने बताया नहीं — उसने बेटे से पूछा

ऐसा उसने क्यों किया? क्योंकि सीधे बता दिया गया जवाब जल्दी भूल जाता है। पर जो जवाब हम खुद सोचकर निकालते हैं, वह जीवन भर याद रहता है। माँ चाहती थी कि राहुल सिर्फ़ कहानी न सुने, बल्कि सोचना सीखे — सही और ग़लत में फ़र्क़ करना सीखे। यही सबसे अच्छी शिक्षा है।

और पात्रों का चुनाव भी सोच-समझकर हुआ है। पिता सिद्धार्थ आगे चलकर गौतम बुद्ध बने — वे करुणा और अहिंसा के सबसे बड़े प्रतीक हैं। तो जिस इंसान ने आगे चलकर पूरी दुनिया को दया का पाठ पढ़ाया, उसी ने बचपन में एक घायल हंस को बचाया — यह बात कहानी को और गहरा बना देती है।

आम भूलें

कुछ बातें ऐसी हैं जिनमें बच्चे अक्सर उलझ जाते हैं। आइए इन्हें साफ़ कर लें, ताकि आप ये भूलें न करें।

⚠️ Common mistake
What students think

हंस शिकारी का है, क्योंकि उसने पहले उस पर तीर मारा था।

Why it seems right

ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि रोज़मर्रा में हम सोचते हैं कि जिसने किसी चीज़ को पहले पकड़ा या उस पर पहले हाथ डाला, वह उसका 'मालिक' हो जाता है।

What actually happens

न्याय यह नहीं देखता कि किसने पहले हाथ डाला, बल्कि यह देखता है कि किसके काम से हंस का भला हुआ। मारने वाले ने नुकसान किया, बचाने वाले ने जीवन दिया — इसलिए हंस बचाने वाले का है।

⚠️ Common mistake
What students think

यह कविता सिर्फ़ एक हंस और शिकारी की कहानी है।

Why it seems right

ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि कविता में ज़्यादातर घटनाएँ हंस, शिकारी और सिद्धार्थ के इर्द-गिर्द घूमती हैं, तो ध्यान उसी कहानी पर टिक जाता है।

What actually happens

हंस की कहानी तो सिर्फ़ बहाना है। असली बात है — करुणा, न्याय और अहिंसा का संदेश देना, और साथ ही माँ-बेटे के प्यार को दिखाना।

⚠️ Common mistake
What students think

माँ बेटे को जवाब नहीं जानती थी, इसलिए उसने उससे पूछ लिया।

Why it seems right

ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि आम तौर पर जब कोई सवाल पूछता है, तो हम मानते हैं कि उसे जवाब पता नहीं है।

What actually happens

माँ जवाब अच्छी तरह जानती थी। उसने जान-बूझकर पूछा, ताकि बेटा खुद सोचे और सही-गलत में फ़र्क़ करना सीखे। यही सिखाने का सबसे अच्छा तरीका है।

जाँचिए अपनी समझ

अब अपनी समझ परखते हैं। हर सवाल को ध्यान से पढ़िए और सही विकल्प चुनिए।

यह कविता 'माँ, कह एक कहानी' किसकी काव्य-कृति का अंश है?

कविता में हंस को किसने घायल किया था?

राहुल के फैसले के अनुसार हंस किसका है?

इस कविता की मुख्य काव्य-विशेषता क्या है?

अभ्यास (श्रेणीबद्ध)

अब थोड़ा अभ्यास करते हैं। पहले खुद उत्तर सोचिए, फिर “उत्तर देखें” पर क्लिक कीजिए।

सरल

सरल

कविता के तीन मुख्य पात्र कौन हैं और वे आपस में क्या रिश्ता रखते हैं?

सरल

शब्दार्थ लिखिए: (क) उपवन (ख) आखेटक (ग) रक्षक (घ) भक्षक।

मध्यम

मध्यम

कविता में 'रक्षक' और 'भक्षक' कौन हैं? इन दोनों में क्या फ़र्क़ है? एक छोटी तालिका बनाकर समझाइए।

मध्यम

माँ ने कहानी के अंत में बेटे से खुद फैसला करने को क्यों कहा? अपने शब्दों में समझाइए।

चुनौती

चुनौती

यह कविता हमें जीवन के लिए क्या सीख देती है? और इस सीख को हम अपने रोज़मर्रा के जीवन में कैसे अपना सकते हैं?

सारांश

  • “माँ, कह एक कहानी” मैथिलीशरण गुप्त की काव्य-कृति यशोधरा का एक अंश है। गुप्त जी को राष्ट्रकवि कहा जाता है।
  • यह पूरी कविता माँ यशोधरा और बेटे राहुल के बीच की बातचीत (संवाद) है।
  • माँ बेटे को कहानी सुनाती है — उपवन में एक हंस तीर से घायल होकर गिरा। पिता सिद्धार्थ (जो आगे गौतम बुद्ध बने) ने उसे बचाया।
  • एक शिकारी (आखेटक) उसी हंस को अपना शिकार बताकर माँगता है। इस पर विवाद होता है और बात न्यायालय तक पहुँचती है।
  • राहुल फैसला देता है — रक्षक (बचाने वाला) भक्षक (मारने वाले) से बड़ा है, क्योंकि न्याय हमेशा दया का पक्ष लेता है।
  • माँ ने जान-बूझकर खुद फैसला नहीं दिया, बल्कि बेटे से करवाया, ताकि वह खुद सोचना और सही-गलत में फ़र्क़ करना सीखे।
  • कविता के मुख्य भाव हैं — करुणा, न्याय, अहिंसा और माँ-बेटे का स्नेह
  • कविता का काव्य-सौंदर्य बनता है — संवाद-शैली, पंक्तियों के दोहराव, तुक और प्रकृति के सुंदर वर्णन से।

आगे क्या?

करुणा और न्याय की यह कहानी समझने के बाद, अगला पाठ बुद्धि और समझदारी की ओर ले जाता है। अगला पाठ है पाठ 2 — “तीन बुद्धिमान”। जैसे राहुल ने सोच-समझकर सही फैसला किया, वैसे ही अगली कहानी में हम देखेंगे कि असली बुद्धिमानी क्या होती है।

Frequently Asked Questions

माँ कह एक कहानी कविता का सारांश क्या है?

यह माँ यशोधरा और बेटे राहुल के बीच का संवाद है। माँ बेटे को पिता सिद्धार्थ की एक कहानी सुनाती है — उपवन में एक हंस तीर से घायल होकर गिरा, सिद्धार्थ ने उसे बचाया, पर शिकारी ने हंस माँगा। विवाद न्यायालय तक गया। राहुल फैसला देता है कि बचाने वाला (रक्षक) मारने वाले (भक्षक) से बड़ा है, क्योंकि न्याय हमेशा दया का पक्ष लेता है।

माँ कह एक कहानी कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि मैथिलीशरण गुप्त हैं, जिन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। यह अंश उनकी काव्य-कृति 'यशोधरा' से लिया गया है। उनका जन्म झाँसी के पास चिरगाँव में हुआ था और उनकी रचनाओं में देशप्रेम तथा भारतीय संस्कृति के स्वर मिलते हैं।

कविता में हंस किसका है — मारने वाले का या बचाने वाले का?

कविता का उत्तर है कि हंस बचाने वाले का है। राहुल कहता है कि जो किसी निरपराध को मारता है, उसका हक़ उस पर नहीं बनता; जो उसे बचाता है, हंस उसी का है। इसलिए रक्षक का पक्ष भक्षक से बड़ा माना गया, क्योंकि न्याय दया का पक्ष लेता है।

कविता में माँ बेटे से खुद फैसला करने को क्यों कहती है?

माँ बेटे को सीधे जवाब नहीं देती, बल्कि उससे पूछती है ताकि वह खुद सोचे और सही-गलत में फ़र्क़ करना सीखे। इस तरह सीख याद रह जाती है और बच्चे में अपने आप सही निर्णय लेने की समझ विकसित होती है। यही असली शिक्षा का तरीका है।

माँ कह एक कहानी कविता की काव्य-विशेषताएँ क्या हैं?

इस कविता में संवाद-शैली है (माँ-बेटे की बातचीत), कुछ पंक्तियाँ दो बार दोहराई गई हैं, पंक्तियों के अंत में तुक (मिलती-जुलती ध्वनि) है, और प्रकृति का सुंदर वर्णन है। ये सब मिलकर बातचीत को सजीव बनाते हैं और कविता का सौंदर्य बढ़ाते हैं।